यदि आपके कर्मो के द्वारा आपके जीवन मे कोई सकारात्मक परिवर्तन सहज ही उतपन हो जाए। तो आपका वह कर्म एक सत्कर्म कहलाया जाता है।

इसके विपरीत यदि आपके कर्मो के द्वारा आपके जीवन में कोई नकरात्मक परिवर्तन सहज ही उतपन हो जाए। तो आपका वह कर्म एक दुष्कर्म या नकारात्मक कर्म कहलाया जाता है।

यहाँ से हम जानेंगे सत्यकर्म एव दुष्कर्म या नकारात्मक कर्म के मध्य अंतर क्या होता है?

1) सर्वप्रथम सत्यकर्म का एक लघु परिचय निचे अंकित किया गया है।

👉 आपके जिस कर्म के द्वारा आपके व्यक्तिव का एक सकारात्मक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक विकास सहज ही हो जाए। वह सर्वथा ही सत्यकर्म कहलाने योग्य होता है।

2) दुष्कर्म या नकरात्मक कर्म का एक लघु परिचय नीचे अंकित किया गया है।

👉 इसके विपरीत आपके जिस कर्म से आपके व्यक्तिव का चरित्र हनन सहज ही हो जाए एवं जो कर्म हर अवस्था मे असमाजिक एवं सभ्य व्यक्तियों के मध्य सवीकार करने योग्य ना हो वह सर्वथा ही दुष्कर्म या नकरात्मक कर्म ही कहलाने योग्य होता है।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
1/08/2019 at 8:32 pm
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यदि उपरोक्त लघु अनुछेद व्यख्या के संदर्भ में आपकी कोई भी एक शंखा हो तो आप कमेंट बॉक्स में अपनी उपस्थिति अपनी दुविधा के साथ दर्ज कराए। यथासंभव आपकी हर शंखा का निवारण अवश्य किया जाएगा।

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