भोंडा। (एक दिलचस्प उपन्यास) With YouTube Video link. *विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एवं प्रसारित*

नमस्कार प्रिय पाठकों एवं ह्रदय अज़ीज़ श्रुताओं, आज अपनी एक अत्यंत ही दिलचस्प और भावनात्मक प्रेम कहानी “भोंडा।” का आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर प्रथम प्रकाशन करने के उपरांत, अब आपके अपने YouTube चैनल Voice Of Vikrant Rajliwal पर स्वयँ अपने स्वरों के द्वारा अपने इस प्रथम प्रकाशित उपन्यास भोंडा। को रिकार्ड कर अपलोड करते हुए मुझ को अत्यधिक हर्ष एवं रोमांच की अनुभूति प्राप्त हो रही है। भोंडा केवल एक कहानी ही भी है बल्कि यह स्वयं के भीतर एक ऐसे भावनात्मक एहसासों को संजोए हुए है जिसको लिखते समय मैं स्वयं अत्यधिक भावुक हो गया था।

अब आपका अधिक समय ना लेते हुए मैं यानी कि आपका अपना मित्र इतना ही कहना चाहूंगा कि “भोंडा सिर्फ एक कहानी ही नही है अपितु यह एक ऐसे सत्य को दर्शाती है जिसे अक्सर बहुत से युवाओं ने अनादि काल से विभिन्न प्रकार से महसूस किया है और ना जाने कब तक वह भोंडा के ही भांति उन एहसासो को महसूस करते रहेंगे।”

आशा करता हु आपको मेरी यह कहानी बल्कि अब यह कहना अधिक उचित होगा कि आपको आपकी अपनी यह कहानी “भोंडा।” आपके अपने मित्र विक्रांत राजलीवाल के साधारण से स्वरों के द्वारा सुनकर एवं महसूस करते हुए अवश्य पसन्द आएगी।

विक्रांत राजलीवाल।

मेरे फ़ेसबुक पेज़ का यूआरएल पता है।

https://www.facebook.com/vikrantrajliwal85

भोंडा। (एक कहानी जो दिल को छू जाए) – Vikrant Rajliwal Writing Blog’s And Website’s (Reblog/Republish)

 by Voice Of Vikrant Rajliwal ( My Writing, My Blogs & My Voice).In Blog.Leave a Commenton भोंडा। (एक कहानी जो दिल को छू जाए) – Vikrant Rajliwal Writing Blog’s And Website’s (Reblog/Republish)

YouTube video link of Bhondha is https://youtu.be/P8YjIu5S5cc

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एहसास ए ज़िन्दगी। With YouTube Video Link.

रुक गए है जो लम्हे, ठहर गयी ये जिंदगी, 
टूट गया जो राही, जुड़ती अब किसी उम्मीद के साथ।

छूट गए है जो साथ, धुंधला गए जो अक्स, 
नजरो से छलकते, हर पैमानों के साथ।।

उड़ते हौसलो से एक उम्मीद, रुकी सांसो से, छीलते जख़्म, 
हर ज़ख्म नासूर है मेरे, घुटती हर उम्मीद के साथ।

एक निसान, दर्द ए ज़िन्दगी, दब गई जो चाहते, 
दम तोड़ते  अक्षर, जलती किताब, टूटती अपनी कलम के साथ।।

एक पथ है अंधेरे से कायम, टूटे कदम, चल रहा एक राही,
हर कदम से दबाए है साए कई, उठे जो ज़हरीले काटो के साथ।

हर आह से मिला है जख़्म ए दिल, आईना ए हकीकत, लगा जो ख़ंजर जख्मों पर मेरे, मासूम अहसासों के साथ।।

क़लम तड़पती है मेरी, अश्क ए श्याही, हाल ए दिल करते है बयां, 
साए जिंदगी के, बैठे जो राही मेरी कब्र के साथ।

चल रही है सांसे, बेरुखिया जो खुद से, चटका जो आईना ए दिल,
जख़्म रूह पर मेरे, टूटी अपनी कलम के साथ।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
(Republish at vikrantrajliwal.com)

YouTube Video Link is https://youtu.be/RX9_9T9X_Ec

दर्द ए मोहब्ब्त। With वाच "दर्द ए मोहब्ब्त। ( विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एवं ओरसरित। )" on YouTube

हो गया हैं फ़ना, एक दीवाना जो कहि,
सनम से अपने, बिछुड़ जाने के बाद।

बिखर गयी हैं चाहते, अश्क़ जख्मो पर जो कहि,
टूट गयी सांसे, दिल उसका टूट जाने के बाद।।

