Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

May 18, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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सुलगते एहसास।

आज फिर से मौसम ने अँगड़ाई ली है बदलते वख्त ने भी वख्त की दुहाई दी है।

मिज़ाज अपना ना बदल देना कोई, देख कर बदलता रंग ए आसमां, रंग अपना ना बदल देना कोई।।

कायम एहसासों से कायम है एहसास जितने, बदलते वख्त से मिटा ना देना तुम कायम एहसास अपने।

असूल ये दुनियादारी के, सिखाए से भी सिखाए जो नही जाते, मिलते है ज़ख्म सीने पर जो सरेराह, वो भुलाए नही जाते।।

रात चाँदनी एक फरेब हो सकती है, धोखा हक़ीक़त का फरेब से कोई खा ना जाना।

होगा सामना हक़ीक़त से जब, निसान फ़रेबी के एहसासों को अपने भुला ना जाना।।

दोस्तों की शक्ल में दुश्मनों से साथ निभाते हुए, वार ख़ंजर के टूटे दिल पर खाते हुए, फरेब से अपनो के टूट ना जाना।।।

हौसला भी देख कर हौसला सितमगरो का अपने ख़ामोश हो जाता है जब।

उठता है तूफ़ान सीने में ख़ामोशी से तो बहुत शोर मचाता है तब।।

पुकारते है नाम क़ातिल का अपने, दहकते अंगारो से दहकते जज़्बात मेरे।

क़त्ल सुलगते एहसासों से अक्सर एहसासों का हो जाता है मेरे।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

18/05/2019 at9:55 pmScreenshot_2019-05-18-21-45-33-738_com.google.android.youtube

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