यदि आप सर्वप्रथम स्वयं के विकास के लिए कोई सकरात्मक प्रयत्न नही करते है तो आप शीघ्र ही पतन को प्राप्त हो जाएंगे। एवं जब आपका आपके व्यक्त्वि का पतन हो जाएगा। तब आपके जीवन मे प्रारंभ होता है गृह कलेश।

इसके साथ ही समाज एव परिवार के जन मानस आप के ऊपर एक तिरस्कार की उंगली उठाते हुए आपको आपके पतन का दोषी सिद्ध कर देते है।

इसीलिए सर्वप्रथम आपका आपके लिए यह नैतिक कर्तव्य बन जाता है कि आप सर्वप्रथम स्वयं के विकास के लिए एक सकरात्मक प्रयास करें। एव अपने व्यक्त्वि का एक शश्क्त उज्ज्वल निर्माण करें। जिसके उपरांत आपका परिवार सहज ही आपको वह मान सम्मान देना प्रारम्भ कर देगा जिसके आप योग्य है।

इसके साथ ही समाज एव परिवार के जन मानस आपके प्रत्येक सकरात्मक सत्कर्मों को स्वीकारते हुए सहज ही आपको आपके भूतकालीन कुकर्मो के लिए क्षमा कर देते है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

29/08/2019 at 7:10 pm

Translated

💥 Truth.

If you do not make any positive effort for your own development first, then you will soon get the downfall. And when your person collapses. Then the family affliction begins in your happy life.

  At the same time, the people’s of the society and family member’s raise a contempt finger on you and prove you guilty of your downfall.

  That is why it becomes your moral duty for you to first make a positive effort for your own development. And make your person a powerful brighter. After which your family will start giving you the respect you deserve.

  With this, the people’s of the society and family, while accepting each of your positive actions, easily forgives you for your past deeds.

  Written by Vikrant Rajliwal.
29/08/2019 at 7:10 pm

If there is any error in my translation, then I apologize for your inconvenience.1567086169529

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