हो गया है दफ़न, परत समय कि में जो कही,
रह गए निसान ए इश्क़ बाकी, उसके चले जाने के बाद।

जल गयी है चिता, मासूम-अरमानो की उस के जो कहि,
एक अहसास ये जुदाई, बाकी ये चीखती तन्हाई, उसके खो जाने के बाद।।

एहसास है धड़कनो को, खामोश धड़कनो का, ज़ुल्म धड़कनो पर उस के जो कहि,
सो गया जो मुसाफ़िर, राह ए महोबत, अपनी लूट जाने के बाद।

चाहत हैं ज़िन्दगी, मजबूरी अब भी ये महोबत, चल रही  जो जिंदगी जो कहि,
उखड़ रही जो सांसे, एक दर्द बन्द सीने में कहि, धड़कने 
उस की रुक जाने के बाद।।

विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।
(Publish at vikrantrajliwal.com)

क़त्ल ए एहसास। With YouTube video link.

नशा है फ़िज़ाओं में आज, बहकी-बहकी सी सांसे, कुछ-कुछ मदहोश सी है।

साथी है साथ में आज, उफ़ान ए धड़कन, अंजाम ए हक़ीक़त, हैरानी सी है।।

रास्ते है साथ में आज, तलाश ए हौसले, मंजिले कुछ-कुछ अंजान सी है।

जशन है साथ माहौल में आज, निसान ए उदासी, अब भी मेरे साथ सी है।।

आरज़ू है साथ मे आज, अक्स ए जुदाई, पहेलु में खुशियां, धड़कने फिर भी हैरान सी है।

अल्फ़ाज़ है साथ रूह में आज, ख़ामोश ये जुबां, कत्ल ए एहसास, कलम मेरी दम तोड़ने को है।।

कलम है हाथ मे आज, नासूर ए जख़्म, खून ए श्याही, फड़कती हर एक नब्ज़, गुम सी है।

यक़ीन है साथ साए में आज, उदास ये लम्हे, इंतज़ार अब भी सांसो में, हर साया साथ छोड़ने को हैं।।

विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

भोंडा। (एक कहानी जो दिल को छू जाए) – Vikrant Rajliwal Writing Blog’s And Website’s (Reblog/Republish)

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राम जन्म। with YouTube link video

सुनिए मेरे यानी कि आपके मित्र विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक भक्तिमय काव्य रचना राम जन्म। आपके अपने यूट्यूब चैनल Voice Of Vikrant Rajliwal पर।

जय श्री राम।

एवं चैनल को सब्सक्राइब अवश्य कीजिएगा।

एक थे राजा बहुत महान।
नही थी पर उनके कोई संतान।।

रहती थी उनको एक चिंता यह भारी,
कैसे बढ़ पाएगा अब उनका महान वंश।

अभी तो है वो जिंदा, चल रही है श्वास उनकी मगर,
क्या आ पाएगा कभी इस धरा पर उनका भी अंश।।

देख राजा को अपने यू चिंतामग्न,
आए एक ऋषि और सोचा एक उपाय।

करके हवन किए उतपन जो उन्होंने कुछ फल।
हुआ सन्तोष कि मिलेगा राजन को अब अपने बल।।

किया शंका का निवारण उन्होंने सबकी,
दिया ज्ञान का फिर जो उन्होंने एक सन्देश।

फल नही है राजन ये कोई मामूली।
खिलेगी इससे सुनी बगिया की हर डाली।।

सुन कर वचन दिव्य अमृत के ज्ञानी ऋषि से,
हुआ सन्तोष उनको अत्यंत, खिल उठा जीवन खाली।।।

अब राजन को कुछ विचार सा जो आया।
फल लेकर ऋषि से वो उनको रानियो को दे आया।।

दिव्य फल पाकर समीप, चारो रानी भी हरषाई थी।
उनके सुने जीवन मे सुगन्ध बहार की जो अब आई थी।।

यह सब था विधान विधि का।
मायाजाल था स्वयं ईष्वर का।।

करने को नाश पाप का, धरा पर अवतार धर्म का आना था।
ये हवन ये फल ये विधान विधि का तो एक बहाना था।।

अब दुष्टो का अंत दूर नही।
अब सन्तो को किसी का डर नही।।

वह दिन भी प्रभु कृपा से जल्द आ गया।
आसमान से जब बादल काला छट गया।।

राम जन्म का दिन अत्यंत ही निराला था।
हर कोई था प्रसन्न और,
प्रसन्ता ने सबकी दुख को मार डाला था।।

