Author, Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

May 1, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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🎭 एहसास

आसमां का रंग बदल जाएगा, बदलते हर एहसासों से मेरे यहाँ।

देखना बदलने ना पाए एहसास कोई, बदलते रंग से आसमां के मेरे यहाँ।।

नसीब की बाजी अक्सर मैं हारता ही रहा हु, जमीन चलने के लिए जो कम सी मिली है मुझ को यहाँ।

हर हारी बाजी से हार गया है जो, कह दे कोई जाकर के सितमगरो से निसान हार के वो मेरे नही है यहाँ।।

रुक से गये है लम्हें अचानक से चलते चलते, हर रूके लम्हो ने देखी है वहशत खुद अपनी यहाँ।

दिखते है मग़रूर से क़ातिल हमारे हमे अक्सर, कत्ल हो जाने से बेगुनाह, हुनर एक क़त्ल का भी मिला है हमे यहाँ।।

ज़ुल्म और इंसाफ में फर्क इतना ही जाना है हमने, इंसाफ के नाम पर हर जुल्म माफ हो जाते है यहाँ।

बग़ावत करनी हो तो नादान परिंदों, असूल एक हमसे भी सिख जाना, पहले साथ निभाना क़ातिल का, फिर कत्ल करते चले जाना यहाँ।।

…फिर कत्ल करते चले जाना यहाँ, फिर कत्ल करते चले जाना यहाँ।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

01/05/2019 at 0FB_IMG_15490248746293:10 pm

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