Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

March 13, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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🌹 दास्तां। (दर्दभरी महोबत की अति विस्तृत दस्ताने)

Logopit_1552445056339नमस्कार मित्रों, जल्द ही मैं आपका अपना रचनाकार एव कवि-शायर मित्र विक्रांत राजलीवाल अपनी आजतक की सबसे बहेत्रिन नज़्म दस्ताने। या इसे आप कुछ इस तरह से भी कह सकते है कि मेरे साधारण से जीवन की मेरी आजतक की नज़्म शायरियों में से यह दस्ताने मैने सबसे पहले लिखी थी। अन्य नज़्म शायरी मेने सोशल मीडिया से जुड़ जाने के उपरांत लिखी।

एव अपनी इन अप्रकाशित दर्दभरी नज़्म शायरी के रूप मैं महोबत की दर्द भरी दस्तानों को मैं एक पुस्तक के रूप में आप सभी प्रियजनों तक पहुचाना चाहता था। एव मुझको मौका भी मिला था परन्तु उस समय अपने समाज के प्रति अपने नैतिक जिमेवारी का ध्यान में रखते हुए मैने अपनी उन काव्य नज़्मों को प्रकाशित करवाना अधिक उचित समझा जिससे इस कठोर होते समाज को एक सकारात्मक संदेश पहुच सके। एव मेने 2016 में अपनी उन रचनाओ के साथ अपनी पुस्तक एहसास का संयोग परकशन घर शहादरा द्वारा प्रकाशन करवा दिया। उस समय मेरे पिताजी के 25 से 30 हजार रुपये उस प्रकाशन में खर्च हो गए थे एव मुझ को 250 से 300 प्रतियां प्राप्त हुई थी जिन्हें मेने अपने सभ्य समाज के व्यक्तियों में निःशुल्क वितरित कर दिया।

एव एक उचित समय के इंतज़ार में अपनी इन दर्दभरी महोबत की दस्तानों के साथ उनके प्रकाशन का एक इंतज़ार करने लगा। इसी दौरान मै सोशल मीडिया से भी जुड़ा एव यहाँ मैने बीते 2 वर्षो के दौरान सैकड़ो छोटी बड़ी नज़्म काव्य कविताए, शायरी एव कुछ गीत व्यंग्य किस्से एव विचारो के साथ बहुत से लघु एव विस्तृत समाजिक, आध्यात्मिक एव मनोवैज्ञानिक लेख भी लिखे एव प्रकाशित करें।

परन्तु आज जनवरी 2016 के उपरांत मार्च 2019 के दिन मेने यह निर्णय लिया है कि अब मैं और अधिक आप सभी नज़्म शायरी के प्रेमियों को मेरे द्वारा लिखित उन दर्दभरी महोबत की नज़्म दस्तानों पर जिन जो पढ़ने एव सुनने का सबसे अधिक अधिकार सिर्फ और सिर्फ आपका ही है को और अधिक दूर नही रख सकता एव ना ही मुझ में और अधिक इंतज़ार करने का कोई सामर्थ शेष बच सका है। मेरे इस निर्णय का एक और सर्वधिक महत्वपूर्ण कारण यह है कि मैं नही चाहता कि मेरे जीवन की यह प्रथम नज़्म दस्ताने बिना प्रकाशन के किसी उचित समय के इंतजार में समय की किसी परत में कही गुम हो कर रह जाए। क्योंकि मैं जानता हूं कि मैं चाहकर भी इन्हें फिर से नही लिख सकूँगा।

आज मुझ को यह स्वीकार करते हुए किंचित मात्र भी कोई शर्म या झिझक महसूस नही है कि आज मेरे पास इतने रुपए भी नही है कि मैं अपनी इन नज़्म दास्तानों को एक पुस्तक का स्वरूप प्रदान कर आप सभी प्रियजनों तक पहुचा सकू। हालाँकि मेरे परिवार में ऐसे बहुत से सदस्य है जिन्होंने बीते कुछ समय के दौरान ना जाने कितनी बार मुझसे कहा कि प्रकाशन हम करवा देते है। कहि आपकी नज़्म डम्प हो कर ही ना रह जाए। परन्तु आज भी मेरा आत्मस्वाभिमान मुझको इस बात के लिए इज़ाज़त नही देता।

इसीलिए अब मैं और अधिक इंतज़ार ना करते हुए अपनी इन दर्दभरी महोबत की दस्तानों के नष्ट हो जाने से पूर्व हि मैं अपनी इन अति विस्तृत दर्दभरी महोबत की दस्तानों को जल्द से जल्द आप सभी नज़्म शायरी के प्रेमी पाठको एव श्रुताओं तक अवश्य पहुँचा दूँगा। एव यकीन मानिएगा मेरे द्वारा लिखित या आप यू कह सकते है कि किसी एक अनोखी शक्ति ने यह दस्ताने मेरे से लिखा दी बस। यह नज़्म दस्ताने वह दस्ताने है जो यकीनन आपका धड़कता दिल आपकी हर एक धड़कती धड़कनो से यकीनन चिर कर रख देगी। एव आपकी हर एक धड़कन से केवल एक स्वर गुनगा की आह! आह बस अब और नही।

अंत में मैं केवल इतना ही कहना चाहूंगा कि जल्द ही आप सभी प्रियजनों के साथ मेरा भी यह एक अत्यंत विस्तृत दर्दभरा लम्बा इंतज़ार अब समाप्त हो जाएगा।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
13/03/2019 at 9:05 am

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