Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

Poetry, Kavya, Shayari, Sings, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

March 15, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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🌠 एहसास

रगों में बहता लहू रवानगी पर है अपनी, ऐसा लगता है
ज़िन्दगी कि हर रवानगी एकदम से अब रुक जाएगी।

बदलते बदलते खुद को बदल गए हर एहसास, बदलते हर एहसासों से बदलते गए हर एहसास।

मौसम हो गए वीरान जो इंतजार में बहार के, अब और भी वीरान से नज़र आते है वो।

क़त्ल क़ातिल का बेबर्दी से कर के कातिल हमारे, रोते हैं बेहिंतिया, अक्सर तन्हाइयों में याद आ जाते है उन्हें हम जो।।

रुस्वा कर के हमे रुस्वा कर दिया खुद को उन्होंने, के हर लम्हा रुसवाई से जीते जा रहे है हम जो।।।

ख़ामोश है जलती चिता से जलते हर एहसास, जलते हर एहसासों से ख़ामोश है जलते हर ख़्वाब।

जिंदा है जिस्म ये रूह मेरी हर सांस, हर सांस से धड़कती है ज़िन्दगी, धड़कते है हर एहसास।।

रुके हर लम्हों से रुक गए है जो अल्फ़ाज़, हर रुके लम्हो से जिंदा है ज़िन्दगी, जिंदा है हर एहसास।।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
15/03/2019 at 12:00am

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