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ट्वीट्स। My Twittes (एक लघु संग्रह )

✍️ यह एक लघु संग्रह है बीते कुछ दिनों में मेरे मैन ट्विटर अकाउंट और बैकअप ट्विटर अकाउंट के कुछ दिल को छू देने वाले ट्वीट्स के। 1) @vikrantrajliwal 2) @RajliwalVikrant 3rd one है @VRajliwala

This is a short collection of my main Twitter Twitter accounts and some of my backup Twitter Twitter accounts that touched your heart. 1) @vikrantrajliwal 2) @RajliwalVikrant is 3rd one @VRajliwala

केवल आनन्द एव कटाक्ष के दृष्टिकोण से पाठन कीजिएगा। एव यदि कोई ज्ञान वर्धक पन्तिया पाठन हेतु प्राप्त हो जाए तो उनको लिखने के वास्तविक कारण तक पहुचने का प्रयास कीजिए।

Only read from the point of view of joy and sarcasm. And if any knowledge-seeker is available for reading, then try to reach the real cause of writing them.

👉 😇 कोई अपने धर्म मे है मलंग, तो कोई अपनी जात के सम्प्रदाय में है मलंग।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
25 may 2019 @VRajliwala
(Translated)

👉 😇 Someone in his religion is Malang, then someone is in the caste of his caste Malang.

Written by Vikrant Rajliwal

🤠 आप किसी के गुण देखने से पूर्व उसके धर्म एव जात को क्यों देखते है? क्या किसी व्यक्ति के गुण उसके धर्म या जात से मिट सकते? यदि नही तो आपको अपने व्यवहारों एव विकारो का पुनः एक बार आंकलन करने की गहन आवश्यता है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
25may @VRajliwala
@vikrantrajliwal @RajliwalVikrant

Translated

🤠 Why do you see his religion and caste before seeing someone’s qualities? Can a person’s qualities be erased from his religion or caste? If not, then you need a deeper assessment of your behaviors and disorders once again.

Written by Vikrant Rajliwal

💥 सुप्रभात।

जीवन का दूसरा नाम संघर्ष ही है। जीवन के हर क्षण एक नया इम्तिहां समक्ष होता है और उसके लिए स्वम् को सशक्त करना ही जीवन है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। https://t.co/eCeNEb4m6J https://t.co/PfdoW0vLN0

25may @RajliwalVikrant
💥 Good Morning.

The second name of life is conflict only. Every moment of life is present in a new era and for him, empowering the Self is life.
Written by Vikrant Rajliwal (Translation by Vikrant Rajliwal) https://t.co/gcA0Lficr9 https://t.co/MvZPLIVUKK
25May @RajliwalVikrant

😇 आप को आपके अधिकारों के ज्ञान का ज्ञान होने से बढ़कर कोई ज्ञान नही।

यह आपका धर्म है कि आपके अधिकारों का ज्ञान आपको होना।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
25May @VRajliwala
@RajliwalVikrant @vikrantrajliwal

Translated

😇 You do not have any other knowledge than knowing knowledge of your rights.

It is your religion that you have knowledge of your rights.

Written by Vikrant Rajliwal
@RajliwalVikrant @vikrantrajliwal
25may VRajliwala

💥 मानुष को तुमने कभी मानुष ना समझा, भूल कर धर्म मनुष्यता का तुमने कभी भी धर्म मनुष्यता का नही समझा।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

@RajliwalVikrant @vikrantrajliwal
Translated by Vikrant Rajliwala (विक्रांत राजलीवाल)

💥 You never thought of a Human as a human. You have never understood religion as a human.

Written by Vikrant Rajliwal
@RajliwalVikrant @vikrantrajliwal

👉 जब मानुष स्वम् के धर्म या सम्प्रदाय के रिवाजो और कुप्रथाओं के विरुद्ध आवाज उठाने से भयभीत हो जाते है।

तब मानुष दुसरो के धर्म एव समप्रदाय पर कलंक लगाने लगते है और स्वम् की कमियॉ नज़रंदाज़ कर अपने धर्म की कुप्रथाओं को ईष्वर का आदेश एव अन्य जनो के धर्म रिवाजों को यह क्या बकवास है ( व्हाट दा हैल इस डिस ) कहने लगते है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
26may@VRajliwala
@RajliwalVikrant @vikrantrajliwal

Translated by Vikrant Rajliwala

👉 When the man becomes frightened by raising his voice against the rituals and practices of his religion or community.

  Then the men start to blame others’ religion and community and ignore their own weeknesses , by ordering the laws of their religion and the rituals of other people what is this nonsense. (What the hell is this this)?

