Author, Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

March 2, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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🎭 जीवन की सच्चाई एक कोशिश।

आज के इस स्वार्थी संसार मे दिन प्रतिदिन और भी अधिक भृष्ट होती हमारी व्यवस्था एव निष्ठुर होते जा रहे समाज में अधिकतर मनुष्य या व्यक्ति भर्ष्टाचार एव जटिल विपरीत परिस्थितियों के समक्ष अपने घुटने टेकने पर विवश हो जाते है।

परन्तु फिर भी जो मनुष्य या व्यक्ति निरन्तर अपने जीवन की जटिल परिस्थितियों से संघर्षमय होते हुए भी अभी तक अपने जीवन लक्ष्य (लक्ष्य प्राप्ति सफलता) को प्राप्त नही कर सके या जिन्हें अभी तक अपने लक्ष्य प्राप्ति की सफलता प्राप्त नही हो सकी है मगर फिर भी उन्होंने अभी तक अपना जीवन लक्ष्य प्राप्ति के संघर्ष का त्याग न करते हुए अपने व्यक्तित्व को संजोए हुए है। मेरी नज़रो में वे महान व्यक्ति अत्यधिक ही मजबूत व्यक्त्वि के स्वामी होते है।

क्यों कि इस निष्ठुर समाज एव भृष्ट होती व्यवस्था में अधिकतर व्यक्ति अपने जीवन लक्ष्य की प्राप्ति से उतपन सफलता को प्राप्त करने के उपरांत या निरन्तर जीवन जटिल परिस्थितियों से संघर्षमय होते हुए अन्तः सफलता या जीवन लक्ष्य की प्राप्ति के बिना अपनी असफलता को स्वीकार करते हुए अपने उस व्यक्तित्व का गला अपने ही हाथों से घोट देते है। जो जीवन जटिल परिस्थितियों में संघर्षमय होते हुए भी दृढ़ता के साथ टिका रहा था।

परन्तु जो व्यक्ति अपने जीवन लक्ष्य की सफलतापूर्वक प्राप्ति के उपरांत अपनी उस उज्ज्वल छवि या उस मजबूत व्यक्तित्व का विस्मरण करने के बजाए अपनी उस दिव्य उज्ज्वल मजबूत छवि या व्यक्तित्व को और भी अधिक मजबूत करते है। ऐसे व्यक्ति एक दिन उन चंद महान व्यक्तित्व के व्यक्तियों की श्रेणी में आ जाते है जिनके जीवन की गाथा हर कोई जानना चाहता है। और ऐसे दिव्य उज्ज्वल व्यतित्व के व्यक्ति एक नया इतिहास रच देते है।

ऐसे उज्ज्वल व्यक्त्वि के व्यक्ति हमेशा से ही कमजोरो और बेबसों के लिए एक मिसाल बन जाते है। एव हर किसी के जीवन मे एक जीवनदायक प्रेरणा का कार्य करते है।

यह भी एक सत्य है कि जिन मनुष्यो में ठोकर लग कर नीचे गिर जाने के उपरांत पुनः उठकर खड़े होने की क्षमता ना हो या वह अपने जीवन की जटील परिस्थितियों से सँघर्ष ना कर सके तो ऐसे मनुष्य निरन्तर ही धूल ही चाटते रहेंगे!

परन्तु जो व्यक्ति निरन्तर जीवन जटिल विपरीत परिस्थितियों की ठोकर पर ठोकर सहने के उपरान्त भी पुनः उठते रहेंगे या उन जीवन जटिल संघर्षमय परिस्थितियों में भी टिके रहने की एक कोशिश निरन्तर करते है। वो एक दिन स्वम् को इतना अधिक मजबूत और साहसी स्थिति में पाते है कि स्वम् किसी कमजोर और असहाय मनुष्य को अपना मजबूत सहारा प्रदान करने का सामर्थ्य उन में सहज ही उतपन हो जाता है।

ऐसे ही चन्द उज्ज्वल एव मजबूत व्यक्त्वि के व्यक्तियों के कारण इस निष्ठुर संसार मे हमेशा से ही कमज़ोर एव असहाय व्यक्ति स्वम् को भरे संसार मे अकेला और अनाथ महसूस नही करते है।Logopit_1551543029717 जैसे महात्मा गांधी जी, स्वामी विवेकानंद जी ऒर अधिकतर जितने भी महानुभव इस धरा पर अवतरित हुए है। वह ऐसी ही चन्द उज्जवल मिसाले है जो आज भी हम सभी के जीवन मे एक दिव्य प्रेरणा एव ऊर्जा का संचार कर रही है।

