🇮🇳 एक भारतीय। 🇮🇳 An Indian.

जिस सरकार में अपने प्रान्त एवं देश के गरीब जनता के प्रति संवेदनशीलता ना हो। एवं जो विपक्ष सरकार के हर फैसले का बिना किसी जांच पड़ताल के विरोध करें।

जो सरकार स्वयं को प्राचीनकालीन राज व्यवस्था के समान स्वयं को सर्वशक्तिमान समझते हुए 10 गुनहगारों के साथ 1 निर्दोष को कुचलने में कोई अनैतिकता नही मानती।

एवं जो विपक्ष निरंकुश तानाशाह को सत्ताधारियों के विकास की आड़ में क्रूर कदमो का विरोध नही करते।

वहाँ की धरती निर्दोषों एवं बेगुनाहों के अकारण शोषण से बंजर हो अपना अस्तित्व ही खो देगी।

विक्रांत राजलीवाल।

🇮🇳 An Indian. (Translated)

Government in which there is no sensitivity towards the poor people of our province and country. And those who oppose every decision of the opposition government without any investigation.

The government, which considers itself as almighty like the ancient royal system, does not consider it immoral to crush 1 innocent with 10 criminals.

And those who do not oppose the brutal steps of the opposition to the autocratic dictator under the cover of the development of the rulers.

The land there will be barren due to unprovoked exploitation of innocents and innocents will lose its existence.

Vikrant Rajliwal.

Author Vikrant Rajliwal (Poet, dramatist and novelist)
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मैं आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल।

नमस्कार मित्रों, जैसा कि आपको मैंने एक लेख के जरिए पूर्व सूचित किया था कि शीघ्र ही मैं अपने ब्लॉग साइट https://vikrantrajliwal.com पर प्रकाशित अपने सैकड़ो, नज़म, ग़ज़ल, काव्य-कविताओँ और दर्दभरी मोहब्ब्त की नज़म दस्तानों के साथ व्यंग्य किस्सों एवं भोंडा। (एक कहानी जो दिल को छू जाए) का संग्रह पुस्तक के रूप में करने का प्रयास करूंगा।

परन्तु अत्यंत ही गम्भीरता से विचार विर्मश के उपरांत अब यह निश्च्य किया गया है कि मेरी इन रचनाओँ के पाठन का आनन्द मेरी और आपकी अपनी ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर आपको उपलब्ध है।

इसीलिए अब सर्वप्रथम मेरी वह कहानी जिसको मैं वर्ष 2016 से पूर्ण करने का प्रयास कर रहा हु। आपके पाठन हेतु एक पुस्तक के रूप में आपके सपुर्द्ध कर दी जाए। अपनी ब्लॉग वेबसाइट की रचनाओं का संग्रह कुछ समय के उपरांत अवश्य करने का प्रयास करूंगा।

शीघ्र ही जीवन के हर रंग को दर्शाती हुई मेरी वह कहानी जो मेरे ह्रदय के अत्यंत ही समीप है को एक पुस्तक के रूप में आप सभी प्रियजनों के सपुर्द्ध कर दी जाए। कृप्या अपना प्रेम एवं आशीर्वाद अपने रचनाकार मित्र विक्रांत राजलीवाल पर बनाए रखें।

आशा करता हु आपको मेरी आगामी ह्रदय को छू लेने वाली कहानी जिसको लिखते समय भी मैं अपने आंसुओ को ना रोक सका; अवश्य ही पसन्द आएगी।

धन्यवाद।

आपका मित्र विक्रांत राजलीवाल।

एहसास

💔 दर्द ए दिल की अपने कोई दवा अभी तक जो मुझे मिली नही।

हर जख्म फट गए मेरे बेअसर हर मरहम को कर के खुद ही।।

टूट कर मासूम एहसास हर लम्हा मेरे जो मरते गए; हर लम्हा ही हम टूटे एहसासों से जो टूटते गए।

सितम ज़िंदगी के हंसते हुए हम सहते गए; हर सितम से जिंदगी के सबक कोई नया जो सीखते गए।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

19 जनवरी रविवार। समय दोपहर 2:52 बजे

ज़ख्म दिल के जब सील न सके!