  Written by Vikrant Rajliwal
  @RajliwalVikrant @vikrantrajliwal

26may @VRajliwala

🕊️ जिनकी कलम ही उनका धर्म है और हर अक्षर एक एहसास।
करता हु प्रणाम तुम्हे तुम हो संघर्ष की जिंदा एक मिसाल।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। (Vikrant Rajliwala) ✍️
@RajliwalVikrant @vikrantrajliwal https://t.co/P1LniB0vmv

👹 एक धर्म स्वार्थ का सब पर भारी, स्वार्थ स्वार्थ से निखरे साथ साथ जितने भी जो स्वार्थी।

कर हत्या विशवास कि है चूर घमंड से धर्म सत्य का त्याग, क्रूर जितने भी जो स्वार्थी।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
@RajliwalVikrant @vikrantrajliwal

😋 सोशल साइड्स।

😎 छुप छुप कर देखना और उस देखे हुए का रिकार्ड को गर्व से बताना भी एक धर्म बन गया है।

कभी जो मिलते थे सीना थोक कर आज छुप छुप कर व्यू से उपस्थिति दर्द कर जाते है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। https://t.co/2W9cwjgp3O

😋 Social Sides. (Translated)

😎 Hiding and hiding the record of that seen with pride proudly became a religion.

Ever wanted to meet you occasionally. Today, the same person hides his sight from the view of the hidden person.

Written by Vikrant Rajliwal https://t.co/ZDLHHpWXVy

😇 यह एक आशीर्वाद है एक दुआ है मेरे स्वम् के मासूम बच्चों समेत हर एक मासूम बच्चों के लिए।

ईष्वर तुम्हे हर बुराईयों से सुरक्षित रखे। और मेरी उम्र भी तुम्हे मिल जाए।

🕊️ चलो तो ऐसे चलना की देख कर तुम्हारे व्यक्त्वि की चमक ज़माना भी ठहर जाए। झुक जाए हर मंजिल कदमो में तुम्हारे, आसमां भी झुक कर करे नमन।

जीते रहो।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Published on blog site 02/06/2019 at 07:25am

1559439491961

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Published by Voice Of Vikrant Rajliwal ( My Writing, My Blogs & My Voice)

