Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Feb 15, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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एक एहसास

रुकी हुई हवाओ से एहसास उठते किसी तूफान का है।

खामोश है जो ये आसमां जरूर आज कोई बहुत रोने वाला है।।

धड़कते धड़कते टूट ना जाए धड़कने, आज किसी अपने ने बहुत सताया है हमे।

बहते हुए आँसुओ से लिख दी है जो दास्तान हमने, आज हर उस दास्तां को खुद ही मिटाना है हमने।।

दर्द जिंदगी में कोई नया तो नही मेरे, हर दर्द खुद दर्द से ही छुपाया है जो हमने।

नही चाहत कोई भी मुकम्मल हो पाई मेरी, हर चाहत ख़ुद ही खुद से भुलाती गई है जो हमें।।

हर हालत एक सबक जिंदगी के बन गए है जो मेरे।

हर सबक से जान जिंदगी की निकलने लगी है अब मेरे।।

सवाल कई अधूरे है अब भी बाकी जो जिंदगी में मेरे।

हर सवाल खुद जवाब है एक एहसास जो जिंदगी में मेरे।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

15/02/2019 at 17:25 pm

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