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💌 सक्रिय ब्लॉग “दास्ताँ” एवं तथ्य। 🌹✍️

💌 सक्रिय ब्लॉग “दास्ताँ” एवं तथ्य। 🌹✍️

मैंने यानी कि विक्रांत राजलीवाल ने वर्ष 2015 अक्टूबर में हम सब के सभ्य समाज के जटिल और कठोर होते सम्सजिक ढांचे एवं मानवता के प्रति जटिल एवं कठोर होते भाव व्यवहारों पर अपनी 25 अति संवेदनशील कविताओं के द्वारा एक प्रहार करने का एक प्रयास किया था। जिसका एकत्रित रूप मैने पुस्तक एहसास द्वारा Sanyog प्रकाशन घर शहादरा द्वारा प्रकाशित करवाया था। एव जिसका प्रदर्शन वर्ष 2016 के दिल्ली विश्व पुरतक मेला में भी किया गया था।

इसके साथ ही मैंने उसी वर्ष 2015 अक्टूबर से जनवरी 2016 में अपनी प्रथम पुस्तक एहसास के प्रकाशन के दौरान कुछ अत्यंत दर्दभरी शायरी दास्ताँ भी लिखि थी। जिसमे से प्रथम चार नज़म दास्ताँ अत्यधिक विस्तृत एक सम्पूर्ण प्रेम दास्ताँ को अंकित करती है।
1) एक इंतज़ार… महोबत। को मै पहले ही आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित एव YouTube चैनल Vikrant Rajliwal पर अपनी खुद की आवाज़ के साथ रिकार्ड कर के अपलोड कर चुका हूं।

2) एक दीवाना। को जल्द ही प्रकाशित करूँगा।

3) , 4) दास्ताँ भी दर्दवसे भरपूर अत्यंत विस्तृत दास्ताँ है अपने शायद ही अभी मेरी इन शुरुआती चार दस्तानों के जितनी दर्दभरी एवं विस्तृत कोई नज़म दास्ताँ पहले कभी पढ़ी हो। पहली दास्ताँ एक इंतज़ार… महोबत। के प्रकाशन के बाद मेरी दूसरी दर्दभरी नज़म दास्ताँ 2) एक दीवाना। के नाम की सूचना में आपको पहले ही दे चुका हूं। इसके अलावा 3) और 4) संख्या की नज़म दास्ताँ का नाम आपको उचित समय आने पर अवश्य सूचित कर बता दिया जाएगा।

इसके अलावा कुछ छोटी छोटी दस्ताने भी मैंने लिखित थी जिन्हें मैं पहले ही प्रकाशित एव अपनी आवाज़ के साथ रिकार्ड कर अपलोड कर चुका है। उनके नाम इस प्रकार से है कि 5) पहली नज़र 6) पैगाम ए मोहब्बत 7) सितमगर हसीना 8( अक्सर सोचता हूं तन्हा अंधेरी रातो में कई.. 9) एक खेल जिंदगी। 10) धुंधलाता अक्स। इन दर्दभरी दस्तानो बाद मेने कुछ शायरी भी लिखी थी जिन्हें जांचने से पता चला कि यह तो एक नज़म हो गई है जिसके मेने सोशल मीडिया और तीन टुकड़ो में इस प्रकार से प्रकाशित किया 1) मोहब्बत। ( दिख किसी गुलिस्तां में जब भी कोई गुलाब, छूने को पंखुड़ी, लेने को खुशबू …)

2) बेरवा सनम। ( देखा था ख़्वाब कभी दीवाने ने एक)

3) महक ए सनम।( जी रहा है दीवाना याद सनम को करते हुए। मर रहा है बेबसी से नाम ए सनम लेते हुए।।)

🌹👉 उपरोक्त जानकारी आपको बताने का एक ठोस कारण यह है कि आप सभी मेरी प्रकाशित एवं आगामी दर्दभरी दस्तानों के साथ एक करीबी रिश्ता महसूस करते हुए उनसे जुड़ सके। अब जल्द ही अपनी शुरआती दूसरी दर्दभरी नज़म शायरी के रूप में लिखी गई मोहब्बत के दर्द से सरोबार दास्ताँ “एक दीवाना।” को आपके पाठन के लिए प्रकाशित करूँगा।

अब अपने फेसबुक पेज़ Vikrant Rajliwal एव एक अन्य नवीन पेज़ Zindagi Ek Khwaab Hai पेज़ पर मेरा उपनाम Ek Agyat kalam द्वारा जिसका निर्माण मैने क्यों किया इस बात के एहसास को अभी तक मै खुद भी नही जान सका हु। के कुछ शेर सांझा कर रहा हु जिन्हें अभी तक मैं आपके साथ सांझा नही कर सका हु। उम्मीद करता हु आपको पसंद आए।