किया स्थापित धर्म जो धरा पर, स्थापित आदर्श व्यवहारों से उनके हुआ।
हर बाधा झुक कर छट गई स्वयं, आदर्शो से उनके उदय सवेरा दिव्य हुआ।।

आखिर हाथो उनके ही संहार दुष्टो का हुआ।
खिला पुष्प मर्यादा का एक और उसका विस्तार हुआ।।

नही भूलना चाहिए कभी हमे।
राह दिव्य जो मिली उनसे हमे।।

आदर्श जीवन मर्यादित व्यवहार, धर्म जीवन से मिला उनके जो हमे।
हर बाधा को कर के पार, सयंम जीवन से विजय पताका,
हर्षोल्लास दिया जो हमे।।

आज हज़ारो वर्षो के उपरांत, भूल गया मर्यादा क्यों अपनी आज का स्वार्थी इंसान।
साथ पापी का देकर फैलाया जो भर्ष्टाचार, देख मासूमों निर्दोषों की पीड़ा भी नही जागता क्यों उनका धर्मो ईमान।।

कहा गया वो पुष्प धर्म (ईमानदारी, मर्यादा) का, खिलाया जो श्री राम ने था।
कर अधर्म का नाश पूण्य से, मर्यादा की माटी में, सूर्य एक नया जीवन में सबके जलाया था।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
29/11/2019 at 8:07 pm
(Republish)

शायरी।

🌹 आज भी दिखती है बोतल शराब की, होती है महसूस वो सुगंध उसकी समीप अपने जैसे बहार की।

जी हाँ मोहब्ब्त है आज भी मुझ को सुर्ख लहू के रंग सी, बेटी जो अंगूर की, वो है मोहब्ब्त पहली मेरी, बोतल शराब की, बोतल शराब की, बोतल शराब की।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

💥 एक संकल्प एक योगदान।

मित्रों मेरे जीवन का केवल एकलौता मकसद यही है कि मैं अपने जीवन अनुभवो से उन मासूम बालको को एक उचित दिशा का ज्ञान करवा सकूँ जो आज भी किसी ना किसी नशे की गिरफ्त में फंस कर अपना उज्वल भविष्य अनजाने ही बर्बाद कर रहे है।

काव्य शायरी नज़म ग़ज़ल दास्ताने लिखना एवं गाना केवल मेरा निजी शोक है एवं मैं जो पोस्ट करता हु की आप मेरा काव्य नज़म ग़ज़ल दस्तानों का कार्यक्रम बुक कर सकते है तो इसके पीछे केवल और केवल एकलौता कारण यही है कि मुझ को उन मासूम नशे से पीड़ित उन अबोध बालको की मदद करने हेतु बहुत सा रुपया चाहिए। जिससे मैं उन्हें कुछ मूलभूत सुविधाए प्रदान कर सकूँ। जिससे उनका उनके परिवार में पुनर्वास हो कर उनका जीवन  स्तर कुछ सुधर सके।

इसीलिए आप मेरा साहित्यिक काव्य शायरी का कार्यक्रम बुक कर के सीधे उन मासूम बच्चों को एक नया जीवन सहज ही प्रदान कर सकते है। इसके साथ ही यदि आप स्वयं किसी नशा मुक्ति या बाल सुधार कार्यक्रम के संचालक है तो आप आप ही मेरा साहित्यिक काव्य शायरी का कार्यक्रम निःशुल्क बुक कर अपना स्थान सुनिचित कर सकते है। मुझ को पूरी उम्मीद है कि जब आपके पेशेंट अपने बीच मे से ही निकले हुए किसी साहित्यकार की रचनाओँ को सुनेंगे तो उन्हें अवश्य ही आत्मशांति प्राप्त होएगी।
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💥 नशा एवं पारिवारिक कलेश एक दूसरे के साथ साथ ही चलते है। यहाँ नशे से तातपर्य है कि जब आप का आपके व्यसनों पर नियन्त्रण शेष नही बच पाता। या फिर आप नशे के समक्ष स्वयँ को जर्जर महसूस करते हुए अपना नियन्त्र खो देते है।

जब ऐसा होता है तो आपका सामना होता है पारिवारिक कलेश से एवं तब आपको आवश्यकता होती है एक ऐसे ज्ञानी या अनुभवी व्यक्तित्व के व्यक्ति की जो आपकी उस स्थिती को समझने में आपकी सहायता कर सकें।

