Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

May 27, 2019
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

1 comment

एक महत्वपूर्ण सूचना।

🙏 नमस्कार इस ब्लॉग का पाठन करने वाले मेरे समस्त प्रिय पाठको को, मित्रों आज मैं आपसे कुछ अत्यंत ही जटिल विषय सांझा करने आया हु, मित्रों शीघ्र अति शीघ्र ही मैं आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल आपकी अपनी इस ब्लॉग साइट https://vikrantrajliwal.com पर बाल मनोवैज्ञानिक से सम्बंधिक पूर्ण बाल मानसिक स्थितियों पर प्रभाव एव व्यवहार परिवर्तन पर कुछ बेहद ही रोचक तथ्यों को अपने बाल काल के वास्तविक अत्यंत ही जटिल एव मार्मिक अनुभवों के द्वारा व्यक्त करते हुए अपने एक आगामी मनोवैज्ञानिक लेख के द्वारा प्रस्तुत करने का एक प्रयास करूंगा।

कि कैसे कभी कभी जीवन जटिल परिस्थितियां किस सिमा तक जटिल हो सकती है इसका आपको किंचित मात्र भी कोई अंदेशा नही हो पाता। अगर एक स्केल के जरिए में आपको कुछ संकेत दर्शाने का एक प्रयास करू तो 1 अत्यंत ही लघु स्थिति एव 10 अत्यंत ही जटिल मानसिक स्थिति है। तो आप पाएंगे कि स्केल 1 से जटिल परिस्थियों की शुरुआत होती है एव 10 तक पहुचते हुए वह अत्यन्ति ही जटिल एव भयावह हो जाती है। एक मासूम बालक जिसने अभी प्ले स्कूल में जाना आरम्भ किया है एव kg कक्षा, फिर ukg कक्षा, पहली, और इसी प्रकार से उस मासूम (स्वम् के) के जीवन की जटिल एव भयावह उन छोटी छोटी समस्याओं को व्यक्त करने का एक प्रयास करूँगा जो आज भी मेरे चेतन और अचेतन मस्तिष्क में वैसे ही अंकित है जैसे कि मैं आज भी उन्हें महसूस कर सकता हु।

अंत मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि आज जो जटिलता आपको दिखती है वह यू ही तो नही हालात और भी बत्तर हो सकते थे। इसीलिए आपका बाल मनोविज्ञान को समझना अत्यंत ही आवश्यक हो जाता है। मेरा भरपूर प्रयास रहेगा कि शीघ्र अति शिघ्र ही अपने बाल काल के जीवन से सम्बंधित कुछ मनोवैज्ञानिक तथ्य के द्वारा अपने स्वम् के बाल काल से युवा अवस्था से गुजरते हुए वर्तमान काल तक के कुछ अत्यंत ही रोमांचक तथ्य को अपने आगामी मनोवैज्ञानिक ब्लॉग के द्वारा आप सभी से व्यक्त कर सकूँ।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
27/05/2019 at 8:11 am

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