अपने भूतकाल में क्या क्या कुकर्म किए थे! यह इस संसार के लिए इतना अधिक महत्व नही रखता, जितना कि आपके वर्तमान काल मे किए गए सत्यकर्म।

इसीलिए अपने भूतकाल की अज्ञानता को स्वीकारते हुए, जो मनुष्य अपने वर्तमान काल मे अपनी इंद्रियों को जागृत करते हुए, सत्यकर्म करते है वह वास्तविकता में प्रेम एवं सहानुभूति के पात्र होते है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखीत।

3 नवम्बर वर्ष 2019 समय प्रातः 7:48 बजे

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