Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

March 6, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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🕳️ सत्य, संघर्ष एव परिवर्तन।

FB_IMG_1534055626257देश ( भारतवर्ष ) का मूड आजकल पूर्णतः चुनावी हो गया है क्या? कभी धर्म के नाम पर राजनीति तो कभी फ़ौज के नाम पर सियासत आजकल यही सबसे महत्वपूर्ण एक चुनावी मुद्दा उभरा कर सामने आया है!

ऐसा होना भी चाहिए परन्तु यह भी ध्यान रहे कि 2019 के चुनाव केवल और केवल इन्ही चुनावी मुद्दों पर केंद्रित हो कर ना रह जाए और शिक्षित बेरोजगार जो कि हर सभ्य समाज की नीवं एव सबसे अहम मुद्दा होता है कहि राजनीतिक दलों के आपसी स्वार्थों की वजह से कहि किसी अंधकार में ही विलुप्त ना हो जाए?

कोई कुछ भी कहे कि हमने यह कर दिया हमने वह कर दिया परन्तु जब तक देश के शिक्षत युवा का भविष्य अंधकार में रहेगा तब तक हम चाहे कितना ही विकास क्यों न कर ले परन्तु एक दिन सब कुछ धरा का धरा ही रह जाएगा क्योंकि जब देश के शिक्षित युवा ही अपना भविष्य इस देश मे सुरक्षित महसूस नही कर पाएंगे और स्वम् को केवल बेरोजगारी का ग्राफ बढ़ाने का एक ग्राफ ही समझने की भूल करते रहेंगे तो आने वाली पीढ़ियों को क्या संदेश जाएगा कि आज भारतवर्ष में शिक्षा का अर्थ केवल और केवल बेरोजगारी ही बन कर रह गया है?

इसका कारण चाहे भृष्ट होती व्यवस्था हो, या प्रतिवर्ष देश (भारतवर्ष ) की प्रतिष्ठित संस्थाओ का नाम प्रतियोगिता परीक्षा में लिप्त भर्ष्टाचार से जुड़कर सामने आते हुए देश के शिक्षित युवाओं के मन मे अपने भविष्य को लेकर एक भय का भाव सहजता से उत्पन्न करता है। देश की सरकार को यह समझना चाहिए कि हर विद्यार्थी केवल और केवल इंजीनियरिंग या व्यपारी ही नही होता। वह सामान्य शिक्षित ग्रेजुएट भी होता है। यह और बात है कि इस देश मे इंजीनियरिंग या व्यपार के विद्यार्थियों का ही भविष्य कितना सुरक्षित है या उनके विकास का वास्तविक रेशो क्या है?

अंत मे मैं आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल देश की सरकारों एव विपक्षी राजनीतिक दलों से केवल ओर केवल इतना ही कहना चाहूंगा कि 2019 के चुनाव से इस देश ( भारतवर्ष ) की जनता को एक बार पुनः एक महत्वपूर्ण सकारात्मक राजनीतिक परिवर्तन की एक आशा है। जिसमे केवल कुछ व्यपारियों, या चुनिंदा छात्रों एव भृष्ट संस्थायों का ही केवल और केवल विकास सुनिचित ना हो। अपितु देश के हर एक सामान्य जन एव सामान्य ग्रेजुएट के विद्यर्थियों को भी एक उचित रोजगार के जरिए अपने जीवन एव अपनी शिक्षा पर गर्व करने का एक सुहनरा अवसर प्राप्त हो सके।

मैं आपसे पूछता हूं कि आखिर वह चुनाव कब आएगा? जिसके नतीजे के उपरांत देश का भविष्य शिक्षित युवा स्वम् को भृष्ट संस्थाओं के द्वारा ठगा हुआ महसूस ना करते हुए
एक गर्व के साथ स्वम् को शिक्षित महसूस कर सकेगा?