दिल से।

🌹 फूल, पते, ग़ुलाब की पंखुड़ियां सब के सब खिल कर मुरझा गए; सब मौसम, आ कर गुजर गए, एक तुम ना आए, आ आ कर अश्क़ आँखों मे हमारी सुख गए।

बादल, वर्षा, वो बहता पानी, याद किसी की दिला गया; धड़कती धड़कन, वो बहता झरना, नाम बंद जुबां पर किसी का जो याद आ गया।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

💥 सत्य। (रेपब्लिशेड)

VIKRANT RAJLIWAL WRITING POETRY, SHAYRI, STORY, ARTICLES, BLOG’S AND WEBSITE’S

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Posted on
JANUARY 14, 2020 #repost #share

💥 सत्य।

by Voice Of Vikrant Rajliwal ( My Writing, My Blogs & My Voice).In Anecdote, Article , लेख।, अध्यात्मितकता, दास्तान, विचार, शिक्षा, Blog, Education, Feelings, Information, Spirituality, Thought.Leave a Commenton 💥 सत्य।

आज की मेरी यह पोस्ट उन मासूम बच्चों एव नवयुवकों को समर्पित है; जो आज भी किसी ना किसी हानिकारक व्यसन की चपेट में फंस कर, अपने जीवन को बर्बाद किए जा रहे है या जो अब किसी हानिकारन व्यसन का सेवन तो नही कर रहे, परन्तु उन्हें अपने जीवन मे प्रगति करने के लिए कुछ दिशा निर्देश नही प्राप्त हो रहे है।

मैं विक्रांत राजलीवाल भी अपने बच्चपन में 14 से 16 वर्ष की आयु में अज्ञानवश कई हानिकारक व्यसन का सेवन कर लिया था। एवं 16 वर्ष की आयु में मैने अपने पिताजी से सहायता मांगी और उन्हें अपनी वास्तविक मनोस्थिति से अवगत करवाया; तदोपरांत कई वेद, हकीमों, तांत्रिकों और हस्पताल के इलाज से थक हार कर अंत मे मुझ को नारकोटिक्स एनॉनिमस के कार्यक्रम से जुड़ने का एक अवसर प्राप्त हुआ। परंतु इसे किस्मत की अनहोनी कहे यह भाग्य का लेखा कि मुझ को नारकोटिक्स एनॉनिमस का कार्यक्रम एक बंधक अवस्ता में प्राप्त हुआ एवं जहाँ आप के प्रत्येक मनोभवो को आपकी चाल या वहाँ से मुक्ति हेतु कोई घिनोनी सजिक के रूप में ही देखा जाता है। जो आपके सकरात्मक एहसास को इस प्रकार से कुचल देता है कि जैसे आपका स्वयं का कोई वजूद ही ना हु। और आपको ऐसा एहसास होता है मानो सरेराह आपके मासूम व्यक्त्विक का बलात्कार किया जा रहा हु और आपकी सहायता हेतु कोई भी ईमानदार व्यक्तित्व वहाँ उपस्थित ना हु। उस समय मेरे साथ वहाँ समाज के छठे हुए अपराधि जो अपने गुनाह की सजा जेल कारावास के रूप में कठोर दंड भुगत चुके थे। के मध्य प्राप्त हुआ। जिनमे से अधिकतर मेरी ही हम उम्र के 17 से 19 वर्ष के हु थे।

मैंने वहाँ डिस्चार्ज प्राप्त किया एवं 13 महीनों तक उनके साथ जुड़ा रहा। तदोपरांत मैंने सोचा कि अब पढ़ाई करनी चाहिए। जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने मुझ को घर जाने की इजाजत रद्द कर दी। उस स्थिति में भय के मारे मैं उनके ऑफिस से भागा, और तुरन्त पकड़ा भी गया। जिसके दंड स्वरूप मुझ को पुनः एक अंदर रस्सियो से बांध कर डाल दिया गया। और भी कई प्रकार की यातना झेलने के उपरांत। जिसमे सबसे घातक थी रस्सियों के मध्य बंधक अवस्था मे एक अन्य साइको पेशेंट के जरिए बिजली की तारो से करंट लगाने का एक घिनोना प्रयास को अंजाम देना। उस अवस्था में मेरी समीप के एक मित्र में उसको पकड़ कर मेरी जान बचाई। खैर ऐसे ही बहुत यातनाओं को फेस कर के मेरा पुनः डिस्चार्ज हुआ।

