Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

Poetry, Kavya, Shayari, Sings, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

May 11, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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अन्धकार और उजाला

अन्धकार और उजाला काव्य नज़्म रचना मेरी प्रथम प्रकाशित पुस्तक एहसास से है। जिसका प्रकाशन वर्ष 2016 में जनवरी माह में दिल्ली विश्वपुस्तक मेला में संयोग प्रकाशन शहादरा द्वारा किया गया है। इस रचना के माध्यम द्वारा मैने एक नशे से ग्रस्त व्यक्ति के दर्द को अपनी लेखनी के द्वारा व्यक्त करने का एक प्रयास किया है। जिससे आम जनमानस भी उनकी नशे की बीमारी के दर्द को एहसास को समझ सके एव उन्हें एक सहानुभूति देते हुए उनका एक उचित इलाज प्रदान करने में उसकी एव उसके परिवारजनों को अपने अपने सामर्थ द्वारा सहायता प्रदान सकें।

रचनाक अंत मे मेरे यूटयूब चैनल एव स्वम् मेरे स्वरों के द्वारा रिकोडिड मेरी इस दर्दभरी रचना अन्धकार और उजाला का वीडियो लिंक अंकित है। यदि टाइपिंग में भूल वश कोई त्रुटि हो गई हो तो उसके लिए आप सभी प्रियजनो से खेद प्रकट करता हु। एव आश्वाशन देता हूं कि उसेशीघ्र अति शीघ्र ही सुधार दिया जाएगा।

धन्यवाद।

आपका मित्र विक्रांत राजलीवाल


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संयोग प्रकाशन
एच-47 वेस्ट ज्योति नगर,
शहादरा, दिल्ली-110094
फोन न 9711261550

ए-वन प्रिंटर्स द्वारा मुद्रित
प्रथम संस्करण-2016
मूल्य:₹250:00

14) अन्धकार और उजाला

है इंतज़ार मुझे एक उज्ज्वल का,

पर अब कोई उजाला दिखता नही।

गम तो बहुत है जमाने मे,

पर अब मुझे कोई गम नही।।

एक हाथ मे थामे हुए हूँ मैं बोतल शराब की,

अब इस जमाने मे मुझे दूसरा कोई काम नही।

ना दे आवाज़ तू मुझे मेरे से ए साकी,

अब पीने के बाद मेरा कोई नाम नही।।

जब रात बीत जाएगी और छट जाएगा अंधकार,

तब मैं पीना छोड़ दूँगा।

जब हर घाव भर जाएगा

तब मैं पीना छोड़ दूँगा।।

अब तो इंतज़ार रहता है किसी अपने का,

जब वो दिख जाएगा तब मैं जीना छोड़ दूँगा।।।

ग़मों के घुट पीते-पीते मैं पीना सिख गया,

सोचा था मिट जाएंगे हर गम और छट जाएगा अन्धकार।

सील जाएंगे सब खुले घाव और लग जाएगी मरहम।।

पर ए साकी इस शराब की तासीर निराली है।

जितना पीता हूँ मैं इसे यह रात उतनी ही काली है।।

गम का अन्धकार तो ना छट पाया।

घाव है जो उन्हें और भी गहरा पाया।।

गम भरी रात और भी काली क्यों नज़र आती है।

अपने घावों मि गहराई और भी गहरी क्यों नज़र आती है।।

पीने वालों से यह मत पूछे कि वो क्यों पीते है।

अक्सर वे मौत के साए में जिन्दगी जीते है।।

मैं तो कब का मर चुका हूँ ए दोस्त।

अब तो जिंदा होने के लिए पिता हूँ ए दोस्त।।

आजकल नही मिलता हव कहि सहारा मुझे।

अब तो ग़मो ने ही पाला है मुझे।।

बनाने वाले ने क्या चीज बनाई है शराब।

इसको पीने के बाद नही लगता कोई ख़राब।।

तो क्यों ना पीयू मैं भर-भर के प्याले इस शराब के।

जब हर किसी अपने ने डाले है शूल,

मेरे सीने में नफरत और मक्कारी के भाव के।।

ए दोस्त शराब पीने में अब मुझे कोई

खराबी क्यों नज़र नही आती।

ऊनी बर्बादी की अब मुझे कोई निशानी

क्यों नज़र नही आती।।

क्यों कहते है लोग की पीना गलत है।

क्यों कहते है लोग की पिलाना गलत है।।

अजी इसी पीने और पिलाने से ही तो

सिख है कइयों ने गमोक साए

में भी खुशी से जीना।।।

हर दर्द कि यही तो एक दवा नज़र आती है।

घाव तो कई है इस जमाने मे मगर हर घाव कि

दवा यही नज़र आती है।।

क्या गम है जो हो गया मैं बर्बाद।

नही दिया किसी अपने ने मेरा साथ।।

ए मेरे साकी अब तू ही बता की,

क्यों ना पियो मैं यह शराब।

ना घर है मेरा ना कोई परिवार।।

जहाँ भी जाता हूं, वही हो जाता है तिरस्कार।।।

ऐसा एहसास होता है मुझे इस शराब ने ही मुझे-बचाया है।

जो टूट गए थे दिल के तार उन्हें इस ने जोड़ डाला है।।

अब तो बस यही चाहत है बाकी।

साथ रहे मेरा साकी की अभी,

बोतल में और शराब है बाकी।।

जीवन मे अपना तो कोई रहा नही बाकी।

देख कर किनारा सागर में

अब यूँ मुड़ना ना रहा बाकी।।

लगा है घाव जो सीने पर कि अब

उसका भरना ना रहा बाकी।।।

लोग कहते हैं शराबी के सीने में कोई एहसास नही।

मैं कहता हूँ कि उनके सीने में भी दिल है,

कोई पत्थर नही।।

शराबी को जमाने में लोग क्या समझते है,

शराबी को इस बात का कोई गम नही।

वो तो वर्षो पहले मर चुका है

अब जीवन जीने का उसका मन नही।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

प्रकाशित तिथि 11/05/2019 at 10:58am

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&

मेरी इस दर्दभरी रचना अन्धकार और उजाला का वीडियो लिंक है

👉 Watch “अन्धकार और उजाला। ( पुस्तक एहसास से विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। )” on YouTube https://youtu.be/lMmhrD1Ueck 🙏💖💖

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