Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

May 1, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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एहसास एक दर्द।

नही गुजरते तन्हा तन्हा से लम्हे ये इंतज़ार के, दूर सनम से
रुस्वा रुस्वा से ये लम्हे बेकरार से।

सुना है शहर में उनके जलसे है अब भी बहार के, और हम जीते है तन्हा आज भी उनके इंतज़ार से।।

उनको है हवस मौसम बहारो की आज भी जो, और हमे है आरज़ू आज भी उनके एक दीदार की जो।

ये रात चांदनी धुँआ धुँआ सा है बाहर जो, ढूंढता है निसान ए महबूब अपने एक दीवाना आज भी जो।।

बागों में खिलती कलियों का मौसम उफान पर है जो, हर खुशबू हमे गुलाब की आज भी दे जाती है याद उनकी जो।

यक़ीन है उन्हें अपने पर्दानशीं होने का आज भी जो, जख़्मी हर एहसासों को है एहसास हमारे आज भी उनके एहसासों का जो।।

वो किसी बादल की ओट से छुपकर देखते है हमे आज भी जो, और हम सरेराह उनके नाम से जीते है आज भी मरते हुए जो।

ग़ुनाह है महोबत का एक दिलकश सा गुलाबी गुलाबी जो, फ़ना महोबत से होकर उनकी, जिंदा हो गए है हम जो।।

वक़्त एक रोज़ ये आसमां गर्ज कर फट जाएगा, बरसेगा लहू सरेराह आसमां से, यकीन महोबत से यकीन हमारा जब उठ जाएगा।

बदलते एहसासों से कायम हर एहसासों को बदलना एक रोज़ यू आजाएगा, बंद आंखों से भी दीवाना हर चाल, हक़ीक़त, बेवफ़ाई उनकी जब जान जाएगा।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
01/05/2019 at 10:15 am
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