Author, Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

July 9, 2019
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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🙃 “मसखरे” (REBLOG WITH YOUTUBE VIDEO LINK)

एक समय की बात हैं। कुछ मसखरे एक टटू ठेले में सूट बूट पहन कर कहि कार्यक्रम पेश करने को जा रहे थे। नही नही शायद कहि से आ रहे थे। तभी एक मसखरा जिसने शायद कुछ मदिरा पी हुई थी दूसरे मसखरे के पैर पर पैर रखते हुए उसे कोंचते हुए, हँसते मुस्कुराते हुए एक कुटिल मुस्कान बिखेरता हुआ आगे को खिसक जाता है। 

उसकी यह हरकत उस दूसरे मसखरे को जिसने मदिरा तो नही पी थी परन्तु उसे भांग का शौक जरूर था और शायद आज उसने भांग की कई बड़ी बड़ी गोलियां एक साथ अपने हलक से लगा कर निगल भी रखी थी। उसको पहले वाले मसखरे की यह बात या हरकत कतई भी बर्दाश ना हो पाई और वह भी आगे को खिसकते हुए उस शराब के नशे में धुत पहले वाले मसखरे के पैर को अपने भांग के नशे के सरूर में अपने फावड़े जैसे खुदरे पाँव से कुचलने की एक कोशिश करता हैं। और कुचल भी देता है। पर यह क्या हुआ उसी समय उनके उस टटू ठेले का पिछला पहिया जंगल के बीचों बीच, रास्ते के एक गड़े में अटक कर जाम हो जाता हैं। और उस पहिए के अचानचूक रुक जाने से या इसे आप यू भी कह सकते है कि उसके यूं जाम हो जाने से उतपन उस एक जोरदार झटके से उस टटू ठेले में सवार वह समस्त मसखरे धड़ाधड़ लुढ़कते हुए एक दूसरे पर गिरने लगते हैं। और एक भयानक शोर मचाते हुए एक दूसरे के बालों से लेकर चेहरे तक को अपने जग विख्यात नुकीले नाखूनों से नोचने खोचने लगते हैं। और इस नोच खरोंच से उतपन दर्द से वह तमाम मसखरे और भी जोर से चीखने चिलाने लगते है।

तभी उनके उस टाटू ठेले के चालक को, जो अब भी उस टाटू ठेले के उस जाम पहिए को अपनी सम्पूर्ण ताकत के जरिए रास्ते के गढ़े में से बाहर निकालने की एक भरपूर कोशिश कर रहा था और अपनी इस कोशिश में वह थक कर चूर हो चुका था। यहाँ तक कि उसके इस असफल प्रयास से उसका वह तंग पैजामा भी कहि कहि से पीछे की तरफ से उधड़ कर फट गया था। उसको उन मसखरों के इस तरह के बेमतलब के मसखरेपन पर बेहद गुस्सा आ जाता हैं और वह अपनी फ़टी पतलून को संभालते हुए उस टाटू ठेले पर एक झटके से चढ़ जाता है और उन मसखरों से इस तरह के इन कठिन या जटिल हालातों में यू बिन बात ही उनके लड़ने झगड़ने का कारण पूछ बैठता है।

पर यह क्या तभी वह समस्त मसखरे उस पर जोर जोर से चीख़ते चिलाते हुए उसकी ओर बढ़ने लगते है। उन सब के (मसकरो के) इस तरह के अजीब बर्ताव पर वह टाटू ठेले का चालक उन्हें संयम से व्यवहार करने की हिदायत देता है। और उन्हें शांति बनाए रखने का आग्रह करते हुए धीरे धीरे पीछे को हटते हुए उस टाटू ठेले से नीचे उतर जाता है।

अब तो उन समस्त मसखरों का गुस्सा सातवें आसमान तक पहुच जाता है क्योंकि उन विश्व विख्यात प्रसिद्ध मसखरों को उस टाटू ठेले के चालक कि यह बात, यह समझदारीपूर्ण राय किसी बेहद संगीन गुस्ताखी से कम प्रतीत नही होती। और वह आपस में झगड़ना बन्द कर उस टाटू ठेले के चालक को जो अब फिर से अपनी कहि कहि से पीछे से फ़टी पतलून को संभाले हुए अपनी सम्पूर्ण ताकत का इस्तेमाल करते हुए उस टाटू ठेले का पहिया जो कि बीच जंगल के उस रास्ते पर एक गढ़े में धंस कर जाम हो गया था को निकालने का पुनः एक प्रयास कर रहा था। उसको आवाज देकर अपने समीप बुलाते है और जैसे ही वह अपनी उस फ़टी पतलून को सम्भाले हुए कुछ लँगड़ाते हुए कदमो के साथ लड़खड़ाता हुआ उन मसखरों के समीप उपस्थित होता है कि तभी वह मसखरे उसे तुरंत ही झपट कर पकड़ लेते है। और जिस हाथ से वह अपनी कहि कहि से पिछे से फ़टी पतलून को सम्भाले हुए था को खींच कर अलग कर देते है। और उसकी उस कहि कहि से पीछे से फ़टी पतलून के चिथड़े चिथड़े कर के बिखेर देते है।

इतने से भी जब उनका गुस्सा शांत नही होता है तब वह उस टाटू ठेले के चालक को उसके ही टाटू ठेले के उसी पहिए से बांध देते है जो कि रास्ते के एक गढ़े में धंस कर जाम हो गया था। वह भी बिना किसी रस्सी के इस्तेमाल करे, अपनी अपनी पतलून उतार कर, पतलून से सटी एकलौती अपनी अपनी लँगोटी के साथ।

और अंत मे हँसते मुस्कुराते, खिलखिलाते हुए, उस टाटू ठेले के चालक को वही उस घने जंगल मे उस सुनी राह पर छोड़ कर और भी घने जंगल और ऊंचे ऊंचे पर्वतों की ओर अपना नंगा बदन लिए दौड़ लगते हुए दौड़ने लगते है। और वह टाटू ठेले का लगभग अर्ध नगन हो चुका चालक खुद को ठगा सा महसूस करते हुए वही पर बेबसी के साथ बन्धा हुआ उन मसखरों को नंगे बदन से दौड़ लगाते हुए देखता रहा।

अंत में मैं आपका अपना मित्र कवि, शायर एव नाटककार विक्रांत राजलीवाल इतना ही कहना चाहूंगा कि…

ना देना मसखरों को कभी राय कोई नसीहत, तुम नेकी भरी।
ना पूछना कारण, उनसे तुम कभी उनकी किसी भी मसखरी का,
भाग जाएगा वरना बांध कर तुम को भी वो, बिन रस्सी के अपनी एकलौती लँगोटी सा…

समाप्त।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Republish on vikrantrajliwal.com 09/07/2019 at 12:38 am

👉 🙃 व्यंग्य किस्सा “मसखरे” मेरे द्वारा लिखित एक हास्य व्यंग्य किस्सा है। जिसको आज अपने स्वयं के स्वरों के साथ प्रथम बार अपने YouTube चैनल के माध्यम द्वारा जीवंत रुप देने का प्रयास किया है।

Click the link of my video and share & Subscribe my channel.

Watch “मसखरे ( Maskhare ) व्यंग्य किस्सा ( comedy , satire , Stroy , nazm , Gazal )” on YouTube https://youtu.be/LSGHIitR1Bg ❤️❤️🤗🙏💖💖

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