अब जिस स्थिति मैं था उस स्थिति में दो मार्ग मेरे समुख थे प्रथम क्रोध वश पुनः नशा करते हुए जीवन को बर्बाद कर दु या स्वयं को साक्षर कर के स्वयं के स्वप्न IAS की परीक्षा को उतरीं करने का एक कठोर एवं जटिल मार्ग पर चलने की हिम्मत दिखा सकु। जिससे मुझ में वह समर्थ आ सके कि मैं भविष्य में कई मासूम बच्चों एव नवयुवकों की सहायता प्रदान कर सकूँ। तो मैंने द्वितीय मार्ग को चुना एवं 10वी से ग्रेजुएशन तक साक्षर होने एवं ज्ञान अर्जित करने के लिए मेने प्रयास किया। इसी दौरान मेने एक वर्षीय कम्प्यूटर कार्यक्रम के साथ ताइपिंग भी सीखी। कोचिंग करि। एवं असिस्टेंट कमंडेड से लेखक IAS तक कि परीक्षा को फेस करा। अंततः सरस्वती माँ की कृपा हुई और वर्ष 2016 में सामाजिक एवं मानवता की भवनाओं से प्रेरित अपनी प्रथम काव्य एवं कविताओं की पुस्तक प्रकाशित हुई। और वर्ष 2017 में मैने अपना प्रथम ब्लॉग बनाया और अपने ब्लॉग के साथ सोशल मीडिया पर भी लिखता रहा हु। और अब सक्रिय हु।

अंत में मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि…

🕊️ ए मासूम परिंदों देखेगा यह सम्पूर्ण संसार तुम्हारी अनन्त उड़ान को। मसल कर रख दु हर विपरीत परिस्थितियों एव हालातो को; कि दिखा सकूँ जो अकेले ही चलते चले जाने की हिम्मत तो मान जो कारवाँ हमें ना मिल सका उसे तुम अवश्य पा जाओंगे, उसे तुम अवश्य पा जाओंगे हा उसे तुम अवश्य पा जाओंगे।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक सत्य।

दिल्ली विश्विद्यालय के फेकल्टी ऑफ लॉ में वर्ष 2018 के दौरान वार्षिक खेल महोत्सव में काव्य एवं नज़म का सुनाते हुए।

मकर संक्रांति की आप सभी शुभचिंतकों एवं महानुभवों को आपके मित्र विक्रांत राजलीवाल की ओर से हार्दिक बधाइयां। Congratulations to all your well wishers and great people of Makar Sankranti on behalf of Vikrant Rajliwal.

💥 सत्य।

आज की मेरी यह पोस्ट उन मासूम बच्चों एव नवयुवकों को समर्पित है; जो आज भी किसी ना किसी हानिकारक व्यसन की चपेट में फंस कर, अपने जीवन को बर्बाद किए जा रहे है या जो अब किसी हानिकारन व्यसन का सेवन तो नही कर रहे, परन्तु उन्हें अपने जीवन मे प्रगति करने के लिए कुछ दिशा निर्देश नही प्राप्त हो रहे है।

मैं विक्रांत राजलीवाल भी अपने बच्चपन में 14 से 16 वर्ष की आयु में अज्ञानवश कई हानिकारक व्यसन का सेवन कर लिया था। एवं 16 वर्ष की आयु में मैने अपने पिताजी से सहायता मांगी और उन्हें अपनी वास्तविक मनोस्थिति से अवगत करवाया; तदोपरांत कई वेद, हकीमों, तांत्रिकों और हस्पताल के इलाज से थक हार कर अंत मे मुझ को नारकोटिक्स एनॉनिमस के कार्यक्रम से जुड़ने का एक अवसर प्राप्त हुआ। परंतु इसे किस्मत की अनहोनी कहे यह भाग्य का लेखा कि मुझ को नारकोटिक्स एनॉनिमस का कार्यक्रम एक बंधक अवस्ता में प्राप्त हुआ एवं जहाँ आप के प्रत्येक मनोभवो को आपकी चाल या वहाँ से मुक्ति हेतु कोई घिनोनी सजिक के रूप में ही देखा जाता है। जो आपके सकरात्मक एहसास को इस प्रकार से कुचल देता है कि जैसे आपका स्वयं का कोई वजूद ही ना हु। और आपको ऐसा एहसास होता है मानो सरेराह आपके मासूम व्यक्त्विक का बलात्कार किया जा रहा हु और आपकी सहायता हेतु कोई भी ईमानदार व्यक्तित्व वहाँ उपस्थित ना हु। उस समय मेरे साथ वहाँ समाज के छठे हुए अपराधि जो अपने गुनाह की सजा जेल कारावास के रूप में कठोर दंड भुगत चुके थे। के मध्य प्राप्त हुआ। जिनमे से अधिकतर मेरी ही हम उम्र के 17 से 19 वर्ष के हु थे।

