अब आगे…

और मैं दरवाजा खोल देता हूँ। उस समय पुड़िया के सरूर में मुझ को ठीक से कुछ समझ में नही आ रहा था। हा फिर भी इतना अवश्य याद है कि शायद मैं दरवाज़ा खोल कर वापस उसी खिड़की के समीप आ कर खड़ा हो जाता हूं और अब भी वहा मौजूद उस पुड़िया की सुलगती सिगरेट को बुझा कर बाहर फेंक देता हूं। हा याद है उसके बाद मेरे समीप मेरे पापा के दो मित्र, जिन्हें मैं अच्छे से जानता था आ कर खड़े हो जाते है। और कुछ मुस्कुराते हुए मुझ से पूछते है कि यहाँ तो अज़ीब सा धुंआ है। इसके उत्तर में मैं भी मुस्कुरा कर उनसे सहमत हो जाता हूं।

ठीक उसी समय वह मुझ से कहते है कि आज पार्टी है विश्कि (मदरिया) पीएंगे। उनके मुंह से यह सुनते ही मेरा माथा कुछ ठनक जाता है और एक अजीब सी बैचेनी होने लगती है। पता नही क्यों? शायद मुझ को उनसे ऐसी किसी बात की कोई उम्मीद ना थी इसीलिए। फिर एक ख्याल आता है कि कहि कुछ तो गड़बड़ है पर उस समय तनिक भर भी एहसास नही हो सका कि आखिर क्या गड़बड़ हो सकती है। फिर भी अपनी उस बेचैनी को रोकते हुए मैं उनसे कहता हूं कि अंकल क्या मैं अपने पापा से बात कर लूं क्यों कि क्वाटर पर मेरे सिवाय कोई भी परिवार का सदस्य उस समय वहाँ मौजूद नही है। मेरे मुंह से इतना सुनते ही वह तुरंत पापा को मोबाइल से कॉल कर देते है और मेरे पापा भी अपनी सहमति दे देते है कि ठीक है पार्टी कर लो। उसके बाद वह मुझ को शायद जूते दिखाते हुए पूछते है कि यह किसके है उनके पास अपने नए जूते देख कर मेरा सरूर कुछ हलका हो जाता है। और मुझ को स्मरण होता है कि शायद मैं पुड़िया के सरूर में मंडी (एशिया की सबसे बड़ी फल एवं सब्जी मंडी) से सीधे अपने पुलिसिया क्वाटर पर आने की बजाए अपने रक्त सम्बंधित रिश्तेदार (ताऊ जी) के घर चला गया था और वहाँ अपने नए जूते छोड़ कर एक फ़टे पुराने चिथड़े के समान जूतों को पहन कर पुड़िया के सरूर में पुलिसिया क्वाटर पर आया था। अभी मैं यह सब कुछ सोच ही रहा था कि तभी उनमे से एक अंकल कहते है कि यह अपने जूते पहन लो फिर पार्टी करते है। परन्तु मैं उनसे कहता हूं कि यह मेरे जूते नही है यह फ़टे चिथड़े वाले जूते ही मेरे है और अब चलते है पार्टी करने को, पापा ने भी इजाज़त प्रदान कर दी है। और मैं अपने उस पुलिसिया क्वाटर को लॉक लगा देता हूं। उसके उपरांत हम तीनों उस पुलिसिया क्वाटर से बाहर को निकल जाते है और लगभग 100 मीटर की दूरी पर अंकल स्कूटर को रोक देते है और एक और अंकल ( जिन्हें मैं मौसा जी कहता हूं)जो वही उस पुलिस कालोनी में रहते थे वह भी स्कूटर पर बैठ जाते है और पहले वाले अंकल स्कूटर को स्टार्ट कर गेयर लगा देते है। यह सब कुछ मुझ को अत्यंत ही अजीब सा लग रहा था परन्तु मैं खामोशी से लगभग स्कूटर की स्टेपनी के ऊपर को हो कर बैठा रहता हूं। उस समय मुझ को तनिक भर भी इस बात का एहसास नही था कि जिस पुलिस कालोनी से मेरी ढाई से तीन वर्ष की (2.5 से 3 वर्ष) बहुत सी खट्टी और मीठी यादे जुड़ी है उसको उस समय मैं अंतिम बार देख रहा हु। और जो अंकल हमें पार्टी करने के लिए ले जा रहे थे वह हमे अपने उस स्कूटर पर बैठा कर उस पुलिस कालोनी से तेज़ी से बाहर की ओर निकल जाते है।

कुछ ही समय के उपरांत हम हाइवे की रेड लाइट को पार कर बुराड़ी रोड पर आ जाते है। और मैं उसी अवस्था मे लगभग स्कूटर की आधी स्टेपनी पर किसी तरह से बैठा हुआ सोच रहा था कि यहाँ तो हमारा प्लाट है ( जिस पर हम मकान बना कर वर्तमान समय में निवास कर रहे है) शायद वही खाली प्लाट पर पार्टी है आज। परन्तु जब उनका स्कूटर तेज़ी से प्लाट के मोड़ को पीछे छोड़ते हुए आगे को निकल जाता है तब मैं सोचता हूं कि आज क्या बात है और यह किस बात की पार्टी है जिसकी इजाजत पापा ने भी प्रदान कर दी है। उस अज़ीब सी अवस्था मे उस तेज़ी से चलते हुए स्कूटर पर हम चार व्यक्ति और मैं सबसे पीछे को लगभग स्टेपनी पर बैठा हुआ यही सोच विचार कर रहा था कि तभी स्कूटर एकदम से एक खाली सुनसान सड़क के एक ओर को रुक जाता है।

शेष अगले क्रम से।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
28/08/2019 at 9:25 pm 1567006942685

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