उन्हें गरूर है हुस्न पर अपने आज भी बेहिंतिया,

और हम आज भी उनकी राह देखते है बेहिंतिया।

उन्हें नाज है खुद के पर्दानशीं होने का आज भी बेहिंतिया,

और हम आज भी मदहोश निग़ाहों से उनके घायल है बेहिंतिया।।

वो कहते है कि ए दिवाने तू अपनी औकात में रहो,

और हम आज भी उनके कदमो के निशान चूमते है बेहिंतिया।

वो कहते है कि कौन हो तुम, हट जाऊ नही तो मारे जाओंगे राह ए मोहब्ब्त पर दिवाने,

और हम आज भी उनके नाम पर मर जाते है बेहिंतिया।।

वो मासूम मोहब्ब्त, मासूमियत उनकी, रुला देती है हमें आज भी,

और वो मासूम मोहब्ब्त को हमारी एक खिलवाड़ समझते है आज भी बेहिंतिया।

वो हुस्न, वो शबाब उनका, ये दीवाना है ग़ुलाम उनका, और वो मासूम मोहब्ब्त, वो मासूम ख़्याल आज भी हर पल, पल पल है तो बस…मासूम मोहब्ब्त।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

19/09/2019 at 9:27 am

💗 Remember every moment.

He is proud of his beauty even today, and we still see his path today.

They are proud to be self-effacing even today, and we are still injured by their drunken bodies.

They say that you stay in your line, and even today, we kiss their footsteps.

They say who you are, if you don’t move away, you will be killed on Rah e mohabbat (Pathof love) e deewane (lover), and we still die in his name today.

That innocent love, his innocence, makes us cry even today, and he considers innocent love to be a mess of ours, even today.

That beauty, that youthfulness, this crazy is his slave, and that innocent love, that innocent thought even today, every moment, every moment is just… innocent love.

Written by Vikrant Rajliwal.

19/09/2019 at 9:27 am

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