मैंने वहाँ डिस्चार्ज प्राप्त किया एवं 13 महीनों तक उनके साथ जुड़ा रहा। तदोपरांत मैंने सोचा कि अब पढ़ाई करनी चाहिए। जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने मुझ को घर जाने की इजाजत रद्द कर दी। उस स्थिति में भय के मारे मैं उनके ऑफिस से भागा, और तुरन्त पकड़ा भी गया। जिसके दंड स्वरूप मुझ को पुनः एक अंदर रस्सियो से बांध कर डाल दिया गया। और भी कई प्रकार की यातना झेलने के उपरांत। जिसमे सबसे घातक थी रस्सियों के मध्य बंधक अवस्था मे एक अन्य साइको पेशेंट के जरिए बिजली की तारो से करंट लगाने का एक घिनोना प्रयास को अंजाम देना। उस अवस्था में मेरी समीप के एक मित्र में उसको पकड़ कर मेरी जान बचाई। खैर ऐसे ही बहुत यातनाओं को फेस कर के मेरा पुनः डिस्चार्ज हुआ।

अब जिस स्थिति मैं था उस स्थिति में दो मार्ग मेरे समुख थे प्रथम क्रोध वश पुनः नशा करते हुए जीवन को बर्बाद कर दु या स्वयं को साक्षर कर के स्वयं के स्वप्न IAS की परीक्षा को उतरीं करने का एक कठोर एवं जटिल मार्ग पर चलने की हिम्मत दिखा सकु। जिससे मुझ में वह समर्थ आ सके कि मैं भविष्य में कई मासूम बच्चों एव नवयुवकों की सहायता प्रदान कर सकूँ। तो मैंने द्वितीय मार्ग को चुना एवं 10वी से ग्रेजुएशन तक साक्षर होने एवं ज्ञान अर्जित करने के लिए मेने प्रयास किया। इसी दौरान मेने एक वर्षीय कम्प्यूटर कार्यक्रम के साथ ताइपिंग भी सीखी। कोचिंग करि। एवं असिस्टेंट कमंडेड से लेखक IAS तक कि परीक्षा को फेस करा। अंततः सरस्वती माँ की कृपा हुई और वर्ष 2016 में सामाजिक एवं मानवता की भवनाओं से प्रेरित अपनी प्रथम काव्य एवं कविताओं की पुस्तक प्रकाशित हुई। और वर्ष 2017 में मैने अपना प्रथम ब्लॉग बनाया और अपने ब्लॉग के साथ सोशल मीडिया पर भी लिखता रहा हु। और अब सक्रिय हु।

अंत में मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि…

🕊️ ए मासूम परिंदों देखेगा यह सम्पूर्ण संसार तुम्हारी अनन्त उड़ान को। मसल कर रख दु हर विपरीत परिस्थितियों एव हालातो को; कि दिखा सकूँ जो अकेले ही चलते चले जाने की हिम्मत तो मान जो कारवाँ हमें ना मिल सका उसे तुम अवश्य पा जाओंगे, उसे तुम अवश्य पा जाओंगे हा उसे तुम अवश्य पा जाओंगे।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक सत्य।

दिल्ली विश्विद्यालय के फेकल्टी ऑफ लॉ के वार्षिक खेल महोत्सव के दौरान काव्य पाठन करते हुए।

🌹 टूटा गुलाब, बिखुड़ी जो पंखुड़ियां; हर जख्म महोब्बत के नासूर हो गए।
याद में एक सितमगर कि ए दोस्त; हम जीते जी ही जो फ़ना हो गए।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

💗
हम तुम्हें ना पा सकें और तुम हर बार हमारे मासूम एहसासों का कत्ल करते गए।

नही एतबार अब हमें ख़ुद के एहसासों पर शायद, फक्त यकीं एहसासों पर तुमरे हम जो करते गए।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

मेरा एक Your qoute पर लिखा गया एक दर्द।

🙏 लोहड़ी के हर्षोल्लास के त्यौहार की आप अभी ह्र्दयज़ीज़ों को आपके अपने मित्र विक्रांत राजलीवाल की ओर से हार्दिक बधाइयां। 💖💖

🙏 Hearty congratulations to your hearty friend Vikrant Rajaliwal on the occasion of the festival of joy of Lohri. 💖💖

एक सूचना।

🌅 सुप्रभात मित्रों शीघ्र ही आपको मेरी ब्लॉग वेबसाइट पर प्रकाशित मेरी रचनाओँ एवं कहानी के संग्रह के साथ ही ; मेरी प्रथम विस्तृत कहानी पाठन हेतु उपलब्ध करवा दी जाएगी।

जिसके शीर्षक से आपको शीघ्र ही सूचित कर दिया जाएगा। कृपया अपना अनोमोल प्रेम स्वरुप आशीर्वाद प्रदान कीजिए।

कवि शायर एवं कहानीकार विक्रांत राजलीवाल।