💥Spiritual communicator, Motivational Speaker, Author, Writer, Poet And Thinker. विक्रांत राजलीवाल। (समाजिक कार्यकर्ता, कवि, शायर, नज़्मकार, ग़ज़लकार, गीतकार, व्यंग्यकार, लेखक एव नाटककार-कहानीकार-सँवादकार) 1) एहसास प्रकाशित पुस्तक (published Book) : अत्यधिक संवेदनशील काव्य पुस्तक एहसास, जिसका केंद्र बिंदु हम सब के असंवेदनशील होते जा रहे सभ्य समाज पर अपनी काव्य और कविताओं के द्वारा एक प्रहार का प्रयास मात्र है। Sanyog (संयोग) प्रकाशन घर शहादरा द्वारा प्रकाशित एव ए वन मुद्रक द्वरा प्रिंटिड। प्रकाशन वर्ष जनवरी 2016. प्रकाशित मूल्य 250:00₹ मात्र। 2) My Site: Vikrant Rajliwal Url address: vikrantrajliwal.com वर्ष 2016-17 से अब तक सैकड़ो दर्दभरी नज़्म, ग़ज़ल, बहुत सी काव्य-कविताए एव कुछ व्यंग्य किस्से, कुछ एक गीतों के साथ बहुत से विस्तृत समाजिक, आध्यात्मिक एव मनोवैज्ञानिक लेखों के साथ कई प्रकार के सामाजिक एव आध्यात्मिक विचार लिख कर अपनी साइट पर प्रकाशित कर चुके है। एव दिनप्रतिदिन कॉप्के प्रेमस्वरूप नित्य नई रचनाओँ का लेखन एव प्रकाशन जारी है। एवं स्वम् की कई नज़्म कविताओं एव लेखों का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद कर चुके है। 3) Youtube channel: Vikrant Rajliwal पर मेरे द्वारा लिखित मेरी समस्त रचनाओँ जैसे प्रकाशित पुस्तक एहसास से अति संवेदनशील काव्य- कविताए, और मेरी निजी लेखनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित मेरी सैकड़ो नज़्म, ग़ज़ल और बहुत सी काव्य, कविताओँ एव्यंग्य किस्सों को मेरे स्वयं के स्वरों के साथ देखने और सुनने के लिए मेरे YouTube चैनल को अभी Subscribe कीजिए। 👉 आगामी रचनाएँ (Upcoming Creation's) : अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर सक्रिय अति विस्तृत दर्दभरी नज़्म दास्ताँ श्रृंखला "दास्ताँ" के अंतर्गत चौथी एवं अब तक लिखी गई अंतिम अति विस्तृत दर्दभरी नज़्म दास्ताँ "मासूम मोहब्ब्त" प्रकाशित करि जाएगी। जल्द ही अपनी ब्लॉग साइट vikranrajliwal.com पर अपनी कुछ लघु कहानियों का प्रकाशन का कार्य प्रारंभ करूँगा। 👉 साथ ही मैं वर्ष 2016 से एक अत्यंत ही दर्दभरा जीवन के हर रंग को प्रस्तुत करती एक सामाजिक कहानी, एक नाटक पर कार्य कर रहा हु। 💥 इसके साथ ही शायद आप मे से बहुत से महानुभव इस बात से परिचित नही होंगे कि मैं आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल वर्ष 2003-04 से नशे से पीड़ित मासूम व्यक्तियों के लिए निःस्वार्थ भाव से सेवा करता आ रहा हु एव स्वम भी कई प्रकार के जटिल उतार चढ़ाव के उपरांत एक शुद्ध रिकवरी को प्राप्त कर सका हु। यदि आप मुशायरे या कवि सम्मेलन के आयोजक है और आप मेरी सैकड़ो दर्दभरी नज़्म ग़ज़ल शायरी या काव्य कविताओं के द्वारा मेरे कार्यक्रम को बुक करते है तो यकीन मानिए इस प्रकार से आप अपना एक अनमोल योगदान उन मासूमो के लिए सहज ही प्रदान कर सकते है। क्योंकि मेरी कला के कार्यक्रम से होने वाली 100% कमाई नशे से पीड़ित उन गरीब एव बेबस मासूमो के इलाज लिए समर्पित होगी। जिन्होंने अपना जीवन जीने से पूर्व ही नशे के आदि बन कर बर्बाद करना शुरू कर दिया है या बर्बाद कर चुके है। 😇 समाज सेवा: स्वमसेवी नशामुक्ति कार्यक्रम के तहत नशे की गिरफ्त में फंसे नवयुवको एवं व्यक्तियों को एक स्वास्थ्य जीवन को जीने के लिए प्रेरित करता आ रहा हु। स्वमसेवी संस्थाओं एवं स्वयम से जन सम्पर्को के माध्यम द्वारा निशुल्क सेवा भाव से वर्ष 2003 से अब तक। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। मेरासंपर्क सूत्र नीचे अंकित है। My Whatsapp no: 91+9354948135 (Translated) One service and one collaboration Hello Friends, Many of you may not be familiar with the greatness that I have been serving my self-indigenous friends Vikrant Rajliwal with selfless service for innocent people who have been suffering from intoxicants since 2003-04. After a complex fluctuation of type, I could get a pure recovery. And if you are the organizer of mushere or poet conference or you can book my program with my hundreds of painful najm ghazal shayari or poetic poems and also in your program, believe that in this way you have a valuable contribution They can easily provide for those innocent people. Because 100% earnings from my program will be dedicated to the treatment of those poor and unemployed innocent people who have started wasting or wasted by becoming addicted to drugs before living their lives. Name: Vikrant Rajliwal Published book: एहसास (a highly sensitive poetic book inspired by social and humanitarian values) published by Sanyog publication house shahdara. Which was also showcased at the Delhi World Book Fair in the same year 2016. 🎤 Upcoming creations: The story of my fourth and last nazam tales written so far. And a play, a painful story presenting every run of life. 😇 Social service: Swamsevy has been promoting the life of the youth and all the people trapped under the influence of intoxicants as a drug addiction program. Free service charges through Swamsevy institutions from 2003 till now. Thank you Vikrant Rajliwal Hometown: Delhi. The contact form is displayed below. My Whatsapp no: 91 + 9354948135 प्रिय पाठकों एव मित्रजनों, यह है अब तक का मेरे द्वारा सम्पन्न एव आगामी लेखन कार्य, जो आप सभी प्रियजनों के प्रेम एव आशीर्वाद से शीघ्र अति शीघ्र ही सम्म्प्न हो अपने वास्तविक स्वरूप को प्राप्त हो जाएगा। आप सभी प्रियजन अपना प्रेम एव आशीर्वाद अपने रचनाकार मित्र विक्रांत राजलीवाल पर ऐसे ही बनाए रखे। धन्यवाद। विक्रांत राजलीवाल।

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