Author, Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

March 15, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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🌹 एक ख़्वाब।

कभी कभी कुछ कहते कहते कुछ भी ना कह पाना।

ह्रदय एहसासों के एहसासों से किसी अजनबी को अपने बेहद करीब पाना।।

उसकी हर खुशी से दर्द जिंदगी के अपने भूल जाना।

रातो को उठ उठ कर के उसका नाम दिल की हर धड़कन पर धड़कनो से अपने लिखते जाना।।
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अश्क़ बहाते कभी तो कभी अश्को को अपने छुपाए जाना।

एक मिलन उससे एक दीदार उसका, याद हर लम्हा उसको करते हुए, गुजरते हर लम्हे से खुद ही तड़पते जाना।।

हर हक़ीक़त को नकारते हुए ह्रदय एहसासों से उसको बेहिंतिया चाहते जाना।

अपना मान उसको, उसकी महोबत से खुद ही खुद को बहला जाना।।,

उसके हर दुख से होकर के दुखी, उसकी हर खुशी के लिए जिंदगी को अपनी जीते जाना।

वो एक ख़्वाब है तो ख़्वाब ही सही, जो है हक़ीक़त तो उसको एक हक़ीक़त ही बना जाना।

महोबत से उसकी होकर के फ़ना, उसको हमेशा अपना माना, कर के हर हकीकत को नज़रअंदाज़, हर हक़ीक़त को नकार जाना, कर के हर हकीकत को नज़र अंदाज़, हर हकीकत को नकार जाना…हर हक़ीक़त को नकार जाना।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
15/03/2019 at 9:40 pm

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