जिंदगी की चाह घुट शराब की…बिखरता सा जा रहा

हु कहि मैं।

बोतल शराब की जो चाह है जिंदगी…दूर अपनो से कही खो सा गया हूं मैं।।

जशन ए बरबादियों से आबाद तो नही…हर बरबादियों का जशन मनाता जा रहा हु मैं।

हर गम, हर खुशी से हो कर अंजान परिंदे…आसमां अपना सा कोई तलाश रहा हु मैं।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

22/04/2019 at 5: 30 pmLogopit_1555934258648

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