Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

May 26, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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एहसास

ये रात भी बीत जाएगी और एक एक कर के दिन तमाम, भागते रहे करने को ख़िदमत, खड़े बांध कतार में तुम अपने हाथ।

करि ख़िदमत शहंशाहों की उम्र तमाम, मिला एक लम्हा भी सकूँ का फिर भी नही, करा नज़रंदाज़ साए को अपने, छोड़ अपनो का साथ।।

कर दिए हर लव्ज़ महोबतों के बेअसर से तुमने, अफ़साने नफ़रतों के हमेशा गढ़े, सुन ना सके धड़कने दिल की टूटे, दिल अब भी हमारा जो तुम्हारे पास।

ज़हर एहसासों से एहसासों का एहसासो में उतारा तुमने, कत्ल एहसासों का एहसासों से अपने जो कर दिया तुमने, जो बेहद ख़ामोशी के साथ।।

एक रोज़ दिन कयामत के पूछेंगे हम उस परवरदिगार से कि क्यों आदम को तुमने दिया था दिल और क्यों दी उस दिल में धड़कती धड़कने तमाम।

हर धड़कन छुपाए बैठी है खुद में एहसास कई, हर एहसास भी है सुलगते सुलगते से उनके,

दे दिया दिल, दे दि धड़कने, दिए एहसास भी एहसासों से सुलगते सुलगते से तमाम।।

एहसास आज भी खामोशी से सुलगते है हमारे, हर धड़कन भी धड़क कर दिल को धड़का देती है हमारे।

फ़क़त आरज़ू आज भी धड़कते दिल की धड़कती धड़कनो में एहसास एक एहसास महोबत का है हमारे।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

25/05/2019 at 10:35 pm20180502_230011

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