✍️पेज़ Vikrant Rajliwal पर मेरे वह शेर जिन्हें अपके साथ सांझा ना कर सका इस प्रकार से है कि

वह समझते है कि उन्होंने मेरा क़त्ल कर दिया। कोई बता दे उन्हें जा कर के की अभी साँसे जिंदा है मेरी।

तुम बेशक़ से हो गए हो मुर्दा ए मेरे हम सायों मग़र कुछ उम्मीद अभी भी है बाक़ी तुम्हारे मुर्दा एहसासों में जिंदा जो मेरे एहसासों की गर्मी है।

पूछुंगा एक रोज़ मेरे रब से कि क्यों तूने मुझे हमसफ़र भी बेजान पत्थर से दिए है मुर्दा। जो जिंदा है या मर गए है जीते जी किसे खबर।

बेजान ये एहसास एक रोज़ कर दूंगा जिंदा, जिंदा हर एहसासों की गर्मी अभी बहुत बाकी है कहि जिंदा एहसासों में मेरे।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Follow my personal blog site vikrantrajliwal.com

✍️पेज़ Zindagi Ek Khwaab Hai पर मेरे द्वारा लिखित कुछ शेर रचना इस प्रकार से है जिन्हें एक संग्रह के रूप में आप स ही के पाठन हेतु प्रकाशित कर रहा हु।

1) कभी देखा है ज़िन्दगी को,बेहद हसीन लगती है जैसे कोई हसीं ख़्वाब अधूरा सा कहि रह गया हो।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक अज्ञात कलम के उपनाम से।

2) 💃 ये जो जिंदगी है ना एक कठपुतली है। यहाँ हर एक रिश्ता दूसरे को खींच कर नचा देता है।

थोड़ी सी भी ढ़ील छोड़ो तभी कोई खीच कर डोर जिंदगी की काट देता है।।

क्यों है कि नही प्यारे।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।एक अज्ञात कलम के उपनाम से।
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3) 🌹 उसको शायद आज भी बहुत यक़ीन है ख़ुद पर, नही तो वो क्या कब का बीच राह से लौट ना गया होता।

असर रूह का उसके यक़ीनन रूमानियत भरा ही होगा, हर अल्फ़ाज़ भी तो उसके मदहोश से कर देते है।

हम है कि आज भी इम्तेहां बेदर्दी से उसके एहसासों का एक इम्तेहां आज भी जो लेते है।

और वो है कि हमे फिर भी अपना महबूब कहता है शायद उसे आज भी इंतज़ार है किसी की मोहब्बत का, वर्ना तो कौन हम जैसे संगदिलों पर बहा कर अश्क़ अपने जाया करता है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक अज्ञात कलम के उवणं से।
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4) हवाओं के रुक जाने से सांसे रुक सकती है मग़र जो वो रुक जाए तो जिंदगी रुक सी जाती है।

Hawaon ke ruk jaane se sanse ruk shakti hai magar jo wo ruk jaae toh zindagi ruk si jati hai.

वो ख़ुदा तो नही फ़क़त कई मासूमो को एक ख़्वाब जिंदगी का जिंदगी को जीने के लिए दे जरूर सकता है।

Wo khudaa to nahin fakat kai masumo ko ek khwaab zindagi ka zindagi ko jine ke liye de jarur sakta hai.

यह वो नही उसका रूहानी कोई एक एहसास बोलता है। उसका दिलो को जीत लेने का एक हुनर कोई दिलकश बोलता है।

Yeh wo nahi uaska ruhani koi ek ehsaas bolta hai. Uska dilon ko jeet lene ka ek hunar koi dil kash bolta hai.

तबाह ये दुनियां बेईमान ही सही, क़यामत से खुद ही अनजान जो सही। फ़क़त वो आज भी देखता है ख़्वाब जिंदगी का मासूम मासूमो के लिए, लहू सींचती कलम और बर्बाद ख्वाहिशें साथ लिए।

Tabah ye duniyaa beimaan hi sahi, kayamat se khud hi anjaan jo sahi, fakat wo aaj bhi dekhta hai khwaab zindagi ka masum masumo ke liye, lahu seechti kalam orr barbaad khwahishen sath liye.

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक अज्ञात कलम के उवणं से।
#VR

5) वो आज भी नही समझा कि उसे कितने दिल अपनी धड़कनो को थामे हुए समझने लगे है।

Wo aaj bhi nahin samjha ki use kitane dil apani dhadkano ko Thame huee samjhane lage hai.