यहाँ अगर मैं अपने बारे में कुछ वार्तालाप करू तो मै इतना ही कहना चाहूंगा कि… अगर हम दौड़ नही सकते तो रेंग तो सकते है। अगर हम रेंग भी नही सकते तो कम से कम लुढ़कने का एक प्रयास एक कोशिश तो कर ही सकते है। क्योंकि दोस्तों कोशिश करने वाले ही परिणाम तक पहुचते है। जो व्यक्ति कभी भी जीवन जटिल परिस्थितियों के विपरीत अपनी कोई भी एक सकारात्मक कोशिश ही नही करते। ऐसे व्यक्ति अपना एव अन्य जनो का अनमोल समय नष्ट करते हुए या नष्ट कर के अंततः इस निष्ठुर संसार से चले जाते है।

इसीलिए मेरे मित्रों हमेशा ही उगते हुए सूर्य के समान अपने व्यक्तित्व को उज्जवल बनाओ ना कि ढलते हुए सूर्य के समान। इसके साथ ही अपने व्यक्त्वि को इस प्रकार से निखार दो की आपके व्यक्त्वि की दिव्य आभा से केवल आपके ही घर आंगन में नही अपितु सम्पूर्ण संसार मे एक दिव्य प्रकाश फैल कर बिखर जाए। क्योंकि इस संसार मे हमेशा से ही उगते हुए सूर्य को ही पूजा जाता है ना कि ढ़लते हुए सूर्य को!

अपने लिए तो सभी जीवन जीते है। परन्तु जीवन की वास्तविकता या सच्चाई तो अपने निजी स्वार्थ से विपरीत अन्य जनों की भलाई के लिए अपना जीवन व्यतीत करने में एव अपने जीवन लक्ष्य को विस्मृत कर चुके व्यक्तियों को उनके जीवन लक्ष्य का राह दिखाने में ही है। अपने घर आंगन के लिए तो हर कोई उजाला चाहता है परन्तु इसके विपरीत जिस दिन इस निष्ठुर संसार के व्यक्ति इस वास्तविकता को जान जाएंगे कि यह सम्पूर्ण संसार, यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड ही हम सब का अपना है। एव हमे इस सम्पूर्ण संसार को ही उज्ज्वल करने के लिए प्रयत्नशील रहना होगा ना कि केवल और केवल अपने घर आंगन को ही प्रकाशमय करने के लिए। उसी दिन ये संसार वास्तविक अर्थो में एक उगते हुए सूर्य के समान उज्जवल हो कर निखर जाएगा।

इसीलिए सर्वप्रथम प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य बनता है कि वह सर्वप्रथम स्वम् के लिए साहस दिखलाए। एव हर जीवन जटिल परिस्थितियों में भी दृढ़ता के साथ अडिग रहने का प्रयत्न करें। क्योंकि अगर आप स्वम् के लिए साहस नही दिखा सके या जीवन जटिल परिस्थितियों से संघर्ष नही कर सके तो अन्य असहाय जनो के जीवन मे कोई भी एक सकारात्मक परिवर्तन हेतु उनकी सहायता के लिए साहस कहा से ला पाओगें?

अगर आप स्वम् के लिए जीवन जटिल परिस्थितियों में संघर्ष करने की उन विकट परिस्थितियों में टिके रहने का साहस दिखा सके तो सत्य है एक दिन आपके व्यक्त्वि में वो एक सच्चा सामर्थ स्वम् ही उतपन हो जाएगा जिसके प्रभाव से अनन्त असहाय, बेबसों एव कमजोर व्यक्तियों के अंधकारमय एव ऊर्जा रहित जीवन मे अपने जीवन को जीने की एक आशा के स्वरूप एक अलौकिक दिव्य ऊर्जा का संचार सहज ही उत्पन्न हो जाएगा। क्योंकि असहायों एव अनाथों के ऊर्जाहीन जीवन को जीवन ऊर्जा प्रदान कर उन्हें शसक्त बनाने वाला व्यक्ति ही एक वास्तविक एव अनन्त आत्मशांति को प्राप्त कर सकता है।

समाप्त।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
2/03/2019 at 10:00 pm
(पुनः प्रकाशित कुछ अति लघु वाक्य संशोधन या सुधारूपरांत)

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