Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

Poetry, Kavya, Shayari, Sings, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

May 7, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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📖 एहसास

महोबत में उनकी हमने उनको याद हर लम्हा किया, फ़क़त आरज़ू एक महोबत कि मुक्कमल अब भी बाकी है।

गुज़र गए जो लम्हे तन्हा तन्हा से, दूर तन्हाइयों में दूर उनसे कहि, हिसाब ज़िन्दगी का हर गुजरे लम्हे से अभी बाकी है।।

राह अंजान, हर मंज़िल अंजानी सी है यहाँ, दर्द एक हकीकत का बेदर्द आईना, सूखते अश्को पर बहते अश्कों के निशान अब भी बाकी है।

मिट गए जो निसान अश्को के बहते अश्कों से यहाँ, ख़ामोशीया चीखती है खामोशी से हर लम्हा, दर्द अश्को का अश्को में अभी बाकी है।।

गए वो भूल हमको, हर यादों को भी मिटा दिया है जो, हम देखते है राह उन की, दर्द महोबत का जिन की महोबत में अब भी बाकी है।

रात चाँदनी, ये तन्हाइयां है क्यों, वीरान गुलिस्तां ये टूटते हर अक्स से हक़ीक़त के अक्स हकीकत का देखना अभी बाकी है।।

टूट गए है एहसास हकीकत के, अक्स हक़ीक़त का देख नज़दीक से उनका, टूटे हर एहसासों से एहसास एक उनका अब भी बाकी है।

ख़ता है ये उनकी या महोबत, एहसास से

एहसासों के बिखरते हर एहसास, हर एहसास में एहसास उन का, तड़पता कोई एहसास अभी बाकी है।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

07/05/2019 at 09:05 am

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