एक 17 वर्षीय अबोध युवक जब रिएबीटेशन सेंटर में भर्ती हो जाता है। एव हर गुजरते लम्हों के साथ उसे उसके जीवन के वह प्रत्येक वाक्य एक एक करके स्मरण होने लगते है। जिनके प्रभाव से उसके जीवन मे एक अचूक परिवर्तन सहज ही आ गए। जिनमे से कुछ परिवर्तन सकरात्मक हो सकते है एव उनमें से कुछ परिवर्तन नकरात्मक भी हो सकते है। क्या आप जानते है कि वह 17 वर्षीय अबोध युवक जिसने अपने जीवन की कच्ची उम्र में जीवन की अत्यधिक जटिल परिस्थितियों का ना केवल दृढ़ता से सामना किया अपितु उन पर विजय प्राप्त करते हुए अपने जीवन को एक सकरात्मक दिशा भी प्रदान करि कौन है? जी हाँ आपने सही पहचाना वह कोई और नही अपितु आपका परम् मित्र साहित्यकार विक्रांत राजलीवाल ही है।

आज भी मुझको अपने जीवन के वह क्षण अत्यधिक समीप से स्मरण हो जाते है जिन्हें मैं चाहकर भी विस्मृत नही कर सका हु। आज मैं जो जीवन जी रहा हु यह कभी एक स्वप्न के सम्मान प्रतीत होता था। एक ऐसा स्वप्न जिसे मेने रिएबीटेशन में कदम रखते ही जान लिया था या यह कहना अधिक उचित होगा कि जब मुझ को इस बात का एहसास हुआ कि मैं अब रिएबीटेशन में अपने जीवन के एक अनन्त सुधारात्मक मार्ग पर आ खड़ा हुआ हूं। आज भी वह दिन मेरी स्मृति में ज्यूँ का त्युं बना हुआ है। उस दिन ने भी और दिनों के सम्मान ही मेरे जीवन मे अपने आगमन की एक दस्तक दी थी। और उस दिन भी मैं और दिनों के सम्मान ही अत्यधिक ऊर्जा का एहसास कर रहा था। परन्तु वह दिन वास्तविकता में और दिनों से पूर्णतः विपरीत सिद्ध होते हुए मेरे जीवन को हमेशा के लिए परिवर्तित करने वाला था।

उस दिन को स्मरण करते हुए यहाँ मैं अपनी कुछ पनतियो को अंकित करना चाहूंगा जिन्हें मेने कल ट्विटर एव अन्य सोशल मीडिया पर पर लिखा था कि… ये दिल है कि आज भी जो खुद से ही खुद की एक बग़ावत की चाहत रखता है।
और हम है कि जो आज भी हर बग़ावत को इस दिल से मिटा देना चाहते है।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

07/06/2019

Even today, this heart keeps a desire for a rebellion of itself.
And we still want to erase every rebellion with this heart.

Written by Vikrant Rajliwal
07/06/2019
Soponser by vikrantrajliwal.com

सत्य है मित्रो आज भी कई बार मेरे ह्रदय में यह विचार आ जाता है कि बस! अब बहुत हो चुका अब और नही। हा अब और नही सह सकता। मगर मेरे जीवन के स्वम के संघर्ष के अनुभव एव उन अनुभवों से प्राप्त ज्ञान मुझे आज भी इस गुस्ताखी की कोई भी एक अनुमति प्रदान नही करते है। यही तो जीवन है कि हम कैसे अपने गुरुजनों से प्राप्त मार्गदर्शन एव अपने स्वयं की जीवन की जटिल परिस्थितियों पर प्राप्त विजय को अपने अज्ञान के कारण यू ही नही मिटा सकते या अपने जीवन के अत्यधित जटिल संघर्ष को तुच्छ साबित करते हुए उन्हें अपने जीवन से विस्मृत नही कर सकते है। खैर मैं आपको बता रहा था कि कैसे किसी दिन आपका जीवन बिना किसी खास चेतावनी के आपके जीवन को पूर्णतः परिवर्तित कर सकता है। ऐसा ही एक दिन मेरे जीवन मे भी आया था जब मेरा साधारण सा जीवन एकदम से बदल गया।

याद ह जब…

(शेष सत्य है कि अगले ब्लॉग से)

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
08/06/2019 at 11:15 am
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