देखो ना वो आज भी उन्ही से महोबत करता है हर लम्हा ही जिन्होंने उसकी हर धड़कती धड़कनो को तोड़ने की कोशिश करि है, देखो ना वो आज भी…

Dekho na wo aaj bhi unhin se mohabbat karta hai, har lamha hi jinhone usaki har dhadakti dharkano ko todane ki koshish kari hai, dekho na wo aaj bhi…

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक अज्ञात कलम के उपनाम से।

Ek agyat kalam dwara likhit

#VR

6) 💞 कहि कुछ छूट सा रहा है शायद कहि कुछ टूट सा रहा है। ए जिंदगी कहि ये मेरा ख़्वाब तो नही, ए जिंदगी कहि ये मेरा ख़्वाब तो नही…जो अब कहि छूट सा रहा है पूरा होने से पहले ही जो बेदर्दी से टूट रहा है।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक अज्ञात कलम के उवणं से ✍️ #VR

💞 Kahi kuch chutt sa rha hai shayad kahi kuch tut sa rha hai. e zindagi Kahi ye mera khwaab to nahi, e zindagi kahi ye mera khwaab to nahi…Jo ab kahi chutt sa rha hai pura hone se pahale hi jo bedardi se tut rha hai..

Ek Agyat Kalam Dwara Likhit. ✍️ #VR

#VR

यह थे वह कुछ शेर जिन्हें मेने फेसबुक पर प्रकाशित किया था अब आपके लिए एक संग्रह के रूप में प्रकाशित कर रहा हु।

🌹👉 अंत में मैं यानी कि आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल आपको यक़ीन देता हूं कि मेरी आगामी दर्दभरी नज़म दास्ताँ “एक दीवाना” को पढ़ कर आप को हक़ीक़त में एक रूमानी शायरी एक दर्द ए महोबत का एहसास जरूर हो जाएगा।
इसी एक यकीन के साथ कि मैं आपके पाठन करने के लिए “एक दीवाना।” को जल्द ही आपकी अपनी इस बल8ग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित कर सकु।

शुक्रिया।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
08/08/2019 at 9:35 pm

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Published by Voice Of Vikrant Rajliwal ( My Writing, My Blogs & My Voice)

