Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Feb 8, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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🎻दर्द ए महोबत।

होती है मुलाकातें जब भी उनसे, हालात ए रुसवाई कहर बरसाते है।
करती है गुफ़्तगू ख़ामोश निगाहे, ज़ख्म दिल पर सरेराह लग जाते है।।

हर अदा है क़ातिल उनकी, क़ातिलाना है हुस्न ए शबाब उनका,
क़त्ल ए दीवाना हर अदा से अपनी, दीवाने का अपने, बेदर्दी जो खमोशी से कर जाते है।

तड़प है महोबत उनकी, तड़प ए महोबत से तड़पता दीवाना,
दीदार ए हुस्न से जख़्मी दिल, दिल के हर ज़ख्मो पर मरहम, दे कर ज़ख्मो पर एक ज़ख्म एक नया जो मुस्कुरा कर चले जाते है।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

8/02/2019 at 20:00 pm

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