Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

February 23, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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🕯

1548469119651अक्सर कुछ व्यक्तियों से सुनता था कि सोशल मिडिया पर या सोशल मीडिया का प्रयोग करने वाले व्यक्ति भृम में रहते है या कल्पनाओं में जीवन व्यतीत करते है।

परन्तु सत्य तो यह है कि वर्ष 2016 सितम्बर से सोशल मीडिया से प्रथम बार जोड़ने के उपरांत मेरे अपने जीवन के प्रति कई भृम स्वम् ही टूट कर चकनाचूर हो गए है।

💔
समझते थे हदर्द दर्द ए गम जिंदगी का जिन्हें हम अक्सर।

कर दिए चकनाचूर आईने एतबार के एतबार से उन्ही ने अक्सर।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित

23/02/2019 at 04:42 am

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