💥 सुबह सवेरे, नई उमंग,नई ताजगी से भरी हर श्वास, प्राण जीवन  उमंग चेतना से प्रफुल्लित ये जीवन एक आत्मज्ञान।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित

ईष्वर के बनाए हम पुतले जो माटी के, भरी है भीतर हमारे भावनाए जो नेकी भरी।

विकास हो आबाद हो हर क्षण उनका, ना दुखने पाए भूल से भी, ह्रदय किसी मासूम का कभी।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

मेरी शायरी ने मेरे काव्य को सँवारा है।

मेरे काव्य ने मेरी शायरी को निखारा है।।

करते है मोहब्ब्त एक दूसरे से मिलन प्रेम का, जी हाँ मोहदय, जी हाँ जनाब ये है एहसास ये है एहसास ये है एहसास।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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