Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Feb 16, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

no comments

🕊 सपूत।

ग़मगीन इस रात्रि की क्या कभी कोई सहर हो भी पाएगी।

पूछता हूं मैं कि हो गया जिसका सपूत शहीद, कोई सहर उस माँ के भी आसुओ को कभी पोछ भी पाएगी।।

हमे सुलाने को एक चैन की नींद, सो गया है वो।

महफूज वतन को करने के लिए, शहीद हो गया है जो।।

हर सांस पर सांस का एक कर्ज है बेहिसाब एक उनका,
कर दिया निछावर हर एक सांस को जिसने वतन के वास्ते।

वो कोख़, वो माँ, है वो परिवार बहुत ही भाग्यशाली, खोया है सपूत जिन्होंने अपना अपने वतन के वास्ते।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

16/02/2019 at 07:30 am

Leave a Reply

Required fields are marked *.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: