नमस्कार प्रियजनों, वैसे तो मुझ को अपनी और आप सब की अपनी इस ब्लॉग साइट पर ही अपने विचारों को अपनी लेखनी के माध्यम द्वारा प्रस्तुत करना अधिक शांति प्रदान करवाता है। परन्तु कभी कभी आप भावुक हो कर अपनी भावनाओं बह जाते है। ऐसे ही बीते कुछ समय के दौरान मैंने अपने फेसबुक पेज के प्रिय फॉलोवर्स के लिए कुछ समाजिक एवं रचनात्मक विषय को पोस्ट के माध्यम द्वारा साँझा किया था। जिन्हें फेसबुक ने एक ही क्षण में डिलीट कर दिया। अभी तक मैं अपने फेसबुक पेज़ पर अपने माता एवं पिता की महेनत की कमाई के लगभग 15,000 हज़ार खर्ज कर चुका हूं। एवं कुछ महीने पूर्व फ़ेसबुक ने मुझ को 700 ₹ का टोकन दिया था। अपने फेसबुक पेज को प्रमोट करने हेतु। परन्तु जब मैने उसका इस्तेमाल किया तो मेरे पिताजी के बैंक खाते से 10000 हज़ार रुपए चोरी हो गए। खैर, आज मैं, अपनी इन ग़लतियो से सिख लेते हुए, अपनी उन्ही समाजिक एवं रचनात्मक विषयो को आपकी इस ब्लॉग साइट पर साँझा कर रहा हु।

Translated.

Hello dear ones, by the way, it gives me more peace to present my thoughts on your blog site through your stylus. But sometimes you get emotional and your feelings get carried away. During the same time, I had shared some social and creative topics through posts for the dear followers of my Facebook page. Which Facebook deleted in an instant. So far, I have spent about 15,000 thousand rupees on my Facebook page and the income of my mother and father. And a few months ago Facebook gave me a token of 700 ₹. To promote your Facebook page. But when I used it, 10,000 rupees were stolen from my father’s bank account. Well, today, while learning from these mistakes, I am sharing my same social and creative subjects on this blog site.

आज का विचार।

आप केवल सत्यकर्म कर सकते है परन्तु आपके द्वारा किए गए प्रत्येक सत्यकर्मो के प्रतिफल आपको सत्यकर्मी व्यक्त्वि के व्यक्तियों द्वारा सहज ही आशीष प्राप्त होगा एवं कुकर्मि व्यक्ति के व्यक्तियों द्वारा रचित छल, कपट एवं दुर्व्यवहारों से आपका प्रत्यक्ष सामना होगा सहज ही है।

एवं यहाँ आपके सत्यकर्म एवं आपका दृढ़ साहस ही आपको इस संसार के समस्त कुकर्मियों से सुरक्षा प्रदान करते हुए, आपके प्रत्येक सत्यकर्मो से आपके दिव्य व्यक्त्वि में एक ऐसी दिव्य शक्ति एवं ऊर्जा उतपन करेगा, जिसके समक्ष कोई भी कुकर्मी क्षण भी ठहर नही सकेगा एवं निच्छित ही वह अपने पतन को प्राप्त होंगे।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

18 अक्टूबर वर्ष 2019 समय प्रातः 9:17 बजे। (फेसबुक पर)

आज ही आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com से जुड़ जाए एवं YouTube चैनल Voice Of Vikrant Rajliwal को सब्सक्राइब करे।

यूआरएल है https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A

Today’s thought. (Translated)

You can only do Satyakarma but the reward for every Satyakarma you have done will be blessed by the people of the person of Satyakarm and you will be directly confronted with the deceit, deception and misconduct by the persons of Kukarmi (evil-doer).

And here only your Satyakarma and your steadfast courage will inculcate in your divine person a divine power and energy from each of your Satyakarma, giving you protection from all the misdeeds of this world, In front of which no evil-doer can stop even for a moment and he will surely achieve his downfall.

Written by Vikrant Rajliwal.

October 18, 2019 at 9:33 am (On Facebook)

Join your own blog site vikrantrajliwal.com today and subscribe to the YouTube channel Voice of Vikrant Rajliwal.

