नही मालूम ये हाल ए दीवाना सा क्यों अपना अब हमें, हर लम्हा जिंदगी में खुद से जो तड़पाए जाता है।

चले थे जिस राह पर नाम ए ख़ुदाई से कभी, साया ही अपना अब हमे अंजाम ए हक़ीक़त उस राह से जो डराए जाता है।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
25/01/2019 at 11:40 am

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