ये अश्क़ है दिवाने (विक्रांत राजलीवाल।) के जो करते है बयां दर्द मोहब्ब्त का मोहब्ब्त से मेरे। हर दर्द से छलकता है अश्क़ मोहब्ब्त का मोहब्ब्त से मेरे।।
आज अपनी इस नज़म को एक दर्द भरी प्यारी सी सौगात के साथ आप सभी मित्रों के लिए पुनः प्रकाशित कर रहा हु। जिसमे आपको दर्द ए दिल को बयां करती हुई कुछ और पँक्तियों को पढ़ने का आनन्द एक लुफ्त प्राप्त हो सकें। तो पेश ए ख़िदमत है आपकी अपनी नज़म 🌹 अश्क़। (एक दर्द भरी प्यारी सी सौगात के साथ)

🌹 अश्क़।

मोहब्ब्त से कायल है मोहब्ब्त से महबूब की वो अपने, लम्हा लम्हा मर्ज़ ए मोहब्ब्त से घायल है मोहब्ब्त से महबूब की वो अपने।

देखता है सूरत ए यार बेहद नज़दीक से वो अपने, करता है मोहब्ब्त, महबूब को बेहद नज़दीक से वो अपने।।

हुस्न के वार से इश्क़ तड़प जाता है बेहिंतिया, उठ उठ कर सर्द रातो में ज़ख्मो को कुरेद देता है वो अपने बेहिंतिया।

उसकी मदहोश आँखें उसके दर्दो को बयाँ करती है, हर दर्द से उसके, उसका दीवाना तड़प जाता है आज भी बेहिंतिया।।

चिर के दिल ख़ंजर से ज़हरीले अपना, फैला दिया ज़हर रग रग में नाम ए मोहब्ब्त बेवफाई उसकी, है जो आज भी बहुत ज़हरीला।

पहुचाता है सकूँ जख्मों को मेरे, हर एक ज़ख्म नया, कर देता है जिंदा, ज़हर झूठी मोहब्ब्त का उसकी, है जो आज भी बहुत ज़हरीला।।

हर वफ़ा से उसकी फ़रेब कोई झलक कर दिख जाता है आज भी जो उसका।

हर वफ़ा से आज भी है कायल दीवाना, ज़हर मोहब्ब्त का कर के बर्दाश उसका।।

ज़ख्म जो दिल के कभी भर ना सके, हर ज़ख्मो को मान कर एक सौगात उसकी, हम जो कभी मर ना सके।

एहसास मिटा कर भी उसका हम जो उसको कभी भुला ना सके, मासूम चेहरे से सरेराह हम आज भी उसके नक़ाब फ़रेबी जो उठा ना सके।।

नाम मोहब्ब्त का मोहब्ब्त से लेते है उनकी, आज भी हम ए दिवाने।

हर राज मोहब्ब्त के बैठे है छुपा कर मोहब्ब्त से उनके, आज भी हम ए दिवाने।।

अक्स मोहब्ब्त का उनकी मिटता नही, आज भी टूटे दिल से जो ए दिवाने।

हर अक्स मोहब्ब्त का है बेनाम एक टूटा आईना उनकी, आज भी जो ए दिवाने।।

हर असूल ए मोहब्ब्त को निभाते हुए, हर दर्द ए दिल दर्द जो मोहब्ब्त का उनकी दिल से टूटे अपने छुपाते हुए।

कर गया बर्दाश हर दर्द मोहब्ब्त का दर्द मेरा, हर दर्द एक ज़ख्म दिल का बन गया नासूर, बयान फ़रेब उनका करते हुए।

बर्दाश नही दर्द ये दिल का, धड़कता दिल सीने में अब हमें,
धड़कती हर धड़कन सुनाती है फ़रेबी हर दास्ताँ ए मोहब्ब्त जो उनकी।

हर दर्द एक दास्ताँ जो अश्क़ है मोहब्ब्त का, छलकता दर्द, हर एहसास ए मोहब्ब्त सरेराह, आज भी फ़रेबी मोहब्ब्त से जो उनकी।।

उनकी वो मासूम अदाएं, मदहोश शराबी निगाहें, आज भी आ जाती है याद जो, हर एक बात उनकी सबक जिंदगी का बन गया छलकता अश्क़ जो हर एक दर्द मेरा।

हर दर्द जो एक सबक बन गए, जिंदगी को जीने का जिंदा एक हर्फ़ बन गए, किताब ए मोहब्ब्त है दास्ताँ ए जिंदगी, हर दास्ताँ करती है बयां, अश्क़ जो एक दर्द मेरा।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

5/09/2019 at 11:05 am1567654951010

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