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एक चोटिल एहसास। // A Hurt Feeling.

🙏🇮🇳 आज मैं यानी कि आपका मित्र एक साधारण से परिवार का भारतीय बालक स्वयँ के कुछ एहसासों को आप सभी प्रियजनो के साथ साँझा करने जा रहा हु। इस संसार मे प्रत्येक व्यक्ति का समय अत्यंत ही मूल्यवान होता है चाहे वह कोई सेलिब्रिटी हो या मेरे जैसा एक साधारण सा लेखक। और जब कोई आपके समय के मूल्य को अनदेखा करते हुए, आपके सामाजिक एवं रचनात्मक कार्यो पर अनैतिक प्रशन चिन्ह लगाने का प्रयत्न करें तो, उससे हमारे ह्रदय को अत्यंत चोट पहुचती है। ऐसे ही कुछ संवेदनशील विषय को मैं निमोक्त बताने का एक प्रयत्न करूँगा।

Today I mean that your friend is going to share some of his own feelings with an ordinary Indian boy. Every person’s time in this world is extremely valuable whether it is a celebrity or a simple writer like me. And when someone tries to put an unethical question mark on your social and creative works, ignoring the value of your time, it hurts our heart immensely. I will make an effort to declare some sensitive subject like this.

ShameOnYouFacebook

मेरी इन समाजिक पोस्ट के समान ही बहुत सी पोस्ट्स को फेसबुक ने डिलीट किया है। आखिर मेरी इन पोस्ट्स में क्या अनैतिक विषय वस्तु है? अभी तक मैं अपने माता पिता के मेहनत की कमाई के 15,000 रु से अधिक इस फ़ेसबुक पेज पर खर्ज कर चुका हूं। और अब जब मैने भुतकाल से शिक्षा प्राप्त करते हुए, इस फेसबुक पेज़ पर पैसा लगाना बन्द कर दिया है तो फ़ेसबुक मेरी सामाजिक पोस्ट्स को डिलीट एवं पेज़ के फंक्शन्स पर रोक लगा रहा है।

Shame on you Facebook. Like my social posts, Facebook has deleted many posts. After all what is the unethical content in my posts? So far, I have spent more than Rs 15,000 of my parents’ hard earned money on this Facebook page. And now that I have stopped spending money on this Facebook page while getting education from the past, Facebook is deleting my social posts and prohibiting page functions.

Shame on you Facebook.

मुझे एवं मेरे जैसे बहुत से लेखकों एवं पाठको को फेसबुक से बहुत सी समस्या है। इसीलिए मैंने अपनी वेबसाइट बनाई थी। जहाँ मैं अपनी लेखनी के माध्यम द्वारा अपने पाठकों से जुड़ सको।

यदि फेसबुक ऐसा ही अनैतिक व्यवहार करता रहा तो मुझ को अपना फेसबुक अकाउंट निष्क्रिय करना ही होगा।

मेरी जिन सामाजिक पोस्ट्स को फेसबुक अनैतिक कह कर उन्हें डिलीट किया है उन्हें मैं यानी कि विक्रांत राजलीवाल अब अपनी स्वयं की वेबसाइट पर प्रकाशित करूँगा।

मैं कोई करोड़पति नही की हर महीने हज़ारो रुपए बेमतलब ही फेसबुक पेज़ पर खर्ज कर सकूँ। इसीलिए फेसबुक के इस अनैतिक व्यवहार से मैं अत्यंत ही आहात हुआ हूं।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

फेसबुक लिंक
https://www.facebook.com/vikrantrajliwal85/
Shame On You Facebook

I and many writers and readers like me have a lot of problems with Facebook. That’s why I created my website. Where I can connect with my readers through my writing.

If Facebook continues to behave like this, then I have to deactivate my Facebook account.

My social posts, which have been deleted by Facebook as unethical, I will publish them on my own website, ie Vikrant Rajliwal.

I am not a millionaire, I can spend hundreds of thousands of rupees on a Facebook page every month. That is why I am extremely shocked by this unethical behavior of Facebook.

Thank you.

Written by Vikrant Rajliwal.

Facebook link👇👇👇👇
https://www.facebook.com/vikrantrajliwal85/
Shame On You Facebook🖕🖕🖕

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Published by Voice Of Vikrant Rajliwal ( My Writing, My Blogs & My Voice)

