Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

May 20, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

5 comments

✍️ मेरी क़लम।

मैंने बीते कुछ वर्षों के दौरान हम सब के इस सभ्य समाज पर और लगभग सभ्य समाज के हर वर्ग चाहे वो धनी हो या निर्धन। कोख़ में पलती लड़की और उसके जन्म से भयभीत होते कटरपंथी विचारधारा के व्यक्तियो के भाव व्यवहार हो या विकृत होती जा रही राजनीति। संसार से कट एकांकी जीवन जीने को बेबस व्यक्ति हो या स्वम् से स्वम् की नाराजगी झेलता कोई मानुष। अध्यात्म का एहसास एव नशा निषेध सत्य अहसासों को अपनी कलम अपने स्वरों के द्वारा व्यक्त करने का एक प्रयास मात्र किया है।Logopit_1558345226919

मैंने बीते कुछ वर्षों के दौरान इश्क, महोबत, प्रेम, वैराग्य, पर भी सैकड़ो ग़ज़ल, नज़्म, काव्य और कविताए लिखी एव प्रकाशित करि है।

इसके साथ ही समय समय पर सामाजिक कार्यो के द्वारा अपने कर्तव्यों का भी निर्वहन किया है।

इसके साथ ही ना जाने कितने ही जटिल विषयो चाहे वह अध्यात्म से सोच परिवर्तन हो, भृष्ट व्यवस्था से पीड़ित आमजन्मांसो का दर्द हो या हर बदलते सामाजिक रिश्तों की वास्तविकता को दर्शाते विस्तृत लेख हो।

मैंने बीते कुछ समय के दौरान अपनी दर्द से भरी बेहद विस्तृत नज़्म दास्ताँ शृंखला के अंतर्गत अपनी प्रथम दास्ताँ एक इंतज़ार… महोबत। को भी प्रकाशित किया है। और बहुत सी अपनी दम तोड़ती रचनाओँ को अपने साधारण से स्वरों के साथ अपने YouTube चैनल के माध्यम द्वारा जीवित करने का प्रयास भी किया है।

यह था अब तक का मेरे द्वारा किया गया वह कार्य जो मेरे इष्ट ने, मेरे ईष्वर ने, उस मेरे एक प्रवर्दीवार ने मुझ से ना जाने किस प्रकार से करवा दिया। इसके साथ ही आपको ज्ञात है कि मैं अपने एक अत्यंत विस्तृत दर्दभरे नाटक पर भी कार्य कर रहा हु जिस के द्वारा आपको जीवन के हर रंग से परिचित होते हुए उसका पाठन करने का एक अवसर भी शीघ्र ही प्राप्त होगा।

मित्रों बीते कुछ दिनों से स्वास्थ्य कुछ अस्वास्थ्य महसूस कर रहा हु मैं। जैसा कि मैने आपसे कहा था कि शीघ्र ही मैं अपनी दूसरी दर्द से भरी नज़्म दास्ताँ को प्रकाशित करूँगा। परन्तु हक़ीक़त है कि आजकल मेरा स्वास्थ्य मेरा उतना साथ नही दे पा रहा। जिसके चलते न तो मुझ को दूसरी विस्तृत नज़्म दास्ताँ को टाइप करने का समय मिल पा रहा और ना ही मैं अपने प्रथम अधूरे नाटक को पूर्ण ही कर पा रहा हु। मैं जानता हूं कि मेरी कलम से प्रेम करने वाले ऐसे बहुत से महानुभव व्यक्ति इस संसार मे अवश्य मौजूद है जिन्हें मेरी उन आगामी रचनाओ का बेसब्री से एक इंतज़ार रहता है। और वह मेरे द्वारा लिखित उन समस्त अप्रकाशित दर्दभरी नज़्म दास्तानों के साथ ही मेरा अप्रकाशित बेहद दर्दभरा जीवन के हर रंग को प्रस्तुत करता मेरा प्रथम नाटक भी पढ़ना चाहते है। परंतु मैं अपनी विवशता अभी आप सभी मित्रजनों से बाट सकने की स्थिती में नही हु।

खैर जो भी हो परन्तु हक़ीक़त है कि मित्रो मेरा स्वास्थ्य आजकल मेरा वह साथ नही दे पाता जो कि पहले दे पाता था आज कल वह कुछ अस्वास्थ्य रहने लगा है। ए मेरे मालिक मुझ में इतना सामर्थ दे कि मैं उन तमाम रचनाओ को उनके असल हकदारों तक पहुचा सकूँ। ए मेरे मालिक मुझ को इतना तो सामर्थ दे।

अ आह! 💦 ये आह मेरी जला देगी इस संसार से उन जुल्मियों का नमो निसान। समझते है जो कि मेरे हवाले से उन्होंने हक़ीक़त को मिटा दिया।

निशान अश्क़ के मेरे डूबा देंगे जल्द ही अब उनको, हर लव्ज़ से जिनके झूठ का बाज़ार आज भी रौशन है।

अंत मे इतना ही कहता हूं कि वख्त बदल जाएगा एक रोज। नही बदलेगी तारीख़ हक़ीक़त की मगर, हा लौट कर आऊंगा वापस से यही मैं, मगर साथ होगी मेरे कुछ जिंदा उम्मीदे और जलता उनसे उम्मीदों का एक दिया।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

20/05/2019 at3:40

pm

5 thoughts on “✍️ मेरी क़लम।

  1. अति उत्तम लेख सर

    Liked by 1 person

  2. बहुत अच्छा लेख

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Required fields are marked *.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: