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💥 VIKRANTRAJLIWAL.COM AND MY SPIRITUAL PROGRAM (NA) ✍️

In the last few days, some inspirational ideas and articles written by my pen on various platforms of social media to promote my blog site vikrantrajliwal.com and my spiritual program.

बीते कुछ दिवसों में अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com एवं अपने आध्यात्मिक कार्यक्रम के प्रचार प्रसार हेतु सोशल मीडिया के अनेक मंचो पर मेरी कलम के द्वारा लिखे गए कुछ प्रेरणदायक विचार एव लेख।

💥 मित्रों जीवन को जीना है तो अपनो के प्रति अपने सच्चे मित्रों के प्रति हर प्रकार कि दुर्भावनाओं को अपनी ठोकर से मार कर कुचल दीजिए।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

मेरी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com को फॉलो कीजिए।

Translated

💥 Friends, if you want to live your life, then you can crush all kinds of maliciousness towards yourself and your true friends by crushing them with your feet.

Written by Vikrant Rajliwal.

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💥
भृम है आँखों पर आपका जो आपके अपनो के प्रति कठोर हर भाव हर व्यवहार को दर्शाता है।

क्योंकि कभी जो दिखता एवं महसूस होता है वो सत्य से विपरीत आपका भृम भी हो सकता है।

ज्ञान और अज्ञान के बीच भृम की अत्यंत ही महीन परत होती है। जिसे कोई उचित ज्ञान का जानकर एवं एक दिव्य ज्ञान से शुशोभित ज्ञानी व्यक्ति ही आपके जीवन से मिटाते हुए, आपको एक दिव्य ज्ञान एव दिव्य प्रकाश को महसूस करने का एक अलौकिक अनुभव प्रदान कर सकता है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित सत्य अनुभवो से प्ररित।

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Translated

💥
The ignorance that you have on your eyes reflects your hard feelings and every harsh behavior towards your loved ones.

Because sometimes what you see and feel can be your ignorance contrary to the truth.

There is a very thin layer of misunderstanding between knowledge and ignorance. Whom a person knowing with proper knowledge and a knowledgeable person of divine knowledge can erase from your life, giving you a divine knowledge and a supernatural experience of feeling divine light.

Inspired by true experiences written by Vikrant Rajliwala

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💥 सुप्रभात मित्रों।

यदि आप अपने से श्रेष्ठ अनुभवों के व्यक्तियों का एवं उनके निःस्वार्थ भाव से किए हुए कार्यो का सम्मान नही करते है। तो वास्तव में आप स्वयं का, स्वयं के व्यक्तित्व का भी सम्मान नही करते है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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💥 Good Morning Friends.

If you do not respect the people with best experiences than you and the work done by them selflessly. So in reality you do not respect yourself, your personality also.

Written by Vikrant Rajliwal.

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💥 मित्रों जीवन को जीना है तो अपनो के प्रति अपने सच्चे मित्रों के प्रति हर प्रकार कि दुर्भावनाओं को अपनी ठोकर से मार कर कुचल दीजिए।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Translated

💥 Friends, if you want to live your life, then you can crush all kinds of maliciousness towards yourself and your true friends by crushing them with your feet.

Written by Vikrant Rajliwal.

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💥
भृम है आँखों पर आपका जो आपके अपनो के प्रति कठोर हर भाव हर व्यवहार को दर्शाता है।

क्योंकि कभी जो दिखता एवं महसूस होता है वो सत्य से विपरीत आपका भृम भी हो सकता है।

ज्ञान और अज्ञान के बीच भृम की अत्यंत ही महीन परत होती है। जिसे कोई उचित ज्ञान का जानकर एवं एक दिव्य ज्ञान से शुशोभित ज्ञानी व्यक्ति ही आपके जीवन से मिटाते हुए, आपको एक दिव्य ज्ञान एव दिव्य प्रकाश को महसूस करने का एक अलौकिक अनुभव प्रदान कर सकता है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित सत्य अनुभवो से प्ररित।

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Translated

💥
The ignorance that you have on your eyes reflects your hard feelings and every harsh behavior towards your loved ones.

Because sometimes what you see and feel can be your ignorance contrary to the truth.

There is a very thin layer of misunderstanding between knowledge and ignorance. Whom a person knowing with proper knowledge and a knowledgeable person of divine knowledge can erase from your life, giving you a divine knowledge and a supernatural experience of feeling divine light.

Inspired by true experiences written by Vikrant Rajliwala

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💥 इस स्वार्थी संसार मे किसी भी भाव व्यवहार की अपनी ओर से पहल करना इस सृष्टि के प्रारम्भ से ही अत्यंत जटिल एवं कठिन भाव व्यवहार रहा है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Translated

💥 Taking initiative on behalf of any behavior in this selfish world has been a very complex and difficult behavior since the beginning of this creation.

Written by Vikrant Rajliwala

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💥
ऐसा क्यों?

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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💥
Why is this?

Written by Vikrant Rajaliwal.

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💥
क्योंकि हम मनुष्य इस सृष्टि के प्रारम्भ से ही प्रत्येक नवीन विचार एवं व्यवहार के द्वारा एक अनजाने भय से भयभीत होते आए है। और उन्हें अपनाने या समझने के विचार मात्र से ही हमारा हलक सुख कर बैठ जाता है और हमारी व्याकुल आत्मा स्वयं के व्यक्तिव में परिवर्तन की आशंका मात्र से काँप जाती है। चाहे वह परिवर्तन सकरात्मक ही क्यों न हो।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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💥
Because we humans have been afraid of an unintentional fear from the beginning of this creation through every new thought and behavior. And with the thought of adopting or understanding new ideas and practices, our throat gets dry and our distraught soul is shaken by the possibility of change in our personality. Even if that change is positive.

Written by Vikrant Rajliwala.

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💥
आज जमाना बदल गया है मित्रों, अब किसी भी लेखक कलाकार, कवि, एवं शायर को किसी भी घमंड से चूर अत्यचारी के समक्ष अपनी चप्पलें घिसते हुए अपने आत्मसम्मान को स्वयं अपने ही हाथो क़त्ल करते हुए किसी भी घमंड से चूर अत्यचारी के समक्ष अपनी कला को जीवित रखने हेतु झुकने की कतई भी आवश्यकता नही है।

आज ईष्वर की कृप्या से इंटरनेट जिंदाबाद है और अनेकों ऑनलाइन मंच है जहाँ से आप अपनी कला का प्रदर्शन जारी रखते हुए एक आत्मसम्मान के साथ अपनी कला को जीवित रख सकते है।

हो सकता है इसमें आपको कामयाब होने में एक अरसा भी लग जाए, परन्तु मैं विक्रांत राजलीवाल आपको विशवास देता हूं कि उस एक अरसे के बाद भी आप एक बादशाह के सम्मान ही स्वयं के आत्मसम्मान की रक्षा करते हुए खुद को सम्मानित महसूस कर सकेंगे। मुझ को यकीन है आपको तो यकीन है ना!

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Translated

💥
Today, the time has changed, friends, now any writer, artist, poet and poet is not required to bow down to keep his art alive by killing his own self-esteem in front of an arrogant person.

Today, due to the kindness of God, the Internet is alive and there are many online forums from which you can continue to showcase your art and keep your art alive with a self respect.

It may take you an time to succeed in this, but I mean that your friend Vikrant Rajliwal gives the assurance to all of you that even after that one time you will protect your self-respect like a king. Will be able to feel honored. I’m sure are you sure?

Written by Vikrant Rajliwala

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#curruption #Literature #System #भृष्ट #साहित्यिक #व्यवस्था #इंटरनेट #internet #poetry #Shayari #Vikrant #Rajliwal #freedom #wisdom

💥 सुप्रभात मित्रों,

जीवन का एक अचूक मन्त्र है यही तंत्र है कि हम अपने जीवन के प्रत्येक क्षण व्यस्त रहे, व्यवस्त रहे एवं स्वच्छता को अपनाते हुए प्रभु की मस्ती में मस्त रहे।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Translated

💥 Good morning friends

There is an unmistakable mantra of life, this is the system that we remain busy at every moment of our life, stay busy in the joy of God while adopting cleanliness.

Written by Vikrant Rajliwala

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💥आपने आपके अपनो को हानिकारक व्यसनो की चपेट में एक बीमार व्यक्ति के सामान तड़पते देखा है।

पर क्या आपको यह ज्ञात है कि वह वास्तव में एक बीमार व्यक्ति ही है जिसका उपचार केवल आध्यात्मिक कार्यक्रम के तहत कुछ गिने चुने जानकर व्यक्तियों के द्वारा ही सम्भव है।

जरा कुछ क्षण स्वयं के चित्त को शांत रखते हुए एक बार पुनः विचार कीजिए।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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You have seen your loved ones suffering like a sick person in the grip of harmful addictions.

  But do you know that he is really a sick person whose treatment is possible only by a few people knowing that under the spiritual program.

  Just think again, keeping yourself calm for a few moments.

  Written by Vikrant Rajliwala

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इस संसार मे कुछ व्यक्तियों को इंकलाब की बोली ही समझ मे आती है। उनसे आप कितना ही विन्रम क्यों ना हो जाए परन्तु वो आपको निर्जीव समझते हुए आपकी हर विन्रमता को नकारते हुए आपके व्यक्तिव को गारेंटिड लेने से बाज नही आते।

ऐसे ही व्यक्तियों के लिए मैं यानी कि विक्रांत राजलीवाल आज सरेआम अपने इस फेसबुक के पेज़ से अपने हज़ारो फॉलोवर्स मित्रों को साक्षी मानते हुए कहता हूं कि आप बाज़ आ जाए कहि ऐसा ना हो सच्चाई का दिव्य प्रकाश आपकी मलिन आत्मा को जिंदा ही ना भस्म कर दे।

स्मरण रहें जब जब उस संसार से किसी सच्चे व्यक्तिव ने इस संसार के किसी भी भाग से इंकलाब किया है तब तब जन जागृति क्रान्तियों का एक सैलाब उमड़ा है। फिर चाहे आप स्वयं को कितना ही सभ्य साबित करने का प्रयत्न क्यों ना करें। परन्तु जब अध्यात्म की बुलन्द आवाज़ के साथ इंकलाब हुआ है तब हर सभ्य चेहरों से उनका सभ्य होने का नक़ाब सच्चाई की एक हुंकार मात्र से खण्ड खण्ड हुआ है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Vikrant Rajliwal
(Recovery Addict)
Author, Writer, Poet, Dramatist, Spiritual Thinker And Writer.

💥
इस मनुष्य जीवन मे आप अपने व्यक्तिव में एक सकरात्मक परिवर्तन रातो रात या अकस्मात ही उप्पन नही कर सकते। इसके लिए आपको एक योग्य मार्गदर्शक की अति आवश्यकता जीवन के पग पग पर हर कदम पर अवश्य महसूस होती रहेगी।

क्यों कि आज आप जिस जटिल समाजिक स्थितियों का सामना कर रहे है वह जटिल स्थितियां या गम्भीर समस्याएं भी रातो रात या अकस्मात ही आपके जीवन मे प्रवेश नही कर सकी है।

इसीलिए उनके समाधान हेतु आपको एक योग्य गुरु एव ज्ञानी मार्गदर्शक के अंतर्गत एक गहन चिंतन एवं एक उचित जीवन प्रणाली को समझना एव अपनाना ही होगा।

आपका मित्र विक्रांत राजलीवाल।
(रिकवरी एडिक्ट)

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Vikrant Rajliwal
(Recovery Addict)
Author, Writer, Poet, Dramatist, Spiritual Thinker And Writer

💥
In this human life, you cannot achieve a positive change in your personality in the night or accidentally. For this, you will definitely feel the need of a qualified guide at every step on the path of life.

Because the complex social situations you are facing today, even complex situations or serious problems could not enter your life overnight or accidentally.

That is why you have to understand and adopt a deep thinking and a proper life system under a qualified guru and knowledgeable guide to solve them.

Your friend Vikrant Rajliwal.
(Recovery Addict)

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💥
एक निर्जीव होता या निष्क्रिय होता वृक्ष (घर, परिवार या कोई संस्था) जब एक दिव्य उजाले की दिव्य ऊर्जा से स्वयं की निष्प्राण होती शाखाओं की जीवन धारा में कोई भी जीवन प्राण रूपी ऊर्जा प्रदान करने हेतु कोई भी प्रयास ना करे तो ज्ञात रहे उसका अंत अब निच्छित है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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#Narcotics #Anonymous #Programme #Recovery #Life #Vikrant #Rajliwal #Experience

Translated

💥
A tree that is a lifeless ( Home, Family and Institution) or a tree lying dormant, when one does not make any effort to provide life-like energy in the life stream of the branches, which is self-sacrificed by the divine energy of a divine light, then its end is now certain.

Written by Vikrant Rajliwal.
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#Narcotics #Anonymous #Programme #Recovery #Life #Vikrant #Rajliwal #Experience

💥
आज मै यानी कि अपनी अंतरात्मा से एक अध्यात्म प्रोग्राम का फालोवर एक रिकवरी एडिक्ट विक्रांत राजलीवाल अपने इस फ़ेसबुक पेज़ के इन चंद गिने चुने से मेरे ह्रदय अज़ीज़ फॉलोवर्स समेत इस संसार के प्रत्येक उस एडिक्ट के लिए जो आज भी किसी ना किसी हानिकारक व्यसन की चपेट में एक अशांत जीवन जीने को मजबूर है के लिए उनकी आत्मा के शांति के लिए अपनी उच्च शक्ति उस परमपिता परमेश्वर से एक आत्मशांति की प्रार्थना करता हु। ईष्वर हम हम की आत्मा को एक आत्मशांति प्रदान करने की कृपया करे।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल।
(रिकवरी एडिक्ट)

मेरी सेवा का लाभ प्राप्त करने हेतु वट्सअप के जरिए सम्पर्क कीजिए। जी इस पेज पर अंकित है।

#NA #Programme #Vikrant #Rajliwal #HaiPower

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Thank You.

Written By

Vikrant Rajliwal

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Published by Voice Of Vikrant Rajliwal ( My Writing, My Blogs & My Voice)

💥Spiritual communicator, Motivational Speaker, Author, Writer, Poet And Thinker. विक्रांत राजलीवाल। (समाजिक कार्यकर्ता, कवि, शायर, नज़्मकार, ग़ज़लकार, गीतकार, व्यंग्यकार, लेखक एव नाटककार-कहानीकार-सँवादकार) 1) एहसास प्रकाशित पुस्तक (published Book) : अत्यधिक संवेदनशील काव्य पुस्तक एहसास, जिसका केंद्र बिंदु हम सब के असंवेदनशील होते जा रहे सभ्य समाज पर अपनी काव्य और कविताओं के द्वारा एक प्रहार का प्रयास मात्र है। Sanyog (संयोग) प्रकाशन घर शहादरा द्वारा प्रकाशित एव ए वन मुद्रक द्वरा प्रिंटिड। प्रकाशन वर्ष जनवरी 2016. प्रकाशित मूल्य 250:00₹ मात्र। 2) My Site: Vikrant Rajliwal Url address: vikrantrajliwal.com वर्ष 2016-17 से अब तक सैकड़ो दर्दभरी नज़्म, ग़ज़ल, बहुत सी काव्य-कविताए एव कुछ व्यंग्य किस्से, कुछ एक गीतों के साथ बहुत से विस्तृत समाजिक, आध्यात्मिक एव मनोवैज्ञानिक लेखों के साथ कई प्रकार के सामाजिक एव आध्यात्मिक विचार लिख कर अपनी साइट पर प्रकाशित कर चुके है। एव दिनप्रतिदिन कॉप्के प्रेमस्वरूप नित्य नई रचनाओँ का लेखन एव प्रकाशन जारी है। एवं स्वम् की कई नज़्म कविताओं एव लेखों का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद कर चुके है। 3) Youtube channel: Vikrant Rajliwal पर मेरे द्वारा लिखित मेरी समस्त रचनाओँ जैसे प्रकाशित पुस्तक एहसास से अति संवेदनशील काव्य- कविताए, और मेरी निजी लेखनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित मेरी सैकड़ो नज़्म, ग़ज़ल और बहुत सी काव्य, कविताओँ एव्यंग्य किस्सों को मेरे स्वयं के स्वरों के साथ देखने और सुनने के लिए मेरे YouTube चैनल को अभी Subscribe कीजिए। 👉 आगामी रचनाएँ (Upcoming Creation's) : अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर सक्रिय अति विस्तृत दर्दभरी नज़्म दास्ताँ श्रृंखला "दास्ताँ" के अंतर्गत चौथी एवं अब तक लिखी गई अंतिम अति विस्तृत दर्दभरी नज़्म दास्ताँ "मासूम मोहब्ब्त" प्रकाशित करि जाएगी। जल्द ही अपनी ब्लॉग साइट vikranrajliwal.com पर अपनी कुछ लघु कहानियों का प्रकाशन का कार्य प्रारंभ करूँगा। 👉 साथ ही मैं वर्ष 2016 से एक अत्यंत ही दर्दभरा जीवन के हर रंग को प्रस्तुत करती एक सामाजिक कहानी, एक नाटक पर कार्य कर रहा हु। 💥 इसके साथ ही शायद आप मे से बहुत से महानुभव इस बात से परिचित नही होंगे कि मैं आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल वर्ष 2003-04 से नशे से पीड़ित मासूम व्यक्तियों के लिए निःस्वार्थ भाव से सेवा करता आ रहा हु एव स्वम भी कई प्रकार के जटिल उतार चढ़ाव के उपरांत एक शुद्ध रिकवरी को प्राप्त कर सका हु। यदि आप मुशायरे या कवि सम्मेलन के आयोजक है और आप मेरी सैकड़ो दर्दभरी नज़्म ग़ज़ल शायरी या काव्य कविताओं के द्वारा मेरे कार्यक्रम को बुक करते है तो यकीन मानिए इस प्रकार से आप अपना एक अनमोल योगदान उन मासूमो के लिए सहज ही प्रदान कर सकते है। क्योंकि मेरी कला के कार्यक्रम से होने वाली 100% कमाई नशे से पीड़ित उन गरीब एव बेबस मासूमो के इलाज लिए समर्पित होगी। जिन्होंने अपना जीवन जीने से पूर्व ही नशे के आदि बन कर बर्बाद करना शुरू कर दिया है या बर्बाद कर चुके है। 😇 समाज सेवा: स्वमसेवी नशामुक्ति कार्यक्रम के तहत नशे की गिरफ्त में फंसे नवयुवको एवं व्यक्तियों को एक स्वास्थ्य जीवन को जीने के लिए प्रेरित करता आ रहा हु। स्वमसेवी संस्थाओं एवं स्वयम से जन सम्पर्को के माध्यम द्वारा निशुल्क सेवा भाव से वर्ष 2003 से अब तक। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। मेरासंपर्क सूत्र नीचे अंकित है। My Whatsapp no: 91+9354948135 (Translated) One service and one collaboration Hello Friends, Many of you may not be familiar with the greatness that I have been serving my self-indigenous friends Vikrant Rajliwal with selfless service for innocent people who have been suffering from intoxicants since 2003-04. After a complex fluctuation of type, I could get a pure recovery. And if you are the organizer of mushere or poet conference or you can book my program with my hundreds of painful najm ghazal shayari or poetic poems and also in your program, believe that in this way you have a valuable contribution They can easily provide for those innocent people. Because 100% earnings from my program will be dedicated to the treatment of those poor and unemployed innocent people who have started wasting or wasted by becoming addicted to drugs before living their lives. Name: Vikrant Rajliwal Published book: एहसास (a highly sensitive poetic book inspired by social and humanitarian values) published by Sanyog publication house shahdara. Which was also showcased at the Delhi World Book Fair in the same year 2016. 🎤 Upcoming creations: The story of my fourth and last nazam tales written so far. And a play, a painful story presenting every run of life. 😇 Social service: Swamsevy has been promoting the life of the youth and all the people trapped under the influence of intoxicants as a drug addiction program. Free service charges through Swamsevy institutions from 2003 till now. Thank you Vikrant Rajliwal Hometown: Delhi. The contact form is displayed below. My Whatsapp no: 91 + 9354948135 प्रिय पाठकों एव मित्रजनों, यह है अब तक का मेरे द्वारा सम्पन्न एव आगामी लेखन कार्य, जो आप सभी प्रियजनों के प्रेम एव आशीर्वाद से शीघ्र अति शीघ्र ही सम्म्प्न हो अपने वास्तविक स्वरूप को प्राप्त हो जाएगा। आप सभी प्रियजन अपना प्रेम एव आशीर्वाद अपने रचनाकार मित्र विक्रांत राजलीवाल पर ऐसे ही बनाए रखे। धन्यवाद। विक्रांत राजलीवाल।

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