आप सोच रहा होंगे कि यह सब कुछ मैं केवल और केवल न्यूज़ चैनलों पर डिबेट देख कर लिख रहा हु तो यहाँ मैं आपसे इतना ही कहना चाहूंगा कि यह सब कुछ ना तो मै किसी पर कोई आरोप लगाने की दृष्टि से लिख रहा हु और ना ही किसी न्यूज़ चैनलों पर डिबेट देख कर लिख रहा हु। अपितु मित्रों मैं इस असहनीय दर्द का स्वम् एक भुगतभोगी भारतीय एव विद्यार्थी हु। जैसा कि आप सभी प्रियजनों में से मुझ को भलीप्रकार से जानने वाले आप मे से अधिकतर प्रिय पाठक एव प्रियजनों को यह अच्छे से ज्ञात होगा कि किस प्रकार से मैने 2003 में अल्पायु में नशे एव ड्रग्स के विरुद्ध एक सकारात्मक पहल करि एव कई मासूम व्यक्तियो को स्वमसेवी संस्थाओ के ज़रिए ड्रग्स के नशे से मुक्ति में अपना तुच्छ सा सहयोग प्रदान किया एव करता आ रहा हु। अपने इस सेवाभाव के कार्य को जारी रखते हुए विवाह उपरांत मेने सभी परिजनों के विचारों के विपरीत जाकर वर्ष 2008 से शिक्षा प्रारम्भ करि एव 2009 में 12वी एव 2013 में दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन पूर्ण करि। अवसर की कमी के बाबजूद प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करि एव 2014 में एक स्नातक स्तरीय 4 स्तर के परीक्षा का प्रथम दो स्तरीय लिखित परिक्षा पूर्ण करते हुए 3 लाख से अधिक विद्यार्थियों में से उतरीं प्रथम 2 हज़ार विद्यार्थियों में स्थान भी प्राप्त किया। परन्तु फिर क्या?

अगले स्तर की परीक्षा में मुझ को एव अन्य 1750 विद्यार्थियों अनुत्तीर्ण कर दिया गया? जिसका कारण कुछ समयुपरांत समाचार पत्रों एव देश के प्रत्येक न्यूज़ चैनलों में बताया गया केवल और केवल भर्ष्टाचार। कैसे देश की प्रतिष्ठित संस्थाए अपने निजी स्वार्थ की वजह से मेरे जैसे उन विद्यार्थियों का भविष्य एक ही झटके में बर्बाद कर सकती है जिन्हें अपने जीवन में ना जाने कितने स्तरों पर जीवन की जटिल परिस्थितियों से प्रतिदिन ही युद्ध लड़ना पड़ता है। एव एक एक पड़ाव को सफलतापूर्वक उतरीं करते हुए यहाँ तक पहुचे है अगर मैं अपने विषय में बात करू तो यह सब कुछ कभी भी इतना सामान्य नही रहा मित्रों, ना तो तब था और ना ही अब है जितना कि अधिकतर व्यक्तियो को प्रतीत हो सकता है। चाहे वह अल्पायु 17 वर्ष की आयु में 2003 में ड्रग्स से युद्ध लड़ना हो या उस अल्पायु में इस संसार का सामना करना हो या इस संसार का सामना करते हुए शिक्षा के एक अवसर को तलाशना हो या उस अवसर कि प्राप्ति के उपरांत अवसरों की कमी के विपरीत अपनी शिक्षा को जारी रखते हुए 10वी से ग्रेजुएट होना हो या कठिन परिश्रम के उपरांत स्नातक स्तरीय लिखित परीक्षा को उतरीं करने के उपरांत अन्य स्तर पर भर्ष्टाचार से आहत होते हुए उस जटिल समय के दौरान किसी प्रकार से स्वम् को संभालते हुए साहित्य से जुड़ना हो या बिना किसी पर उंगली उठाए अपनी रचनाओ के द्वारा सम्पूर्ण संसार को जागरूक करने का एक प्रयास करना हो जिसमे मुख्यतः उन व्यक्तियों एव पाठकों को जिन्हें स्वम् अपने जीवन मे कई स्तरों पर अपने जीवन की जटिल परिस्थितियों से युद्व लड़ना पड़ता है या… या ऐसे ना जाने कितने या को स्वम् में स्वम् के व्यक्त्वि में किसी प्रकार से संयोए रखना ही क्यों न हो।

मैं यह नही कहता कि यह सब कुछ झेल कर या सहते हुए मैंने कोई बहुत ही महान या अनोखा कार्य कर दिया या फिर कोई नवीन सिद्धान्त इस सम्पूर्ण संसार के समक्ष प्रस्तुत किया है मित्रों ऐसा कदापि भी नही है। अगर आपने मेरी एक काव्य नज़्म रचना एक खेल जिंदगी का पाठन किया है तो शायद आप मेरे इस भाव को कुछ उचित प्रकार से समझ सकते है अंत मे आपसे विदा लेते हुए मैं आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल एक बार पुनः अपनी उस काव्य नज़्म रचना का youtube वीडियो लिंक अंकित कर रहा हु। जिसको आप स्वम् मेरे स्वरों के साथ सुन कर महसूस करते हुए आप कुछ और भली प्रकार से मेरे जीवन संघर्ष एव जीवन जटिल परिस्थितियों को समझ सके।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

06/03/2019 at11:35am

मेरे एक दर्दभरी काव्य नज़्म रचना एक खेल जिंदगी का youtube वीडियो लिंक नीचे अंकित है।

👉 https://youtu.be/02TpemeSFsA 🕊️

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