The URL is https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A

यदि आप हानिकारक व्यसनों से मुक्त होना चाहते है! तो स्वयं के प्रति एक विशवास उतपन कीजिए। एक दृढ़ संकल्प के साथ, एक स्वास्थ्य जीवन शैली को अपनाइए। अपने जीवन से प्रत्येक हानिकारक भोज (हानिकारक खाद्य प्रदार्थ, नशीले खाद्य प्रदार्थ) का त्याग कीजिए। शुद्ध विचारो को धारण कीजिए। एवं उनका पालन कीजिए। अपने धर्म को, यहाँ अपने धर्म से तत्प्रय है कि जिस धर्म या सम्प्रदाय को आपकी अंतरात्मा के द्वारा स्वीकार किया गया है। उस अपने धर्म के साथ अध्यात्म, योग एवं प्राकृतिक व्यायाम से भी जुड़ने का प्रयत्न कीजिए। एवं सबसे महत्वपूर्ण हर विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आदर्शो के साथ ईमानदार रहिए।

जब उपरोक्त विषयों का आप अपने स्वास्थ्य जीवन शैली में पालन करते हुए उनका ईमानदारी से निर्वाह करना प्रारम्भ कर देंगे तब आपका जीवन स्वयँ ही सकरात्मक बदलाव के साथ परिवर्तित होते हुए दिव्यता से महक उठेगा।

क्योंकि इसके सिवाय और कोई भी मार्ग उपको शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य प्रदान नही कर सकेगा! यह मैं स्वयं के निजी अनुभवो के द्वारा प्राप्त एक स्वास्थ्य एवं निर्णयक जीवन शैली की प्राप्ति के उपरांत उपरोक्त विषय लिख या कह रहा हु।

मैं वर्ष 2003 या 04 से कई प्रकार के उतार चढ़ावों से गुजरने के उपरांत। बीते दो वर्षों से पूर्णतः किसी भी प्रकार के हानिकारक व्यसन के सेवन से मुक्त एक स्वास्थ्य जीवन जी रहा हु। क्यों कि जब आप के समीप स्वयं के मानसिक एवं शारिरिक विकास के लिए स्वतंत्रता होती है। एवं आप को उसका महत्व ज्ञात होता है। तो आपके जीवन मे एक सकरात्मक परिवर्तन सहज ही उतपन्न हो जाता है। आज मैं व्यायाम करता हु। अध्ययन करता हु। एवं बीते 26 महीनों और 6 दिनों से सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार के हानिकारक व्यसन से मुक्त सक्रिय भी हु। मैंने इस दौरान सैकड़ो रचनाए, काव्य, कविताएं, नज़म ग़ज़ल,गीत, व्यंग्य , एवं सामाजिक, आद्यात्मिक एवं मनोवैज्ञानिक लेखों को लिखा एव प्रकाशित किया एवं अपनी अति विस्तृत नज़म दस्तानों को भी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित किया। इसी दौरान मैने अपना प्रथम लघु उपन्यास भोंडा। (एक कहानी जो दिल को छू जाए) को लिखा एवं कुछ दिन पूर्व ही अपनी ब्लॉग साइट पर प्रकाशित भी किया है। इसके साथ हु अपने यूट्यूब चैनल Voice Of Vikrant Rajliwal पर बहुत सी अपनी रचनाओं एवं दास्तानों की रिकार्डिन भी करि है।

यह सब कुछ उन्ही उपरोक्त विषय का दृढ़तापूर्वक पालन करने से ही सम्भव हो सका है।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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🇮🇳 वास्तविक स्वतंत्रता।

क्रूर, तानाशाह एवं अत्याचारी व्यवस्था से स्वतँत्रता प्राप्ति हेतु आपको सत्याग्रह के साथ आक्रामक हथियारों से भी शश्क्त होना पड़ता है।

एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत जब आपका सामना, भृष्टाचारी संस्थाओ, क्रूर तानाशाह, एवं अत्याचारी व्यक्तित्व के व्यक्तियों के साथ, उनके द्वारा स्थापित उनके मकड़जाल से होता है और आप स्वयँ को उसमे सम्पुर्ण रूप से फंसा हुआ पाते है। तब उन से मुक्ति हेतु आपको सत्यकर्मो, अनुशाशन, के साथ अपने अधिकारों का ज्ञान भी अति आवश्यक है। यह ज्ञान आपको उचित शिक्षा की प्राप्ति के उपरांत सहज ही प्राप्त हो जाता है। इस भृष्ट मकड़जाल को तोड़ना सहज नही। परन्तु आप स्वयँ को दृढ़ आत्मविश्वास के साथ सत्यकर्मो एवं निस्वार्थ कर्मो के द्वारा ईमानदारी से इस दिव्य मार्ग पर अड़िग रख कर उस मकड़जाल से मुक्त हो जाएंगे।

यहाँ सबसे महत्वपूर्ण विषय यह है कि क्या आप वास्तविक रूप से एक उज्वल स्वतंत्र व्यक्तित्व की प्राप्ति के लिए प्रयासरत है या नही?

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

13 अक्टूबर प्रातः 8:19 बजे फेसबुक पर।

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💥 चक्रव्यूह।

कर्मो की कर्मगति एवं विचारों के प्रभावों द्वारा रचित चक्रव्यूह के मध्य, ज्ञान एवं अज्ञान की, अत्यंत ही शुष्म परत होती है। प्रथम एवं एकमात्र स्थान ज्ञान को प्राप्त है। ज्ञान जो सत्य के स्वीकार स्वरूप सहज ही प्राप्त होता है। जिसके प्रभाव से हम चक्रव्यूह के मध्य होते हुए भी, उन्नति को प्राप्त हो जाते है। इस एक विषय को छोड़ कर, समस्त विषय अज्ञानता के सूचक होते है।

जिसके परिणामस्वरूप अज्ञानी व्यक्ति सुसंगत एवं उन्नतिपूर्ण वातावरण के मध्य होते हुए भी, ज्ञान एवं अज्ञान के मध्य उस शुष्म परत के अपरिचित होते हुए, स्वयं के अज्ञान एवं उस अज्ञान के परिणामस्वरूप, अपने कुकर्मो की कर्मगति के द्वारा रचित, विनाश के चक्रव्यूह के मध्य फंस कर, अकस्मात ही अपने पतन को प्राप्त हो जाते है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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💥 Trap Chakaravyuh (Translated)

In the middle of the chakravyuh composed by the effects of the actions and thoughts of karma, there is a very soft layer of knowledge and ignorance. Knowledge is the first and only place. Knowledge that is accepted in the form of truth is easily attained. Due to which we get progress despite being in the middle of Chakravyuh. Except this one subject, all subjects are indicative of ignorance.

As a result, the ignorant person, despite being in the middle of a coherent and prosperous environment, being unfamiliar with that sushma layer between knowledge and ignorance, as a result of his ignorance and that ignorance, composed by the deeds of his kukarmo, stuck between the cycle of destruction.

Constructed by the deeds of his kukarmo, he suddenly gets his downfall, trapped in the middle of the cycle of destruction.

Written by Vikrant Rajliwal.
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आज का विचार। रचनात्मक एवं जीवन अनुभव लेखन लेखनी या कलात्मक क्रिया सम्बंधित कला, कोई प्रतियोगिता या प्रतिस्पर्धा की विषय वस्तु नही है। अपितु रचनात्मक या जीवन अनुभव लेखन लेखनी, या कलात्मक क्रिया सम्बंधित कला, स्वयं को अत्यंत ही समीप से जानने एवं समझने का एक सत्य अनुभव है। इसीलिए जब आप स्वयँ को विजयता घोषित करने हेतु या अपनी कला से अन्य जनो की कला को पछाड़ने के लिए, अपनी कला का प्रदर्शन करते है, तो आप अध्यात्म एवं प्राकृतिक एहसासो से विमुख होते हुए, एक अनचाहे चक्रव्यूह में अंजाने ही फंस कर अपने दिव्य ईष्वरीय प्राकृतिक एहसासों को सहज ही खो देते है। धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

आज ही जुड़े आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com से। (21 अक्टूबर 2019 समय प्रातः 7:24 बजे इंस्टाग्राम)

आज का विचार एवं परामर्श। 😇 स्वयं को आवश्यकता से अधिक चतुर समझना, आपको इस भरे संसार में एक दिन एक दम से तन्हा एवं बर्बाद कर देगा। क्योंकि यह बिल्कुल वैसा ही जैसे कि आप स्वयं जिस डाल के सहारे बैठे हुए है उसी डाल को आप स्वयं की काट डाले। इसीलिए दुसरो को दोषी ठहराने से पूर्व स्वयं के गिरेबाँ में भी एक बार अवश्य आप झांक कर देखे कि कही आप स्वयं भी तो दोषी नही है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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Today’s thoughts and advice. (Translated) Thinking yourself smarter than necessary, will single-handedly ruin you one day in this stuffy world. Because it is exactly the same as the one on which you are sitting on your own, you cut the same piece yourself. That is why, before convicting others, you must also peep once in your fall that you are guilty at all yourself.

Written by Vikrant Rajliwal.

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शायर!

