Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Feb 14, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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दर्द ए एहसास।

रोशन हर चिरागों से कह दे कोई जा कर के, रोशनी न करें आज ये दिल कुछ उदास है मेरा।

बहती हुई हवाओ ए सुनी मेरी फिज़ाओ, सुन सको तो सुन लेना एक आह,
टूटे अरमानों से कभी निकलती थी जो मेरे।।

जख़्मी हर एहसासों से आरज़ू कब की मर चुकी है ज़िंदगी,
हर सांस अब हम यू ही उठाए जाते है जो।

हर साथ छोड़ते साए ने सिखलाए है सबक ज़िंदगी के हमे,
हर सबक से जिंदगी के हर सबक भूलते गए है जो।।

दस्तूर ए दुनियां ने जो भी फैसला सुनाया हर हालत ए जिंदगानी जो हमें,
सर झुकाए कभी तो सर उठाए हमने, हर दर्द को हदर्द अपना माना है जो।।।

ए वख्त आज भी देखता है वख्त किस की राह मेरा, हर राह अब भी पता जो गुमनामी हमे बताती है अपना।

बहता है लहू आज भी क़लम ए श्याही से, हर एहसास खून उगलते है जो,
हर उदासी कर न दे बेजान रोशन चिरागों को कहि, डरता है आज भी दिल ये मेरा।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

14/02/2019 at 07:07 am

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