Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

Poetry, Kavya, Shayari, Sings, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

January 21, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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❤ धड़कती धड़कने। (Live Video at Kavi Vikrant Rajliwal)

धड़का धड़का कर रोक दी तुम-ने, हर धड़कती ये जो धड़कने।

धड़कते धड़कते धड़कना ही भूल गयी, धड़कती ये जो धड़कने।।

धक धक धक धड़कती है धड़कती ये जो धड़कने।

धड़कनो में शायद तुमको ढूंढ़ती है ये जो धड़कने।।

धड़कनों का धड़कना, याद महबूब की बिछुड़े, हर अश्क़ नाम ए महबूब, छुपा रही है खुद से धड़कने,
बेवफ़ा है ये जो धड़कने।

धड़कनो का टूटना, अक्स महोबत का वो अधूरा, धड़कनो से छुपा लिया, दर्द ए दिल, क़ायम है धड़कने,
बेवफ़ा नही है ये जो धड़कने।।

धड़कती हर धड़कन, एक रोज़ ख़ामोश हो जाएगी।

धड़कती-धड़कनो से धड़कने-महबूब की, महोबत जब खुद मिट जाना चाहेगी।।

धड़कती हर धड़कन, उस रोज़ खुद ही रोक देगा दीवाना।

धड़कती धड़कनो को और धड़का कर, चिर के दिल रोक देगा, धड़कने खुद अपनी दीवाना।।

शुक्रिया।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
21/01/2019 at 21:00 pm

(पुनः प्रकाशित आपके अपने YouTube चैनल Kavi Vikrant Rajliwal पर आज के Live वीडियो प्रसारण के वीडियो लिंक के साथ।
अगर आपको मेरी Live विडियो पसन्द आए तो कृप्या चेनल को Subscribe अवश्य कर दीजिएगा।)

My YouTube Channel Kavi Vikrant Rajliwal’s Live video link in below.

👉 https://youtu.be/LP7pi8i_GAc 🙏💖💖👍👍

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