जी हा मैं शायर हु और शायरी भी करता हु मियां। आज कल मैंने लिखना भी शुरू किया है और शायरी को सुनना भी! जी क्या कहा आपने शायरी शेरों का नही कायरों का काम है! टूट कर बिखर जाएंगे। मियां हम ही शेर है एक यहाँ, बाकी सब तो ढेर है सिर्फ यहा। शेर ए शायरी से शेर पे शेर कहने की हिम्मत रखते है मियां। अभी फ़िलहाल हमें फुर्सत नही, आपको फिर किसी और रोज़ पाठ हम ही पढ़ाएंगे मियां।

राम राखा

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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💥 एक कटु सत्य। यदि एक बकरी को एक खूंखार शेर के समीप बांध दिया जाए एवं उसको पोष्टिक से पोष्टिक आहार भी दिया जाए। तो भी वह शारिरिक एवं मानसिक रूप से जर्जर होते हुए, बीमारी को प्राप्त हो जाएगी। ऐसे ही यदि आपके परिवार में कोई नशे का सेवन करता है तो उसका नकारात्मक प्रभाव आपके चेतन एवं अचेतन मस्तिक्ष पर अवश्य ही होगा। जिससे प्रभाव से आप भी बीमार हो अपने पतन को अवश्य ही प्राप्त हो जाएंगे। कृपया ध्यान दीजिए। प्रथम उदाहरण में बकरी एक जानवर है एवं वह हम मनुष्य के समान बुद्धिमान नही है। इसीलिए उसको उस विषय का ज्ञान समझाने पर भी ज्ञात नही हो पाएगा कि शेर का अपना एक स्थान है एवं वह उस दायरे तक सीमित है। और आपका अपना एक सुरक्षित दायरा है आप उसमे निचिंत हो जाए।

द्वितीय उदाहरण में हम मनुष्यो में मनुष्य यानी कि वह मनुष्य जिन्हें ईष्वर की कृप्या प्राप्त है वह एक उचित मार्गदर्शन के द्वारा इस ज्ञान को समझ एवं अपने जीवन मे पूर्णतः ढाल पाते है कि आपके परिवार में जो मनुष्य नशा कर रहा है वह उसका जीवन है एवं उसका अपना एक उचित दायरा है यदि आप स्वयं ना चाहे तो वह आप तक कदापि नही पहुच सकता है। पुनः इस विषय पर प्रकाश डालता हु की हम मनुष्य है जानवर नही। यहाँ हम स्वयं से अधिक उस परिवार के सदस्य या मित्र के लिए चिंतित हो जाएंगे। और मनुष्यो में मनुष्य यानी कि वह मनुष्य जिन्हें ईष्वर की कृप्या प्राप्त है। एक कदम आगे को बढ़ते हुए परिवार के उस नशेबाज सदस्य या मित्र जो कि वास्तविक रूप से एक बीमार व्यक्ति है को एक उचित मार्गदर्श, जिसे हम काउंसलिग भी कहते है, एक अनुभवी एवं ज्ञानी व्यक्ति के द्वारा अवश्य उपलब्ध करवाएंगे। जिससे उस परिवार के सदस्य या मित्र के जीवन मे भी एक प्रकाश उत्पन्न हो सकें।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

आज ही फॉलो करें एवं जुड़ जाए आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com से।

💥 A harsh truth. (Translated) If a goat is tied near a ferocious lion and a nutritious nutritious diet should also be given to it. Even then, while being physically and mentally disreputable, the disease will be acquired. In the same way, if someone in your family consumes intoxication, then it will definitely have a negative effect on your conscious and unconscious mind. Because of which you are also sick with the effect, your fall will definitely be achieved. Please Note. In the first instance the goat is an animal and he is not as intelligent as we humans. Therefore, even after explaining the knowledge of the subject to him, he will not be able to know that the lion has a place of its own and it is limited to that realm. And you have a safe circle of your own. In the second example, we humans in humans, ie the man who is blessed by God, through proper guidance, understand this knowledge and fully mold it in his life that the person who is intoxicated in his family is his life and He has a reasonable scope of his own, if you do not want to do it yourself, then he cannot reach you. Again, we throw light on the subject that we are humans and not animals. Here we will become more concerned about that family member or friend than ourselves. And humans in humans, that is, humans who have the grace of God. Going a step ahead, an intoxicated member or friend of the family, who is actually a sick person, must provide a suitable guide, also known as counseling, by an experienced and knowledgeable person. So that a light can arise in the life of that family member or friend.

Thank you.

Written by Vikrant Rajliwal.

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धन्यवाद।

यह वह समजिक एवं रचनात्मक विषय थे जिन्हें मैंने फेसबुक पर अपने कुछ फॉलोवर्स के लिए लिखा था एवं जिन्हें फेसबुक ने मात्र कुछ ही क्षणों में डिलीट कर दिया।

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