Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Mar 26, 2019
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

no comments

एहसास

उदास हो कर टूट जाए या झूम कर लड़खड़ा जाए हर एक बर्बादियों पर अपनी।

जी जाए ज़िन्दगी या छोड़ जाए हर टूटती सांसे टूटती हर एक उम्मीदों से अपनी।।

हर एक कदम से कदम चलते हुए, खुद को खुद से खुद के लिए तलाशते हुए।

सह गए सितम ज़िन्दगी का जिंदगी के लिए, हर लम्हा ज़हर ज़िन्दगी का ज़िन्दगी से पीते हुए।।

वो जो एक उम्मीद होती है ना जिंदगी, हा बस वो ही तो एक उम्मीद होती है ना वो।

टूट कर बिखर जाते है जब हर एहसास जो, बस वो एक एहसास ही तो होते है ना वो।।

बहता लहू बहते बहते रुक जाएगा, टूटती धड़कने एकदम से टूट कर टूट जाएगी।

हक़ीक़त और फ़साने का अंतर जिस लम्हा भी जिंदगी करीब से एहसास जिंदगी के अपने जान जाएगी।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
25/03/2019 at 8:45Logopit_1553613194526Logopit_1552482257836IMG_20190323_202741_111pm

Leave a Reply

Required fields are marked *.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: