Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Feb 14, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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अधूरा एहसास

जिस्म से रूह का रिश्ता है हमारी शायरी।

एहसासों की एक ईमानदारी है हमारी शायरी।।

हर एहसास मिलते है रूह से जब, होती है मुक़म्मल तब हमारी शायरी।

हर दर्द को सकूं, ज़ख्मो को मरहम, होती है एक एहसास हमारी शायरी।।

ये माना हमने के क़ातिल ये जहां है सारा, क़त्ल हर एहसासों का हर लम्हा है जो हमारे।

हर एहसास भी तो दर्द ए सितम से वहशी है आजकल, झलकती वहशत हर एहसासों से है जो हमारे।।

हर दर्द, हर सितम, हर आँसू है एक दास्तान अधूरी जो मेरी।

हर ख़्वाहिश अधूरी, हर एहसास अधूरा, हर लम्हा है ये जिंदगी अधूरी जो मेरी।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

14/02/2019 at 13:40 pm

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