💥Spiritual communicator, Motivational Speaker, Author, Writer, Poet And Thinker. विक्रांत राजलीवाल। (समाजिक कार्यकर्ता, कवि, शायर, नज़्मकार, ग़ज़लकार, गीतकार, व्यंग्यकार, लेखक एव नाटककार-कहानीकार-सँवादकार) 1) एहसास प्रकाशित पुस्तक (published Book) : अत्यधिक संवेदनशील काव्य पुस्तक एहसास, जिसका केंद्र बिंदु हम सब के असंवेदनशील होते जा रहे सभ्य समाज पर अपनी काव्य और कविताओं के द्वारा एक प्रहार का प्रयास मात्र है। Sanyog (संयोग) प्रकाशन घर शहादरा द्वारा प्रकाशित एव ए वन मुद्रक द्वरा प्रिंटिड। प्रकाशन वर्ष जनवरी 2016. प्रकाशित मूल्य 250:00₹ मात्र। 2) My Site: Vikrant Rajliwal Url address: vikrantrajliwal.com वर्ष 2016-17 से अब तक सैकड़ो दर्दभरी नज़्म, ग़ज़ल, बहुत सी काव्य-कविताए एव कुछ व्यंग्य किस्से, कुछ एक गीतों के साथ बहुत से विस्तृत समाजिक, आध्यात्मिक एव मनोवैज्ञानिक लेखों के साथ कई प्रकार के सामाजिक एव आध्यात्मिक विचार लिख कर अपनी साइट पर प्रकाशित कर चुके है। एव दिनप्रतिदिन कॉप्के प्रेमस्वरूप नित्य नई रचनाओँ का लेखन एव प्रकाशन जारी है। एवं स्वम् की कई नज़्म कविताओं एव लेखों का अंग्रेजी भाषा में अनुवाद कर चुके है। 3) Youtube channel: Vikrant Rajliwal पर मेरे द्वारा लिखित मेरी समस्त रचनाओँ जैसे प्रकाशित पुस्तक एहसास से अति संवेदनशील काव्य- कविताए, और मेरी निजी लेखनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित मेरी सैकड़ो नज़्म, ग़ज़ल और बहुत सी काव्य, कविताओँ एव्यंग्य किस्सों को मेरे स्वयं के स्वरों के साथ देखने और सुनने के लिए मेरे YouTube चैनल को अभी Subscribe कीजिए। 👉 आगामी रचनाएँ (Upcoming Creation's) : अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर सक्रिय अति विस्तृत दर्दभरी नज़्म दास्ताँ श्रृंखला "दास्ताँ" के अंतर्गत चौथी एवं अब तक लिखी गई अंतिम अति विस्तृत दर्दभरी नज़्म दास्ताँ "मासूम मोहब्ब्त" प्रकाशित करि जाएगी। जल्द ही अपनी ब्लॉग साइट vikranrajliwal.com पर अपनी कुछ लघु कहानियों का प्रकाशन का कार्य प्रारंभ करूँगा। 👉 साथ ही मैं वर्ष 2016 से एक अत्यंत ही दर्दभरा जीवन के हर रंग को प्रस्तुत करती एक सामाजिक कहानी, एक नाटक पर कार्य कर रहा हु। 💥 इसके साथ ही शायद आप मे से बहुत से महानुभव इस बात से परिचित नही होंगे कि मैं आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल वर्ष 2003-04 से नशे से पीड़ित मासूम व्यक्तियों के लिए निःस्वार्थ भाव से सेवा करता आ रहा हु एव स्वम भी कई प्रकार के जटिल उतार चढ़ाव के उपरांत एक शुद्ध रिकवरी को प्राप्त कर सका हु। यदि आप मुशायरे या कवि सम्मेलन के आयोजक है और आप मेरी सैकड़ो दर्दभरी नज़्म ग़ज़ल शायरी या काव्य कविताओं के द्वारा मेरे कार्यक्रम को बुक करते है तो यकीन मानिए इस प्रकार से आप अपना एक अनमोल योगदान उन मासूमो के लिए सहज ही प्रदान कर सकते है। क्योंकि मेरी कला के कार्यक्रम से होने वाली 100% कमाई नशे से पीड़ित उन गरीब एव बेबस मासूमो के इलाज लिए समर्पित होगी। जिन्होंने अपना जीवन जीने से पूर्व ही नशे के आदि बन कर बर्बाद करना शुरू कर दिया है या बर्बाद कर चुके है। 😇 समाज सेवा: स्वमसेवी नशामुक्ति कार्यक्रम के तहत नशे की गिरफ्त में फंसे नवयुवको एवं व्यक्तियों को एक स्वास्थ्य जीवन को जीने के लिए प्रेरित करता आ रहा हु। स्वमसेवी संस्थाओं एवं स्वयम से जन सम्पर्को के माध्यम द्वारा निशुल्क सेवा भाव से वर्ष 2003 से अब तक। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। मेरासंपर्क सूत्र नीचे अंकित है। My Whatsapp no: 91+9354948135 (Translated) One service and one collaboration Hello Friends, Many of you may not be familiar with the greatness that I have been serving my self-indigenous friends Vikrant Rajliwal with selfless service for innocent people who have been suffering from intoxicants since 2003-04. After a complex fluctuation of type, I could get a pure recovery. And if you are the organizer of mushere or poet conference or you can book my program with my hundreds of painful najm ghazal shayari or poetic poems and also in your program, believe that in this way you have a valuable contribution They can easily provide for those innocent people. Because 100% earnings from my program will be dedicated to the treatment of those poor and unemployed innocent people who have started wasting or wasted by becoming addicted to drugs before living their lives. Name: Vikrant Rajliwal Published book: एहसास (a highly sensitive poetic book inspired by social and humanitarian values) published by Sanyog publication house shahdara. Which was also showcased at the Delhi World Book Fair in the same year 2016. 🎤 Upcoming creations: The story of my fourth and last nazam tales written so far. And a play, a painful story presenting every run of life. 😇 Social service: Swamsevy has been promoting the life of the youth and all the people trapped under the influence of intoxicants as a drug addiction program. Free service charges through Swamsevy institutions from 2003 till now. Thank you Vikrant Rajliwal Hometown: Delhi. The contact form is displayed below. My Whatsapp no: 91 + 9354948135 प्रिय पाठकों एव मित्रजनों, यह है अब तक का मेरे द्वारा सम्पन्न एव आगामी लेखन कार्य, जो आप सभी प्रियजनों के प्रेम एव आशीर्वाद से शीघ्र अति शीघ्र ही सम्म्प्न हो अपने वास्तविक स्वरूप को प्राप्त हो जाएगा। आप सभी प्रियजन अपना प्रेम एव आशीर्वाद अपने रचनाकार मित्र विक्रांत राजलीवाल पर ऐसे ही बनाए रखे। धन्यवाद। विक्रांत राजलीवाल।

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