Author, Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

March 16, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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💏 प्रेमी।

बग़ीचे गाना गाते है, फूल नाच दिखाते है।

रात चांदनी में हर प्रेमी एक दूजे से मिलना चाहते है।।

खुशबू प्रेम की पाकर के हर उदास ह्रदय भी झूम जाते है।

हर प्रेमी प्रेम भावनाओं से तृप्ति प्रेम की कर प्राप्त तृप्त हो जाते है।।

पवित्र भावनाओं से होकर के वशीभूत ह्रदय से ह्रदय, भाव से भाव हो कर के एक दूजे में सम्मिलित दोनों एक हो जाते है।

तन्हा तन्हा से लम्हें, विरह पीड़ा से भरपूर, पहलु में महबूब के खुद को तलाशते है, साए में एक दूजे के जब दोनों खो जाना चाहते है।।

बगीचे गाना गाते है, फूल नाच दिखाते है।

रात चांदनी में हर प्रेमी एक दूजे से मिलना चाहते हैं।।

उमंग ह्रदय से ज्वलित ज्वाला, आलिंगन एक प्रेम से भरा।

मिलन आत्मा का आत्मा से, संगम अलौकिक यह दिव्यता से भरा।।

बाली उम्र, कमसिन काया, अठखेलियां ये अल्हड़ता से भरी।

रस मधु सा अधरों पर अपने लिए, समीप प्रेम से प्यास प्रेम की व्याकुलता एक प्रेम से भरी।।

अगन ह्रदय वो मुस्काते पल, नयनो से नयन हर भाव ह्रदय प्रेम के खामोशी से जब प्रेमी बतियाते है

स्पर्श प्रेम का एहसास अलौकिक, स्पर्श ह्रदय हर प्रेम भाव का, स्पर्श एक दूजे से पा कर के दोनों एक हो जाते है।।

बग़ीचे गाना गाते है फूल नाच दिखाते है।

रात चाँदनी में हर प्रेमी एक दूजे से मिलना चाहते है।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

16/03/2019 at 2:00 pm

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