Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Jan 19, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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💌 दो लाइन की शायरी विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। (एक लघु संग्रह)

🌹
सुन कर धड़कने तेरी रुक गई सांसे, ठहर गई धड़कने मेरी हर एक।

न दे आवाज ए साकी अब मुझ को तू मेरे नाम से, भूल गया हूं अपना नाम, घुला जहर सांसो में जो, मर गई आरज़ू मेरी अब हर एक।।

🌹
कर देती है घायल चिर के दिल धड़कने हमारी,
नशीली मदहोश निगाहें तुम्हारी।

हो ना जाए कत्ल कहि, है धारदार बहुत कातिल ये मदहोश नशीली निगाहें तुम्हारी।।

🌹
टूट कर बिखर न जाए, है नाज़ुक बहुत,सुनता है हाल ए दिल धड़कनो से अपने,आईना यह महोबत का।

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कभी कभी एक पल कि खामोशी कहि अधिक मधुर ध्वनि संगीत उत्तपन करती है।

जब कि एक शब्द ही पर्याप्त होता है, दिल और घर दोनों के टूटने के लिए।।

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कोई कहे पागल, कोई कहे दीवाना, दोष नही ये ज़माने का,
ये दिल ही धड़कती धड़कनो से बागी है जो अपने।

🌹
ये चाँद, ये सितारे, लगते है ख़ामोश से क्यों आज।
ये मौसम, ये तन्हाई, शोर है ख़ामोश इन फिज़ाओ में क्यों आज।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

पुनः प्रकाशित एव संग्रह के रूप में प्रथम बार।

19/01/2019 at 10:30 am

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