💥Spiritual communicator, Motivational Speaker, Author, Writer, Poet And Thinker. विक्रांत राजलीवाल। (समाजिक कार्यकर्ता, कवि, शायर, नज़्मकार, ग़ज़लकार, गीतकार, व्यंग्यकार, लेखक एव नाटककार-कहानीकार-सँवादकार) 1) एहसास प्रकाशित पुस्तक (published Book) : अत्यधिक संवेदनशील काव्य पुस्तक एहसास, जिसका केंद्र बिंदु हम सब के असंवेदनशील होते जा रहे सभ्य समाज पर अपनी काव्य और कविताओं के द्वारा एक प्रहार का प्रयास मात्र है। Sanyog (संयोग) प्रकाशन घर शहादरा द्वारा प्रकाशित एव ए वन मुद्रक द्वरा प्रिंटिड। प्रकाशन वर्ष जनवरी 2016. प्रकाशित मूल्य 250:00₹ मात्र। 2) My Site: Vikrant Rajliwal Url address: vikrantrajliwal.com वर्ष 2016-17 से अब तक सैकड़ो दर्दभरी नज़्म, ग़ज़ल, बहुत सी काव्य-कविताए एव कुछ व्यंग्य किस्से, कुछ एक गीतों के साथ बहुत से विस्तृत समाजिक, आध्यात्मिक एव मनोवैज्ञानिक लेखों के साथ कई प्रकार के सामाजिक एव आध्यात्मिक विचार लिख कर अपनी साइट पर प्रकाशित कर चुके है। एव दिनप्रतिदिन कॉप्के प्रेमस्वरूप नित्य नई रचनाओँ का लेखन एव प्रकाशन जारी है। एवं स्वम् की कई नज़्म कविताओं एव लेखों का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद कर चुके है। 3) Youtube channel: Vikrant Rajliwal पर मेरे द्वारा लिखित मेरी समस्त रचनाओँ जैसे प्रकाशित पुस्तक एहसास से अति संवेदनशील काव्य- कविताए, और मेरी निजी लेखनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित मेरी सैकड़ो नज़्म, ग़ज़ल और बहुत सी काव्य, कविताओँ एव्यंग्य किस्सों को मेरे स्वयं के स्वरों के साथ देखने और सुनने के लिए मेरे YouTube चैनल को अभी Subscribe कीजिए। 👉 आगामी रचनाएँ (Upcoming Creation's) : अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर सक्रिय अति विस्तृत दर्दभरी नज़्म दास्ताँ श्रृंखला "दास्ताँ" के अंतर्गत चौथी एवं अब तक लिखी गई अंतिम अति विस्तृत दर्दभरी नज़्म दास्ताँ "मासूम मोहब्ब्त" प्रकाशित करि जाएगी। जल्द ही अपनी ब्लॉग साइट vikranrajliwal.com पर अपनी कुछ लघु कहानियों का प्रकाशन का कार्य प्रारंभ करूँगा। 👉 साथ ही मैं वर्ष 2016 से एक अत्यंत ही दर्दभरा जीवन के हर रंग को प्रस्तुत करती एक सामाजिक कहानी, एक नाटक पर कार्य कर रहा हु। 💥 इसके साथ ही शायद आप मे से बहुत से महानुभव इस बात से परिचित नही होंगे कि मैं आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल वर्ष 2003-04 से नशे से पीड़ित मासूम व्यक्तियों के लिए निःस्वार्थ भाव से सेवा करता आ रहा हु एव स्वम भी कई प्रकार के जटिल उतार चढ़ाव के उपरांत एक शुद्ध रिकवरी को प्राप्त कर सका हु। यदि आप मुशायरे या कवि सम्मेलन के आयोजक है और आप मेरी सैकड़ो दर्दभरी नज़्म ग़ज़ल शायरी या काव्य कविताओं के द्वारा मेरे कार्यक्रम को बुक करते है तो यकीन मानिए इस प्रकार से आप अपना एक अनमोल योगदान उन मासूमो के लिए सहज ही प्रदान कर सकते है। क्योंकि मेरी कला के कार्यक्रम से होने वाली 100% कमाई नशे से पीड़ित उन गरीब एव बेबस मासूमो के इलाज लिए समर्पित होगी। जिन्होंने अपना जीवन जीने से पूर्व ही नशे के आदि बन कर बर्बाद करना शुरू कर दिया है या बर्बाद कर चुके है। 😇 समाज सेवा: स्वमसेवी नशामुक्ति कार्यक्रम के तहत नशे की गिरफ्त में फंसे नवयुवको एवं व्यक्तियों को एक स्वास्थ्य जीवन को जीने के लिए प्रेरित करता आ रहा हु। स्वमसेवी संस्थाओं एवं स्वयम से जन सम्पर्को के माध्यम द्वारा निशुल्क सेवा भाव से वर्ष 2003 से अब तक। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। मेरासंपर्क सूत्र नीचे अंकित है। My Whatsapp no: 91+9354948135 (Translated) One service and one collaboration Hello Friends, Many of you may not be familiar with the greatness that I have been serving my self-indigenous friends Vikrant Rajliwal with selfless service for innocent people who have been suffering from intoxicants since 2003-04. After a complex fluctuation of type, I could get a pure recovery. And if you are the organizer of mushere or poet conference or you can book my program with my hundreds of painful najm ghazal shayari or poetic poems and also in your program, believe that in this way you have a valuable contribution They can easily provide for those innocent people. Because 100% earnings from my program will be dedicated to the treatment of those poor and unemployed innocent people who have started wasting or wasted by becoming addicted to drugs before living their lives. Name: Vikrant Rajliwal Published book: एहसास (a highly sensitive poetic book inspired by social and humanitarian values) published by Sanyog publication house shahdara. Which was also showcased at the Delhi World Book Fair in the same year 2016. 🎤 Upcoming creations: The story of my fourth and last nazam tales written so far. And a play, a painful story presenting every run of life. 😇 Social service: Swamsevy has been promoting the life of the youth and all the people trapped under the influence of intoxicants as a drug addiction program. Free service charges through Swamsevy institutions from 2003 till now. Thank you Vikrant Rajliwal Hometown: Delhi. The contact form is displayed below. My Whatsapp no: 91 + 9354948135 प्रिय पाठकों एव मित्रजनों, यह है अब तक का मेरे द्वारा सम्पन्न एव आगामी लेखन कार्य, जो आप सभी प्रियजनों के प्रेम एव आशीर्वाद से शीघ्र अति शीघ्र ही सम्म्प्न हो अपने वास्तविक स्वरूप को प्राप्त हो जाएगा। आप सभी प्रियजन अपना प्रेम एव आशीर्वाद अपने रचनाकार मित्र विक्रांत राजलीवाल पर ऐसे ही बनाए रखे। धन्यवाद। विक्रांत राजलीवाल।

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