Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

Poetry, Kavya, Shayari, Sings, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

March 10, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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ज़िंदगी।

कुछ लिख कर एहसासों को मिटा देना अश्को से कितना सरल हो गया है आजकल अपने।

फ़क़त आज भी उतना ही पहुचाता है दर्द, हर लिखे हुए को खुद ही खुद से मिटा जाना खुद के।।

हमने जब चली कोई चाल सीधे सीधी, एक आवाज़ ने हर बार बुलंद हो कर के मचाया है शोर हर ओर कि यह चाल इसकी इसके औकाद से बाहर की है।

दस्तूर ए दुनियां ने हर मोड़ पर जिंदगी के जिंदगी को जिंदगी से हर बार मिलाया है, हर मोड़ पर हमे जिंदगी लहूलुहान सी मिली है।।

इम्तेहां ज़िन्दगी के ख़त्म करते करते हुआ एहसास एक रोज़ के खत्म न कर सके हम इम्तेहां जिंदगी के एक भी अपने।

फ़क़त हो गए खुद ही खुद से खत्म हम, हर एहसासों से अपने ख़ामोश हर इम्तेहां जिंदगी के ख़त्म करते करते।।

कहि कोई मर गया है अपना, रुकती सांसो से एक एहसास होता है आजकल मुझ को हमेशा तन्हाई में, हर लम्हा ही किसी तन्हाई में जीते है मरते हुए जो हम।

आसमां का रंग बदल जाएगा एक रोज़ यू ही आचानक से ज़िंदगी, दर्द एहसासों से जिंदगी का हर एहसास हो कर के खत्म, बदल जाएंगे हर एहसास जिंदगी से जब हम।।

आह! आह जिंदगी की अब कोई भी निकलने न पाए।
फ़क़त जान जिंदगी की बेशक से सरेराह अब निकल जाए।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
10/03/2019 at 12:55 pm

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