🕯️ दुसरो के गुणों को एव स्वंय के अवगुणों को जो स्वीकार करने की क्षमता रखता है वास्तव में वही स्वयं के प्रति एक ईमानदारी का व्यवहार बरतता है।

यदि आप सत्य को स्वीकार नही कर सकते तो शीघ्र ही सत्य की दिव्य अग्नि की तपिस से आपकी अन्तर्रात्मा आपको निरन्तर तपाते हुए जीते जी ही भस्म कर देगी।

अपने कुकर्मो के भीषण प्रभाव द्वारा दुखी होते हुए जब आप आत्मग्लानि की भावनाओं से पूर्णतः भर जाएंगे तो आपको आवश्यकता होगी उस दिव्य सत्य की जो आपको अपनी दिव्यता के प्रभाव द्वारा हर प्रकार की आत्मग्लानि की भावनाओ से मुक्त कर आपका उद्धार कर सकें।

यदि आप के ह्रदय एहसासों में किसी योग्य व्यक्ति के लिए किंचित मात्र भी सम्मान का भाव नही उपजता है या सृष्टि के द्वारा किसी योग्य गुरु एवं मार्गदर्शक के सत्यकर्मो की अनदेखी हो जाती है तो ज्ञात रहे इस सृष्टि का दुर्भाग्य किसी भयंकर विनाश के साथ उनके दरवाजे पर दस्तक दे रहा है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

1/09/2019 at 6:50 pm

Translated.

💥 Truth.

🕯️ The one who has the ability to accept the qualities of others and the Demerits of the self, in fact he behaves in an honest manner towards himself.

If you cannot accept the truth, then soon your soul will devour you with a constant heat while living with the heat of the divine fire of truth.

Being saddened by the horrific effects of your misdeeds , when you are completely filled with feelings of self-aggrandizement, you will need that divine truth which can save you by freeing you from all kinds of gulity through the influence of your divinity.

If feelings of respect do not arise in your heart feeling for a worthy person or if the honorable persons of this world ignore the truths of a worthy mentor and a worthy guide, So be aware that the misfortune of this entire world is knocking at their door with some terrible destruction.

Written by Vikrant Rajliwal.
1/09/2019/ at 6:50 pm1567086169529

Advertisements

Leave a Reply