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क्योंकि रचनात्मक रचनाएँ लिखना मेरा शौक है एवं नशा मुक्ति से पारिवारिक कलेश मुक्ति मेरा कर्म है। मैं नज़म शायरी, दास्तानों के कार्यक्रम के लिए पेमेंट इसलिए लेता हूं क्यों कि उन रुपयों से मैं अधिक विस्तृत पैमाने पर नशा मुक्ति एवं पारिवारिक कलेश मुक्ति हेतू निःशुल्क सेवा इस समस्त संसार के उन पीड़ित परिवारों को उपलब्ध करवा सकूँ।

इसलिए आप यदि मुझ से मेरी नज़म दस्तानों, काव्य, नज़म ग़ज़ल का कोई भी कार्यक्रम करवाते है तो आप सीधे तौर पर समाज के उन पीड़ित परिवारों के कल्याण हेतु अपना एक अनमोल सहयोग सहज ही प्रदान कर देते है।

अंतः एक बार पुनः आप सभी को सूचित करता हु की यदि आप उपरोक्त विषय नशा मुक्ति एवं पारिवारिक कलेश मुक्ति की समस्या का एक स्थाई समाधान प्राप्त करना चाहते है तो आज ही विक्रांत राजलीवाल जी से यानी कि मुझ से सीधा सम्पर्क कीजिए।

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धन्यवाद।
विक्रांत राजलीवाल।

सम्पर्क सूत्र है।

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एहसास

💥 सुबह सवेरे, नई उमंग,नई ताजगी से भरी हर श्वास, प्राण जीवन  उमंग चेतना से प्रफुल्लित ये जीवन एक आत्मज्ञान।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित

ईष्वर के बनाए हम पुतले जो माटी के, भरी है भीतर हमारे भावनाए जो नेकी भरी।

विकास हो आबाद हो हर क्षण उनका, ना दुखने पाए भूल से भी, ह्रदय किसी मासूम का कभी।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

मेरी शायरी ने मेरे काव्य को सँवारा है।

मेरे काव्य ने मेरी शायरी को निखारा है।।

करते है मोहब्ब्त एक दूसरे से मिलन प्रेम का, जी हाँ मोहदय, जी हाँ जनाब ये है एहसास ये है एहसास ये है एहसास।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

आज ही सब्सक्राइब करें आपके अपने यूट्यूब चैनल को एवं अपना अनमोल प्रेम स्वरूप आशीर्वाद प्रदान करें।
https://www.youtube.com/channel/UCs02SBNIYobdmY6Jeq0n73A

💥 सत्य स्वीकार। / 💥 Accept The Truth.

स्वयं को सबसे ख़ास समझते हुए अपने जीवन के हादसों को नकारना! कि मैं तो सबसे अलग हु मेरे साथ ऐसा कैसे हो सकता है। मेरी तो कोई भी ग़लती नही है। फिर मेरे साथ ऐसा कैसे हो सकता है? नही, नही मैं बिल्कुल सही हु, ऐसा तो हुआ है या नही हुआ है, मुझ को पता ही नही! अपने जीवन की समस्याओं को अस्वीकार करते हुए हमेशा ही मैं भागता रहा हु। और आज भी स्वयं को सबसे ख़ास या महत्वपूर्ण मानते हुए वास्तविकता को स्वीकार ना करू! तो मैं अपने जीवन को एक ऐसी क्रूर नरकाग्नि में स्वयं के द्वारा ना चाहते हुए भी स्वयं अपने जीवन को झुलसा दूंगा।

इसीलिए सर्वप्रथम मैं यह स्वीकार करता हु कि मैं भी एक पूर्णतः सामान्य जन के समान प्रसन्ता एवं आत्मशांति का हकदार हु। इसीलिए आज मैं अपने जीवन के उन सभी हादसों और समस्याओं को स्वीकारते हुए अपने स्वयं के विकास एवं आत्मशांति के प्रति ईमानदारी पूर्वक व्यवहार करता हु।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Accept The Truth.

Considering myself to be the most special, denying the accidents of my life, how can I be so different with me. There is no mistake of mine. How can this happen to me then? No, no, I am absolutely right, whether this has happened or not, I do not know! I have always been running away while rejecting the problems of my life. And even today, considering myself as the most special or important person and not accepting the reality, I will scorch my life in a cruel inferno fire even without wanting to by myself.

That is why, first of all, I accept that I am entitled to happiness and self-peace like a normal person. That is why today I accept all those accidents and problems in my life and behave honestly for my own development and self-peace.

Thank you

Written by Vikrant Rajliwal.