दर्द जिंदगी का जब हर हद को पार कर जाएगा, ये दीवाना गीत मोहब्बत के तब भी गुनगुनाएगा।

भुला कर हर बेरुखिया ए मोहब्बत जो सितम उनका, हर दर्द ए जिंदगी ये दीवाना सीने से अपने तब लगाएगा।।

मिटते हर निसान जिंदगी के जब सिमट कर मिट जाएंगे, बुझते हर चिरागों को रोशनी ये दीवाना कोई तब दे जाएगा।

हर आरज़ू एक ख़्वाब जिंदगी का जिंदगी से जब रूठ जाएगा, कदम खामोशियों से ये दीवाना ख़ामोशी से ख़ामोश तब हो जाएगा।।

वो जो मसीहा समझते है खुद को सितमगर मुकदर का हमारे, वक़्त एक रोज़ आईना ए हक़ीक़त उन्हें नज़दीक से दिखाएगा।

कत्ल ए एहसासों का करते है बेक़दरी से जो सरेराह वो हमारे, वक़्त लेगा इंतकाम एक रोज ख़ुद उनसे, हर गुनाह उनका उनके जब सामने आजाएगा।।

मुर्दा एहसासों से जिनकी रूह हो गई है मुर्दा, ख़ामोश एहसासों से जिनके पत्थर से एहसास।

दर्द जिंदगी का कर देगा जिंदा उनको हमारा, चीख पड़ेंगे खामोश पत्थर से उनके हर एहसास।।

विक्रांत राजलीवालPhoto_1564922896758 द्वारा लिखित।
04/08/2019 at 6:30 pm

Advertisements

Leave a Reply