ना वो प्याला रहा सलामत, ना वो दौर ए दस्तूर ही रह पाया कायम, बदलते समय से बदल गए हर यार यहाँ।

देखें इस दुनियां में यार बहुत, ढूंढे ना ढूंढ़ पाए फिर भी यार शराबों सा हम यार यहाँ।।

हर घुट से उतरता ज़हर, घुट घुट से चढ़ता ज़हर, तासीर है तिलस्मी, जिसका हर तिलस्म लाजवाब।

महक से चढ़ती मदहोशी कोई ख़ुमारी सी सवार, स्वाद से है जिंदा जिसके मरते हर ख़्वाब।।

हर लम्हा एक सरूर, सरूर से कायम एक ख़ुमारी, हर ख़ुमारी बुलाती है करीब अपने, यारों में यार मेरा यार शराबों।

सरूर से मह के कायम है सरूर हर लम्हा जो महोबत, हर लम्हा पहुचाता है सकूँ तड़पती चाहतो को मेरे, मेरा यार शराबों।।

कभी टूटते तो कभी जुड़ते टार टूटे दिल के मेरे, हर बार जोड़ जाता है टूटे दिल के तार मेरे, मेरा यार शराबों।

उजाड़ गुलिस्तां, बंजर ख़्वाब, ज़िंदगी भी है मेरी बेज़ार, खिलते गुल, महकते ख़्वाब, बदल देता है जिंदगी हर घुट से अपनी मेरा यार शराबों।।

आबाद है वीराना ज़िन्दगी का जिससे, हर एहसास है जिससे मेरे रूहानी, रंगीन है कण कण जिसका हर बून्द एक पानी।

यारो में यार मेरा यार शराबों, रंगीन ख्वाबों का एक ख्वाब मेरा यार शराबों, टूटे एहसासों से मुर्दा ख्वाहिशों की जिंदा एक जिंदगानी।

हा बोतल में बंद है मेरा यार शराबों, तड़पता है एक मुलाक़ात को हर लम्हा, हर लम्हा करता है इंतज़ार शिदत से मेरा, मेरा यार शराबों।

हा कहते है मुझे शराबी, तलब है हर लम्हा ही मुझे शराब की, शराब से ही जिंदा है मेरी धड़कती ये जो जिंदगानी,

लिख दिया हर धड़कती धड़कनो पर नाम यारो का अपने, यारो में यार मेरा यार शराबों, यारो में यार मेरा यार शराबों…यार शराबों।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

15/03/2019 at12:37pm

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