मेरा प्रथम गीत; दृश्य इस प्रकार से है कि एक प्रेमी युगल बिछुड़ रहा है या बुछुड़ जाते है और वह प्रेमी युगल एक दर्द भरी पुकार से तड़पते हुए करहा उठते है। (पुनः प्रकाशित)

रुक रुक रुक रुक रुक ए हवा।

सुन सुन सुन सुन सुन तू सदा।।

महोबत को तेरी भुला न सकेंगे।

न जिंदा रहे सकेंगे न हम मर सकेंगे।।

दर्द ए दिल तुझ से दुआ हम करेंगे।

आईने में दिल के तुझ को देखा करेंगे।।

रुक रुक रुक रुक रुक ए हवा।

सुन सुन सुन सुन सुन तू सदा।।

आ आ आ आ आ ए दिल-रुबा।

न जा जा जा जा जा तू है कहा।।

यादो को तेरी मिटा न सकेंगे।

न मिल हम सके तो हर लम्हा रोआ करेंगे।।

दर्द ए जुदाई दूर तुझ से तन्हा तड़पा करेंगे।

ज़ख्मो को दिल के हम कुरेदा करेंगे।।

रुक रुक रूक रुक रुक ए हवा।

सुन सुन सुन सुन सुन तू सदा।।

ज़ख्मो को दिल के सी न हम सकेंगे।

न दवा हम करेंगे न उनको भर सकेंगे।।

फिज़ाओ में सुनी, तन्हाइयो में अक्सर।

यादो में अपनी, दुआओ में अक्सर।।

तड़प ए दिल दिल कि गहराइयो में फिर भी, मिला हम करेंगे…ए प्रिया।

जागती आखो से अपने, अधूरे ख्वाबो में फिर भी, तुझ को पूजा करेंगे…ए प्रिया।

रुक रुक रुक रुक रुक ए हवा।

सुन सुन सुन सुन सुन तू सदा।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish at vikrantrajliwal.com)

YouTube Live Video link is mentioned in below.

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