Author, Writer, Poet, Drama and Story Writer Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

March 10, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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एहसास।

आप हार गए जंग ज़िन्दगी की अपने भूल से भी अगर तो हर बार कसूर आपका इसमें होगा साबित, कर दर किनार हर बेबसियों को आपकी ज़नाब।

फ़क़त जीत गए जंग जिंदगी की हारी हुई जो आप अपने बहा कर लहू की बूंद आखरी भी अपने, तो होगा साथ ये सारा संसार खड़ा आपके, श्रेय जीत का आपकी करने को साबित नाम अपने ज़नाब।।

जीते है ज़िन्दगी साथ जिंदगी के हम हर लम्हा ज़िन्दगी की हर जीती बाजी को हारे अपनी ज़नाब।

यक़ीन है यक़ीन पर मरते हुए यकीन का हर लम्हा जो साथ यकीन अपने मरते हुए ज़नाब।।

खो गए है एहसास एहसासों के अपने कहि, दम तोड़ते हर एहसासों के जिंदा हर एहसास।

दब गए है एहसास एहसासों से अपने कहि, घुटन एहसासों के साथ कायम जितने भी जो एहसास।।

वो एक रोशनी जो भृमित कर देती है हर बार, घायल एहसासों के सलामत है उससे मेरे हर एहसास।

फ़क़त आरज़ू इतनी सी है फिर भी मेरी, न देखु उसे सलामत है जिससे मेरे घायल हर एहसास।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
10/03/2019 at 3:18 pm

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