Author, Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

March 11, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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💃 सितमगर हसीना। With Today’s Live Performance Video Link from My YouTube channel.

अक्सर सितमगर एक हसीना का दीदार किया करता हूँ।

आती है पर जब वो सामने तो मुह फेर लिया करता हूँ।।

देखना तो चाहता हूँ उसको मैं जी भर, मगर न जाने उसके हाव भाव से क्यों डर जाता हूँ।।।

उस सितमगर हसीना की शख्सियत भी कमाल लगती है।

चेहरे पर उसके हमेशा आग ग़ुस्से की दिखती है।।

न जानें चमक से उस आग की क्यों ठिठर जाता हूँ।

ख्यालो में मगर, हाल ए दिल उससे, अक्सर बतियाता हूँ।।

उस समय मुझ में भी कुछ हिम्मत जाग जाती है।

सुनाने को हाल ए दिल, तबियत मेरी भी मचल जाती है।।

फिर देख के हाव-भाव वो चहरे के उसके, दम तोड़ महोबत मेरी जाती है।।।

उसकी उस आग से चेहरे कि ए दिल क्यों जल जाता हूँ।

करता हूँ महोबत, बेहिंतिया जब उससे, हाल ए दिल ये उससे अपना, क्यों कह नही पाता हूँ।।

चाल हर बार क्या जहरीली सी कोई, चल जाती है वो।

मिलती है अक्सर तन्हाई में तो घण्टों मुझ से बतियाती हैं वो।।

आती है ए वक़्त पर सामने जब वो सब के तो मुझको भूल जाती हैं।

जख्मी ये दिल इस तरह सरेराह वो मेरा कर जाती है।।

दिखा के चहरे की आग वो अपने, इस दिल पर जख्म

दे जाती है, इस दिल पर जख्म दे जाती है… इस दिल पर जख्म दे जाती है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

पुनः प्रकाशित With Today’s Live Performance Video Link from My YouTube channel in below.

👉 आज की मेरी Live परफॉर्मेंस video

🙏 Watch “सितमगर हसीना। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एव Liveप्रसारित” on YouTube https://youtu.be/YEzhQ7MN6MM 💖💖

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