🌹 सुलगते एहसास।

ना जिन्हें दिन को है सकूँ साँसों में; ना रातों को है आराम। हम है वो जो रहते है हर लम्हा लेकर धधकती धड़कनों में सुलगता एक अंगार।। विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। Advertisements