उठो, जागो, दोड़ो भागो हुआ सवेरा आलस को त्यागो,
करो ध्यान इष्ट जीवन का, जीवन ऊर्जा जीवित जो तुम्हारी।

मात पिता एक ही वो ईश्वर, अज्ञान हर अंधकार को त्यागो,
नया सवेरा, नई है ऊर्जा, जाग्रत जीवन चेतना जो तुम्हारी।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

20/01/2019 at 6:30 am

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