Author, Writer, Poet, Drama and Story Writer Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

March 14, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

no comments

एहसास…

किसी ने मुझ से पूछा कि आप क्या करते है? क्या जवाब देता इसके सिवाय के ज़नाब देख लीजिए हम अपने हर हरे जख्मों को कुरेद कर और भी हरा कर देते है। दर्द जब हद से गुज़र जाता है तो हम अपने हर हरे जख्मों को दे कर के एक और ज़ख्म खुद ही उसको सी लेते है जी हाँ जनाब आप ने सही समझा कि अक्सर हम दर्द ए एहसासों से होकर के फ़ना अपने हम एहसासों को लिख लेते है।

दग़ा, ऐतबार, और फिर से दग़ा दस्तूर ए दुनिया के है सदियोँ से भी पुराने। हमने भी सीखा है यही एक हुनर अपनो से खाकर के दग़ा ऐतबार से अपने फिर से दग़ा हर बार यक़ीनन। ना आ सका हमे फिर भी ये हुनर के दे दे जो खुद अपनो को दग़ा, एतबार से उनके दग़ा हम उनको।

🕊️…🌹

ज़िंदगी की चाह नही, मौत की ख़्वाहिश नही रखते है हम।

हर दग़ा ज़िंदगी को अपनी अब अपनी ज़िंदगी समझते है हम।।

ज़िंदगी इस कदर से लहूलुहान है मेरी, हर जख्मों पर लगे मरहम तो जान मेरी निकलती है।

सकूँ सांसो से इस कदर खफ़ा है मेरे, हर सकूँ से सांसे मेरी उखड़ने लगती है।।

कोई तम्मना बाकी रही नही, यक़ीन हर यक़ीन से आज तक है खफ़ा अपने।

हालात हर हालातों से आज तक है रुसवा, हर हालात एक सितम है हर हालातो पर अपने।।

हर साया ज़िंदगी का ज़िंदगी से दूर क्यों है मेरा, हर साए को खुद से खुद ही अपने मरते देखा है हमने।

सफर ज़िंदगी का तन्हा है आज भी मेरा, साथ सफर में ज़िंदगी के अपनों का एकदम से छूटते देखा है हमने, एकदम से छूटते देखा है हमने…एक दम से छूटते देखा है हमने।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
14/03/2019 at 6:15 pm

Leave a Reply

Required fields are marked *.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: